हनीट्रैप में छत्तीसगढ़ के 3 और IAS के नाम आए, 2 IPS, 4 IFS भी शामिल
रायपुर ( mediasaheb.com) मध्यप्रदेश ( Madhay pradesh ) के हनी ट्रैप की लपटें अभी छत्तीसगढ़ ( Chhattisgarh) को भी झुलसाने लगी है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में दो आईएएस (AIS )और एक-एक आईपीएस ( IPS ) तथा आईएफएस के नाम आए थे। श्वेता जैन के पास से मिली डायरी में छत्तीसगढ़ के तीन और आईएएस के नाम मिले हैं इसमें एक आईपीएस और तीन और आईएफएस के नाम निकले हैं। पुलिस के सीनियर अफसर बताते हैं, कुछ नाम कोड वर्ड में लिखा है, जिसके बगल में ब्रैकेट में लिखा है सीजी।
हनी ट्रैप का मामला इतना हाईप्रोफाइल होता जा रहा कि जांच एजेंसियांं ने भी नहीं सोचा था कि ऐसे-ऐसे लोग इसमें संलिप्त होंगे। किसी ने ये भी नहीं सोचा होगा कि यह अंतर्रराज्यीय मामला हो जाएगा। बताते हैं, डायरी में मध्यप्रदेश के अलावा छत्तीसगढ़, राजस्थान और दिल्ली के नेताओं औ नौकरशाहों के नाम निकल रहे हैं।
छत्तीसगढ़ के आईएएस के नाम तो भोपाल के एक वीआईपी क्लब और होटल के रजिस्टर में भी मिले हैं। हनी ट्रैप गिरोंह के लोग जानबूझकर रजिस्टर में नाम लिखवा देते थे ताकि उन्हें आसानी से ब्लैकमेल किया जा सकें। छत्तीसगढ़ के एक युवा सिकरेट्री ने भोपाल के विधायक विश्रामगृह तक में रात गुजारे। हालांकि, विधायक विश्राम गृह की स्थिति अच्छी नहीं है। लेकिन, श्वेता जैन ने एसआइटी को बताया कि सिकरेट्री ने किसी को शक न हो, इसलिए विधायक विश्राम गृह में कमरा बुम कराया था।
हनी ट्रैप में छतीसगढ़ के एक ऐसे सीनियर आईएएस का नाम आ रहा है, जिसका कोई कल्पना नहीं कर सकता। छत्तीसगढ़ से भी इस आईएएस ने हनी ट्रैप के संचालकों के एनजीओ को 23 करोड़ का ठेका और सप्लाई का काम दिलाया। इसमें एक पत्रकार की भूमिका अहम रही। इसी पत्रकार ने पिछली सरकार के एक पूर्व मंत्री को भी हनी ट्रैप गिरोह की महिलाओं के संपर्क कराया था। सिकरेट्री लेवल के एक आईएएस भोपाल और इंदौर की बजाए मुंबई जाते थे। उनके लिए इंदौर से लड़कियां मुंबई भेजी जाती थी। सिकरेट्री ने कहा था कि मुंबई ज्यादा सेफ है। एसआइटी की जांच में कांग्रेस के भी एक बड़े नेता का नाम आ रहा है।
यही नहीं, सूत्रों ने बताया कि इस मामले की जांच कर रही एसआईटी के हाथ एक लिस्ट लगी है, जिसमें मध्यप्रदेश के कम से कम 13 ऐसे आईएएस अधिकारियों के नाम हैं जो अलग- अलग समय पर मत्स्य पालन, कृषि, संस्कृति, उद्योग, शहरी प्रशासन, श्रम, वन, जल संसाधन, जन संपर्क और प्रशासनिक विभागों में काम कर चुके हैं।
इस सेक्स ब्लैकमेलिंग गिरोह के संचालक ने एक सरकारी डायरी के पन्नों पर ‘हिट लिस्ट’ बनाया था। जांच से जुडे़ एक अधिकारी ने बताया कि टारगेट लिस्ट में शामिल अफसरों के नामों के आगे टिक लगे हुए थे और कोड वर्ड भाषा में कुछ लिखा है। कुछ अधिकारियों के नामों पर घेरा बनाया गया है और कुछ अधिकारियों के नाम के आगे ‘महत्वपूर्ण’ या ‘ओके’ लिखा हुआ है। जांचकर्ता कोड वर्ड भाषा में लिखी बातों का मतलब पता लगा रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक इस गिरोह की सुंदरियों के मोबाइल फोन से कुछ विडियो क्लिप मिले हैं। एक अधिकारी ने कहा, ‘मोहपाश में फंसे अधिकारियों की विडियो क्लिप को देखकर पहचान की जा रही है और बिना उनकी पोस्ट या वरिष्ठता को ध्यान में रखे उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा।
इस खुलासे के बाद अब यह सवाल उठने लगा है कि पूरी तरह से महिलाओं द्वारा संचालित इस सेक्स और ब्लैकमेलिंग गिरोह के पीछे कौन लोग हैं? कौन उन्हें टारगेट देता था?

