मशहूर रेडियोलॉजिस्ट और एक्स स्टूडेंट की बातें ऐसे दिल पर
लगी सीधे नीट क्वालिफाई करके घर पहुंचे हिमांशु
भिलाई, (media saheb.com) किसी चीज को पाने की शिद्दत से कोशिश और
मेहनत साथ-साथ की जाए तो सफलता आपके कदम चूमती है। देश और छत्तीसगढ़ के मशहूर
रेडियोलॉजिस्ट डॉ. समीर कठाले की ये बातें भिलाई के हिमांशु सिंह सेगर को लग गई।
एक साल ड्रॉप लेकर हिमांशु ने नीट की ऐसी जी तोड़ तैयारी की सीधे क्वालिफाई
होकर घर पहुंचे। अब दो बड़ी बहनों के बाद एमबीबीएस की सीट हासिल करके अपने परिवार
के तीसरे डॉक्टर बनेंगे। हिमांशु ने कहते हैं कि किसी भी एग्जाम का दूसरा अटेम्ट
हमेशा आपके दिमाग में हावी होता है। पूरे वक्त सिर्फ यही बातें चलती रहती हैं कि
अगर ये दूसरा प्रयास भी असफल हो गया तो मैं क्या करूंगा। इस बात के लिए मैं
बहुत भाग्यशाली रहा, नीट की तैयारी के दौरान पैरेंट्स और टीचर्स
के मोटिवेशन से फेल्यिर जैसा शब्द मेरे आस-पास भी नहीं फटका। यही कारण था कि
मैं मन लगाकर एग्जाम की तैयारी कर पाया।
बायो-मैथ्स लेकर दिया बोर्ड एग्जाम, ताकि फिजिक्स
में न पड़े कमजोर
हिमांशु ने बताया कि दसवीं के बाद से ही उन्होंने तय कर लिया था कि
डॉक्टर बनना है। इसलिए 11 वीं प्लेन बॉयो की जगह बायो और मैथ्स
सब्जेक्ट सलेक्ट करके 12 वीं बोर्ड एग्जाम दिया। नीट की तैयारी करने
वाले छात्रों के लिए अक्सर फिजिक्स की पढ़ाई कठिन हो जाती है। वहीं मेरे साथ भी हो
रहा था इसलिए मैथ्स और फिजिक्स साथ-साथ पढ़कर इस कमजोरी को दूर करने का प्रयास
किया। रोजाना कोचिंग के बाद 6 से 8 घंटे की सेल्फ स्टडी घर में करता था। हर छोटी सी
छोटी पढ़ी हुई सिलेबस का रिविजन करता था। लॉकडाउन के समय पांच महीने सिर्फ रिविजन
पर ही फोकस किया।
डॉक्टरी की पढ़ाई कर रही दो बड़ी बहनों ने किया कोचिंग के लिए गाइड
हिमांशु ने बताया कि उनके परिवार में उनकी खुद की बड़ी बहन और एक चचेरी बहन
सचदेवा न्यू पीटी कॉलेज भिलाई में पढ़कर नीट क्वालिफाई कर चुकी हैं। फिलहाल वो
दोनों डॉक्टरी की पढ़ाई कर रही है। ऐसे में दोनों बड़ी बहनों ने नीट कोचिंग के लिए
मुझे सचदेवा जाने को कहा। उन्होंने जो बताया था वो बातें आज भी सचदेवा में कायम
है। पढ़ाई के अलावा मोटिवेशन सेशन तैयारी के दौरान डिप्रेशन और निगेटिविटी को दूर
करता है। हर दिन कोई आपको कोचिंग में घुसने से पहले कहे कि आप कर सकते हो तो सफलता
मिलनी ही थी। लॉकडाउन में जब सारे कोचिंग ठप पड़ चुके थे तब हमें ऑनलाइन क्लासेस
से जोड़े रखा। ऑनलाइन क्लास और रिविजन सेशन की बदौलत नीट में अच्छी रैंक मिली।
जैन सर से मिला डैडिकेशन
सचदेवा कॉलेज ज्वाइन करने से पहले नीट क्वालिफाई करने को लेकर पूरी तरह से
मैं तैयार नहीं था। ऐसे में चिरंजीव जैन सर ने पैरेंटिंग के जरिए मुझे मैंटली
तैयार किया। उनकी प्रेरक कहानियां सुनकर मेरे अंदर अपनी पढ़ाई और लक्ष्य को लेकर
डैडिकेशन आया। आज जब जेएलएन मेडिकल कॉलेज रायपुर में दाखिल मिल गया है तो जैन सर
की कही वो सारी बातें याद आती है कि इंसान चाहे तो अपनी मेहनत से अपना भाग्य बदल
सकता है। सचदेवा की टेस्ट सीरिज के अलावा पुराने स्टूडेंट जो आज देश-दुनिया में
सफल डॉक्टर बनकर नाम कमा रहे हैं उनका हमारे जैसे स्टूडेंट्स के बीच में आना बहुत
बड़ी बात है। आप जिस मुकाम पर जाना चाहते हो वो साक्षात आपके सामने खड़ा हो जाए तो
मन-मस्तिष्क दोगुनी मेहनत के लिए तैयार हो जाता है। जब वो कर सकते हैं तो हम क्यों
नहीं, ये जज्बा आपको खुद ब खुद सफलता की ओर ले
जाता है।
Sunday, July 5
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