बिलासपुर (mediasaheb.com), सिख परंपरा के प्रथम गुरु श्री गुरु नानक जी के राम या हरि निराकार है वे स्वयं भू है, अकाल है , आदि है , सभी कारणों का कारण है उनके द्वारा रचित या उच्चारित आरती बहुत ही सुन्दर है ।
अमृतसर स्थित श्री हरिमंदिर साहिब जिसे सामान्य जन स्वर्ण मंदिर के नाम से जानते है, वहां हर संध्या यही आरती होती है
बांग्ला साहित्य का यश गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर (टैगोर ) , गुरु नानक जी से बहुत प्रभावित थे और उनके द्वारा रचित इस अद्भुत आरती से भी
ऐसी मान्यता है , गुरु नानक जी श्री जगन्नाथपुरी दर्शन के लिए आए थे , दर्शन के पश्चात उनके ह्रदय जो अद्भुत भाव प्रगट हुए, उस ने इस दिव्य आरती की रचना की
भारत के राष्ट्रगान और सन 71 में अस्तित्व में आए बांग्लादेश राष्ट्रगीत के रचयिता आचार्य रवींद्रनाथ ठाकुर(टैगोर) से एक बार प्रख्यात फिल्म कलाकार बलराज साहनी, जो तब शांति निकेतन में अध्यापक थे, ने प्रश्न किया कि जिस प्रकार भारत का राष्ट्रगान उन्होंने लिखा है तो क्यों न सम्पूर्ण विश्व के लिए भी एक विश्वगान भी लिखें? इस पर गुरुदेव ने कहा कि वह तो पहले ही लिखा जा चुका है, १६वीं शताब्दी में गुरु नानक जी के द्वारा और यह मात्र इस विश्व ही नहीं, अपितु सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के लिए गान है।
गुरुदेव टैगोर इस आरती से इतने प्रभावित थे कि उन्होंने स्वयं बांग्ला में इसका अनुवाद भी किया।
ये है उस अद्भुत आरती का अंश, जिस के विषय में हम ने लिखा है …
गगन मै थालु, रवि चंदु दीपक बने,
तारका मंडल, जनक मोती।
धूपु मलआनलो, पवण चवरो करे,
सगल बनराइ फुलन्त जोति॥
कैसी आरती होइ॥
भवखंडना तेरी आरती॥
अनहत सबद बाजंत भेरी॥
(आकाश रूपी आरती के थाल में सूर्य और चंद्र दीपक के समान प्रज्ज्वलित हैं, तारा मंडल मोतियों की तरह शोभायमान हैं। मलय पर्वत से आती चंदन की सुगंध ही धूप है, वायु चंवर कर रही है, समस्त वनों की सम्पूर्ण वनस्पतियाँ तुम्हारी आरती के निमित्त फूल की तरह अर्पित हैं। अनहद शब्द भेरी की तरह बज रहा है। हे भवखंडन! तुम्हारी आरती की भव्यता का किस तरह वर्णन किया जा सकता है)
गुरु नानक जी की महिमा के समक्ष गुरुदेव जिन्हें नोबल पुरस्कार मिला वे भी नतमस्तक है , इसलिए शबद में गाया जाता है
जग तारण गुरु नानक आया …🙏🙏🙏डॉ.संजय अनंत©


