नेता प्रतिपक्ष कौशिक का प्रदेश सरकार पर तीखा हमला- तमाम योजनाएँ सियासी नौटंकियों की भेंट चढ़कर दम तोड़ चुकी हैं और बघेल को झूठी शान बघारने…
Author: mediasaheb
इंजीनियरिंग छोड़कर खुद को दिया एक मौका, पहले ड्रॉप में कर लिया नीट क्वालिफाई भिलाई(mediasaheb.com). बचपन से लोग डॉक्टर, इंजीनियर बनने के सपने देखते हैं लेकिन आज बिलासपुर के रहने वाले जिस डॉक्टर से आपका परिचय करवा रहे वो हर दिन मिलिट्री में जाने के सपने देखते हैं। यही कारण था कि उन्होंने शुरूआत से मैथ्स स्ट्रांग रखा। 11 वीं में जब विषय चयन की बारी आई तो उन्होंने बायो ले लिया। मैथ्स के बिना पढऩे मेंं मन नहीं लगा तो बोर्ड एग्जाम बायो और मैथ्स साथ पढ़कर देने का फैसला किया। 12 वीं तो निकल गया लेकिन अब बारी आई एक सही दिशा में आगे बढऩे की। ऐसे में डॉक्टर साहब कन्फ्यूज हो गए। उन्हें समझ में नहीं आया आखिर क्या किया जाएगा। पीएमटी और पीइटी दोनों एग्जाम दिया था। पीइटी में रैंक अच्छा आया और अच्छे इंजीनियरिंग कॉलेज में पसंद की ब्रांच में एडमिशन भी मिल रहा था। कहते हैं कुछ चीजें ऊपर वाले के हाथ में होती है। अचानक उनका मन बदला और फैसला किया कि एक मौका खुद को पीएमटी के लिए और देंगे। बस यही से डॉक्टर बनने की जर्नी से शुरूआत हुई। रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में जूनियर रेसीडेंट के पद पर पदस्थ डॉ. अखिलेश प्रताप सिंह ने बताया कि उन्होंने घर वालों से बात करके सिर्फ एक ड्रॉप लेने का फैसला किया। इस एक ड्रॉप में पढ़ाई में कोई कमी नहीं रहना देना चाहते थे। इसलिए दिन रात मेहनत की। आखिरकार साल 2014 में नीट क्वालिफाई करके बिलासपुर मेडिकल कॉलेज पहुंच गए। डॉ. अखिलेश कहते हैं कि कभी-कभी जीवन में कुछ अलग करने के लिए खुद को एक मौका देना जरूरी होता है। अगर आपने ठान लिया तो उसे हासिल करके ही दम लेना चाहिए। रटने में होती थी दिक्कत इसलिए बायो को प्रैक्टिकली पढ़ा डॉ. अखिलेश ने बताया कि उन्हें शुरू से रटकर पढऩा पसंद नहीं था। जब मेडिकल एंट्रेस की तैयारी शुरू की उस वक्त बायो में खासी दिक्कत होती थी। इसलिए मैंने बायो को फिजिक्स, कैमेस्ट्री की तरह प्रैक्टिकली पढऩा शुरू किया। दिनचर्या और आस-पास की हर चीज को बायो से रिलेट करके पढ़ता था। इससे चीजें जल्दी याद होने लगी। बिलासपुर से जब कोचिंग के लिए भिलाई आया तो यहां कॉम्पिटिशिन का बहुत अच्छा माहौल मिला। बाकी बच्चों को पढ़ता देखकर उत्साह बना रहता था। यही कारण है कि मैंने कभी क्लास बंक नहीं किया। कोचिंग में जब बारिश के कारण बाकी बच्चे नहीं आते तब भी मैं छाता पकड़कर भीगते कोचिंग पहुंच जाता था। मन ही मन निश्चिय किया था कि जो भी करना है वो इस एक साल में करना है। एक साल से एक दिन भी ज्यादा समय देने का धैर्य नहीं था मेरे अंदर। सचेदवा के मोटिवेशन से कभी नहीं हुई निराशा हावी मेडिकल एंट्रेस की तैयारी के लिए सचदेवा कॉलेज भिलाई को चुनने वाले डॉ. आखिलेश कहते हैं कि यहां की सबसे अच्छी बात पॉजिटिव माहौल है। चाहे ड्रॉपर हो या फ्रेशर हर बच्चे को एक ही तरह से सारे टीचर्स देखते हैं। हर दिन क्लास में टीचर इतना ज्यादा मोटिवेट कर देते थे कि कभी निराशा हावी नहीं हुई। टेस्ट सीरिज के दौरान सचदेवा के डायरेक्टर चिरंजीव जैन सर की छोटी-छोटी प्रेरक कहानियां, एक्स स्टूडेंट्स की जर्नी देखकर, सुनकर कभी डिप्रेशन भी हावी नहीं हुआ। हमेशा एक सकारात्मक सोच मन में बनी रही कि मुझे किसी भी हाल में नीट क्वालिफाई करना है। सचदेवा के टीचर्स के सलेक्टिव स्टडी मटेरियल से भी आगे बढऩे में बहुत मदद मिली। पढ़ाई में गेप नहीं करें नीट की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स से कहना चाहंूगा कि कोचिंग में आठ से 9 महीने पढ़ाई के बाद बहुत सारे स्टूडेंट्स एग्जाम से ठीक पहले घर चले जाते हैं। एक या दो महीने के इस समय में घर में पढऩे का शेड्यूल अचानक बदल जाता है। इसलिए कई बार बच्चे पढ़ाई में गेप करते चले जाते हैं। आखिरी समय में होने वाली ये गेप परीक्षा में आपको कई रैंक पीछे ले जाती है। इसलिए पढ़ाई में गेप न करे। एग्जाम प्रेशर को दूर करने के लिए बार-बार हर पढ़े हुए विषय का रिविजन करें।(For English News : thestates.news)
श्री ऋषभदेव मंदिर सदरबाजार में सजे भव्य 25वें नवकार दरबार में अनुष्ठानों की श्रृंखला- आठ दिवसीय 64 प्रकारी पूजा का पंचम दिवस, लोढ़ा वींग्स भक्ति मंडल…
प्रदेश प्रभारी पी.एल. पुनिया, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, प्रभारी सचिव डाॅ. चंदन यादव, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम रहेंगे उपस्थित रायपुर (media saheb.com) |14 अक्टूबर 2021 गुरूवार को दोपहर 12…
बालाघाट (media saheb.com) राजमाता विजया राजे सिंधिया त्याग एवं समर्पण की प्रति मूर्ति थी। उन्होंने राजसी ठाठ-बाट का मोह त्यागकर जनसेवा को अपनाया तथा सत्ता के…
बिलासपुर (media saheb.com) कोयला मंत्रालय में नामांकित प्राधिकरण ने पिछले महीने कोयले की बिक्री के लिए निर्धारित 11 कोयला खानों (कोयला मंत्रालय (एसपी) अधिनियम के भाग…
डॉक्टर बनने का सपना लेकर बस में साइकिल और दो बैग लेकर गांव से आया शहरजानता था घर वालों के पास नहीं है ज्यादा पैसे, एक साल में मेडिकल एंट्रेस क्वालिफाई करने सेट किया टारगेट भिलाई.(mediasaheb.com) महासमुंद जिले के छोटे से गांव दूधहीपाली के डॉक्टर दयानंद होता बचपन से डॉक्टर बनने चाहते थे। हेल्थ डिपार्टमेंट में कार्यरत पिता के साथ जब वे हॉस्पिटल जाते तो अक्सर डॉक्टरों से टकराते। इस दौरान मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टरों को देखकर वे मन ही मन उनके जैसे बनने का सपना सजाने लगे। जब 11 वीं में विषय चयन की बारी आई तो उन्होंने बायो लिया। साथ ही साथ मेडिकल एंट्रेस क्वालिफाई करने के लिए खुद को तैयार करने लगे। 12 वीं बोर्ड के बाद जब पहली बार एग्जाम दिया तब समझ में आया कि तैयारी में अभी बहुत कमी है। इसलिए किसी तरह गांव से दो बैग और बस में साइकिल लेकर भिलाई आ गए। उस वक्त परिवार की आर्थिक स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं थी। ऐसे में दयानंद ने तय किया जो भी करना है इस एक साल में ही करना है। हिंदी मीडियम और गांव के स्कूल से पढऩे के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और कड़ी मेहनत करते रहे। एक साल के ड्रॉप के बाद ऑल इंडिया और सीजी पीएमटी दोनों क्वालिफाई कर लिया। साल 2007 में जगदलपुर मेडिकल कॉलेज में एडमिशन लेकर एमबीबीएस की पढ़ाई की। डॉ. होता कहते हैं कि हर स्टूडेंट को अपनी गलती से सीख लेनी चाहिए। खुद से इन गलतियों को दोबारा न दोहराने का वादा भी करना चाहिए। नहीं आता था कुछ भी समझ, सोचता था कहीं पीछे न रह जाऊं शिशु रोग विशेषज्ञ और एम्स रायपुर में सीनियर रेसीडेंट के पद पर काम कर रहे डॉक्टर होता ने बताया कि जब वे पहली बार शहर आए तो उन्हें कुछ भी समझ नहीं आता था। कोचिंग में इंग्लिश मीडियम स्टूडेंट के साथ बैठने में भी डर लगता था। मैं सोचता था कि कहीं इनसे पीछे तो नहीं रह जाऊंगा। धीरे-धीरे माहौल में ढलने की कोशिश की। एक ही टॉपिक को दस-दस बार पढ़ता था ताकि एग्जाम में सबकुछ साल्व कर सकूं। घर के हालात को देखकर पहले ही पता था कि दूसरा चांस नहीं मिलेगा इसलिए इस मौके को गंवाना नहीं चाहता था। शुरूआत में बायो काफी टफ लगता था, क्योंकि बायो में रटने का पार्ट ज्यादा था। कैमेस्ट्री-फिजिक्स को इजी ट्रिक्स के साथ पढऩे में मजा आने लगा। कभी-कभी मन निराश भी होता था कि पता नहीं सलेक्ट हो पाऊंगा भी कि नहीं पर दूसरे ही पल पढऩे बैठ जाता। घर से पहली बार बाहर निकलने के कारण मेस का खाना सूट नहीं करता था जिसके कारण कई बार बीमार भी हुआ। सचदेवा में फीस माफ होने से पढऩे का उत्साह हुआ दोगुना डॉ. होता ने बताया कि सचदेवा में आने से पहले उन्होंने सुना था कि 12 वीं बोर्ड में अच्छे रिजल्ट वाले बच्चों की आधी फीस माफ कर दी जाती थी। इसी उम्मीद में अपने चचेरे भाई और दोस्तों के साथ भिलाई पहुंच गया। सचदेवा के बारे में जो सुना था वो यहां आकर वाकई सच निकला। फीस में छूट मिलने से मेरा उत्साह दोगुना बढ़ गया। सचदेवा के टीचर्स और यहां के पॉजिटिव माहौल में अपने सपने को पूरा होता हुआ देखने लगा। टेस्ट सीरिज में जब टॉपर का नाम स्टेज से लिया जाता था तब मैं भी खुद को उन्हीं टॉपर्स के साथ खड़ा हुआ पाता था। सदचेवा के डायरेक्टर चिरंजीव जैन सर ने न सिर्फ पढ़ाई बल्कि आर्थिक रूप से भी काफी मदद की। उनकी बदौलत ही मैं एक साथ दो एग्जाम क्वालिफाई कर पाया। कितना भी बुरा हो जाए नेगेटिव बातों से बनाएं दूरी नीट की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स ये कहना चाहता हूं कि लाइफ में कितना भी बुरा क्यों न हो जाए आपको नेगेटिव बातों से दूरी बनाकर ही रखना है। अपने आप पर भरोसा करना सीखे। हर स्टूडेंट को अपनी सफलता पर शक होता है, बार-बार मन भटकता है कि पता नहीं सलेक्शन होगा कि नहीं। ऐसे समय में शांत रहकर अपनी तैयारी को और भी ज्यादा पुख्ता करते रहें। सफलता आपकी सोच से कहीं ज्यादा बेहतर होगी। हर पढ़े हुए चीज का रिविजन जरूर करें।(For English News : thestates.news)
बिलासपुर (media saheb.com) कोयला मजदूर सभा (एचएमएस) एसईसीएल मुख्यालय बिलासपुर शाखा के तत्वावधान में दिनांक 10.10.2021 को एसईसीएल वसंत विहार स्थित कोयला मजदूर सभा कार्यालय में…
रायपुर, (media saheb.com) मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एवं सिहावा विधायक डॉ. लक्ष्मी धु्रव के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से गए प्रतिनिधिमंडल…
दुबई, (media saheb.com) चेन्नई सुपर किंग्स (CSK ) के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने यहां रविवार को पहले क्वालीफायर मुकाबले में दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ रोमांचक…

