नई दिल्ली, (media saheb.com) जिन व्यक्तिगत करदाताओं ने अभी तक वित्त वर्ष 2019-20 की आयकर रिटर्न नहीं भरी है, उनके लिए ये बेहद महत्वपूर्ण खबर है।…
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नई दिल्ली, (media saheb.com) । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन नये कृषि कानूनों को लेकर हो रहे आंदोलन के लिए कांग्रेस एवं तृणमूल कांग्रेस पर जमकर…
रायपुर(#mediasaheb.com) कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के प्रदेश अध्यक्ष अमर परवानी, कार्यकारी अध्यक्ष मंगेलाल मालू, विक्रम सिंहदेव, महामंत्री जितेंद्र दोषी, कार्यकारी महामंत्री परमानंद जैन एवं…
नीट क्वालिफाई करने वाले नक्सल प्रभावित बस्तर के शुभम की कहानी भिलाई(media saheb.com) . देश में लाल सलाम और माओवादी हिंसा के लिए जाने-जाने वाला बस्तर संभाग बदलते वक्त के साथ अपनी शैक्षणिक प्रतिभाओं से भी नई पहचान बना रहा है। बचपन से एवरेज स्टूडेंट रहे नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग के कोण्डागांव जिले के शुभम प्रधान ने कोरोनाकाल में नीट क्वालिफाई किया है। इसके साथ ही वे अब अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज में एडमिशन लेकर अपने परिवार के पहले डॉक्टर बनने जा रहे हैं। दूसरे अटेम्ट में नीट पास करने वाले शुभम का मानना है कि लाइफ में टैलेंट से ज्यादा हार्ड वर्क मायने रखता है। इसलिए उन्होंने पर्सेंटेंज की जगह नॉलेज पर फोकस किया। यही नॉलेज नीट की तैयारी में उनके काफी काम भी आया। नहीं पता था नीट जैसा होता है कोई एग्जाम शुभम ने बताया कि उन्होंने सीजी बोर्ड से 12 वीं बोर्ड की परीक्षा पास की है। उन्हें बोर्ड एग्जाम देने के बाद पता चला कि नीट जैसी कोई परीक्षा होती है। इसलिए पहला प्रयास केवल नीट के पैटर्न को जानने के लिए किया। बिना प्रिपरेशन एग्जाम में बैठने के कारण असफलता हाथ लगी। साथ ही समझ आया कि बहुत ज्यादा पढ़ाई भी करनी पड़ेगी। इसलिए वे कोचिंग के लिए भिलाई आ गए। यहां एक साल ड्रॉप लेकर तैयारी की। ड्रॉप सेशन के दौरान पहली बार घर से बाहर निकलकर हॉस्टल में एडजेस्ट करने में काफी परेशानी हुई। लक्ष्य बड़ा था तो घर से बाहर तो निकलना ही था। यही सोचकर खुद को मना लेते थे। कोचिंग में आकर छोड़ दी तुक्का लगाने की आदत एक्स स्टूडेंट से गाइडेंस लेकर सचदेवा में नीट की तैयारी के लिए एडमिशन लेने वाले शुभम ने बताया कि पहले वे हर सवाल का जबाव देने के लिए तुक्का लगाते थे। कोचिंग में जब टीचर्स ने बेसिक स्टडी से पढ़ाई शुरू कराई तो वो आदत भी धीरे-धीरे छोड़ दी। कोचिंग में बाकी स्टूडेंट को देखकर उनके साथ कॉम्पीटिशन करता था। टेस्ट सीरिज में एवरेज स्कोर के बावजूद हर प्रयास में कोशिश करता था कि अच्छे स्टूडेंट के साथ प्रतियोगिता कर सकूं। हिंदी मीडियम स्टूडेंट होने के नाते टीचर्स ने पढ़ाई में बहुत मदद की। अंग्रेजी को कभी खुद की कमजोरी नहीं बनने दिया। गेस्ट सेशन में डॉ. वेद प्रकाश की स्टोरी जानकर बहुत मोटिवेट हुआ। अच्छा लगता था जब सचदेवा के एक्स स्टूडेंट सफल डॉक्टर बनकर हमारे बीच में पहुंचते थे। बताते थे किस तरह इसी क्लास रूम में बैठकर उन्होंने अपनी पढ़ाई की थी। जैन सर ने बताई कई गलतियां काउंसलिंग सेशन में सचदेवा के डॉयरेक्टर चिरंजीव जैन सर ने मेरी बहुत सारी गलतियां बताई। वे बच्चों की न सिर्फ गलतियां पकड़ते थे बल्कि एक पैरेंट्स की तरह उन्हें सुधारने में भी बहुत मदद करते थे। उन्होंने मुझे बताया कि मैं जल्दबाजी बहुत करता हूं। साथ ही ओवर कॉन्फिडेंस रहता हूं। जिसके चलते आसान सवालों के भी गलत जवाब दे देता हूं। मैंने समय रहते अपनी गलतियां सुधारी। नीट के एग्जाम में ये मेरा प्लस प्वाइंट बना। किसी भी सवाल का उत्तर जल्दबाजी की बजाय तर्क से देना शुरू किया। मैं एमबीबीएस के बाद खुद का एक हॉस्पिटल खोलना चाहता हूं, क्योंकि बस्तर क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहद कमी है। आदिवासियों को उपचार के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।
देशभर की नगरपालिकाओं में डोंगरगढ़ का प्रदर्शन सर्वश्रेष्ठएक जनवरी 2021 को दिए जाएंगे पुरस्कारसर्वश्रेष्ठ आवास बनाने वाले हितग्राही भी पुरस्कृत होंगे रायपुर(#mediasaheb.com) मुख्यमंत्री श्री भूपेश…
गोधन योजना से सृजित हो रहे हैं रोजगार के नए अवसर : किसान बढ़ रहे हैं जैविक खेती की ओरमुख्यमंत्री ने गोधन न्याय योजना की 10वीं…
भिलाई(media saheb.com). पिता की कैंसर से अकाल मौत देखकर मासूम बेटी ने प्रण लिया कि वो अब किसी और बच्चे के सिर से उसके पिता का साया नहीं उठने देगी। डॉक्टर बनकर उन सभी लोगों की मदद करेंगी जिन्हें समय पर उपचार नहीं मिल पाता। अपने इसी सपने को आगे बढ़ाने के लिए जांजगरी चांपा जिले के रसोटा गांव की दीपशिखा रात्रे ने दिन रात मेहनत की। कठिन परिश्रम से अपने दूसरे प्रयास में नीट क्वालिफाई करके अब रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में एडमिशन लिया है। दीपशिखा कहती है कि मैं तब तक कोशिश करना नहीं छोड़ती जब तक उस लक्ष्य तक पहुंच न जाऊं। सिंगल पैरेंट्स होने के कारण मां जामकुमारी ने एक-एक पैसा जोड़कर मुझे पढ़ाया है। एमबीबीएस के बाद ऑनकोलॉजिस्ट बनकर कैंसर पीडि़तों की सेवा करना चाहती हूं। समय पर नहीं डिटेक्ट हो पाया पिता का स्कीन कैंसर दीपशिखा ने बताया कि जब वो महज 11 साल की थी तभी उनके पिता स्कीन कैंसर की चपेट में आ गए। काफी वक्त तक तो कैंसर डिटेक्ट नहीं हो पाया। जब ट्रीटमेंट चालू हुआ तब तक वो लास्ट स्टेज में पहुंच चुके थे। काफी कोशिशों के बाद भी उनकी जान नहीं बच पाई । पिता की मौत के बाद मां ने मुझे और छोटे भाई को संभाला। आगे की पढ़ाई मैंने नानी के घर रहकर की। 12 वीं बोर्ड में 94.4 प्रतिशत आया तो डॉक्टर बनने के सपने को और भी ज्यादा बल मिल गया। एक साल ड्रॉप लेकर पूरे मन से नीट की तैयारी की। पढ़ाई में किसी तरह की रूकावट न आए इसलिए एक साल तक सोशल मीडिया से भी दूरी बनाई। कैमेस्ट्री में होती थी बहुत दिक्कत दीपशिखा ने बताया कि शुरू से कैमेस्ट्री सब्जेक्ट उनका वीक प्वाइंट था। नीट की तैयारी के लिए जब उन्होंने कोचिंग की तलाश की तो सचदेवा के एक्स स्टूडेंट का फीडबैक लेकर वो भिलाई पहुंची। सचदेवा में टीचर्स ने बहुत सरल तरीके से कैमेस्ट्री की पढ़ाई करवाकर उनकी वीकनेस को स्ट्रेंथ में बदल दिया। जब टीचर्स ने न्यूमोनिक्स और डायग्राम से पहली बार कैमेस्ट्री समझाया तो पहाड़ जैसी लगने वाली इनऑर्गेनिक कैमेस्ट्री भी आसान लगने लगी। सचदेवा में कोचिंग की फीस आधी हो जाने के कारण मां को बड़ी सहायता मिल गई। पैसों की दिक्कत के बीच भी पढ़ाई कभी बाधित नहीं हुई। गेस्ट सेशन में सचदेवा के एक्स स्टूडेंट जाने माने हार्ट सर्जन डॉ. कृष्णकांत साहू से मिलकर लगा जैसे मेरी सफलता ज्यादा दूर नहीं है। बस थोड़ा और कोशिश करूंगी तो सीधे डॉक्टर बनकर ही घर जाऊंगी। जैन सर ने कहा था छोटा-छोटा टारगेट सेट करके उसे अचीव करो सचदेवा में हर सप्ताह हमारी काउंसलिंग की जाती थी। दीपशिखा ने बताया कि सचदेवा के डॉयरेक्टर चिरंजीव जैन सर ने एक दिन काउंसलिंग में हमें लक्ष्य निर्धारित करने को लेकर बेहद अहम बात बताई। उन्होंने कहा कि लाइफ में बड़ा टारगेट की बजाय छोटा-छोटा टारगेट सेट करके उसे अचीव करना सीखो।जब छोटे लक्ष्य को हासिल कर लोगे तो बड़ा लक्ष्य खुद ब खुद आपके करीब पहुंच जाएगा। उनकी कही बात को अमल करके मैं हर दिन पढ़ाई के लिए एक टारगेट सेट करती थी। कभी भी निगेटिव बातों को खुद पर हावी नहीं होने दिया। रिविजन पर ज्यादा फोकस किया। यही मेरे सक्सेस का प्लस प्वाइंट बना।(the states. news)
रायपुर, (media saheb.com) प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के इन्दौर जोन के संस्थापक ब्रह्माकुमार ओमप्रकाश की पांचवी पुण्य तिथि के अवसर पर गुरूवार, 24 दिसम्बर…
सैप की तकनीक से विश्व बाजार में एमएसएमई को प्रोत्साहित किया रायपुर, (media saheb.com) लघु, कुटीर एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा…
बीजापुर, (media saheb.com) बीजापुर जिले के गंगालूर थाना क्षेत्र में सड़क निर्माण कार्यो की सुरक्षा में लगे जवानों काे नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से नक्सलियों द्वारा…

