- जीवन में सफलता से बड़ी स्वास्थ्य को मानने डॉ. दिनेश कुमार कुर्रे कहते हैं सबसे जरूरी है मन पर कंट्रोल करना
- तीन साल के ड्रॉप में दो साल सेल्फ और एक साल कोचिंग में स्टडी करके क्वालिफाई किया नीट
भिलाई(media saheb.com) | लाइफ में हेल्थ को सफलता की सबसे बड़ी कुंजी मानने वाले एक ऐसे डॉक्टर से आपको रूबरू करवा रहे हैं जो खुद सिकलीन जैसे जेनेटिक बीमारी से पीडि़त हैं। बीमारी से लड़ते हुए आज खुद डॉक्टर बनकर रायगढ़ जिले के ग्रामीण सरकारी अस्पताल में मेडिकल ऑफिसर के रूप में अपनी सेवा दे रहे हैं। ये कहानी है जांजगीर चांपा जिले के छोटे से गांव मकराजी के रहने वाले डॉ. दिनेश कुमार कुर्रे की जिन्होंने तीन साल का ड्रॉप लेकर साल 2013 में नीट क्वालिफाई किया। डॉ. दिनेश कहते हैं कि वे पढ़ाई को जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं मानते बल्कि ये सोचते हैं हेल्थ इज वेल्थ। शायद यही कारण है कि सफलता के लिए निराशा से ज्यादा आशा की किरण मन में हावी थी। तबीयत का ख्याल रखते हुए धीरे-धीरे खुद को नीट क्वालिफाई करने के काबिल बनाया और तीसरे साल में पूरी जोर आजमाइश की।
कैजुअल्टी में देखा था डॉक्टर को मरीज की जान बचाते हुए
डॉ. दिनेश ने बताया कि 11 वीं कक्षा में किसी मरीज के साथ वे जिला अस्पताल गए थे। वहां पर कैजुअल्टी में एक सीरियस पेशेंट आया वो जिंदगी और मौत से लड़ रहा था तब डॉक्टरों ने इतनी मुश्किल परिस्थितियों में भी उसकी जान बचा ली। उस दिन लगा कि धरती पर अगर कोई भगवान की जगह ले सकता है तो वो है डॉक्टर। इसलिए 11 वीं में बायो लेकर डॉक्टर बनने का सपना सजाया। शुरूआत में 12 वीं बोर्ड के बाद एक साल घर में बैठकर सेल्फ स्टडी की, लेकिन रिजल्ट अच्छा नहीं आया। दूसरे साल भिलाई के सचदेवा कॉलेज में एडमिशन लिया। यहां रहकर तैयारी की लेकिन दूसरे अटेम्ट में पेपर साल्व करते हुए क्रम का ख्याल नहीं रख पाया। जिसके कारण असफलता मिली। तीसरे प्रयास में फिर सेल्फ स्टडी करके मैदान पर उतरा और नीट क्वालिफाई कर लिया।
सिस्टमेटिक पढऩे का फंडा मिला सचदेवा में
सीनियर्स और परिवार के कुछ लोगों ने सचदेवा जाने की सलाह दी थी। डॉ. दिनेश ने बताया कि जब पहली बार उन्होंने सचदेवा में कदम रखा तो यहां का माहौल बिल्कुल वैसे ही था जैसे एक काम्पिटेटिव एग्जाम के कोचिंग का होना चाहिए। बच्चे पढऩे में इस कदर खोए हुए थे उनके बाजू में क्या चल रहा उसकी तक खबर नहीं थी। यहां के टीचर्स के प्रॉपर गाइडेंस में सिस्टमेटिक पढऩे का फंडा मिला। जब कभी निराश होता तो सचदेवा के डायरेक्टर चिरंजीव जैन सर की मोटिवेशन बातें सुनकर दोगुनी मेहनत के लिए तैयार हो जाता था। चिरंजीव जैन सर की एक बात बहुत अच्छी लगी जिसे मैंने जीवन का सूत्र बना लिया। वो हमेशा कहते हैं कि लाइफ का सबसे बड़ा अचीवमेंट गुड हेल्थ है, बाकी सब तो बाई प्रोडक्ट हैं। इसलिए तन और मन दोनों का स्वस्थ होना बहुत जरूरी है। अगर हम अपने मन पर कंट्रोल कर सकते हैं तो दुनिया के किसी भी परीक्षा को क्वालिफाई कर सकते हैं।
खुद को आखिरी मौका देने की बजाय लडऩे के लिए करो तैयार
नीट की तैयारी कर रहे बच्चों से यही कहूंगा कि खुद को आखिरी मौका कभी नहीं देना चाहिए, क्योंकि जब तक हम जिंदा है हम कुछ न कुछ नया सीखते चले जाएंगे। इसलिए हमेशा हर परिस्थिति से लडऩे के लिए तैयार रहें। जब भी नीट का पेपर साल्व करें एक क्रम जरूर बनाएं। जैसे बायो को सबसे पहले, फिर कैमेस्ट्री और अंत में फिजिक्स को साल्व करें। इन तीनों विषयों में फिजिक्स टाइम टेङ्क्षकग हैं। यदि फिजिक्स के किसी प्रश्न में अटक गए तो आपका टाइम मैनेजमेंट गड़बड़ा सकता है। इसलिए एक ऑर्डर को जरूर फॉलो करें। For English News : the states.news

