रायपुर (mediasaheb.com) कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानी, चेयरमेन मगेलाल मालू, अमर गिदवानी, प्रदेश अध्यक्ष जितेन्द्र दोशी, कार्यकारी अध्यक्ष विक्रम सिंहदेव, परमानन्द जैन, वाशु माखीजा, महामंत्री सुरिन्द्रर सिंह, कार्यकारी महामंत्री भरत जैन, कोषाध्यक्ष अजय अग्रवाल एवं मीड़िया प्रभारी
संजय चैंबे बताया कि कॉन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने आज जीएसटी
के देश में चार वर्ष पूरे होने पर जीएसटी कर प्रणाली की वर्तमान व्यवस्था पर बड़ा
तंज कसते हुए कहा की चार वर्षों के बाद यह अब एक औपनिवेशिक कर प्रणाली बन गई है जो
जीएसटी के मूल घोषित उद्देश्य गुड एंड सिंपल टैक्स के ठीक विपरीत है और देश के
व्यापारियों के लिए एक बड़ा सिर दर्द बन गई है। वर्तमान जीएसटी कर प्रणाली भारत में
हो रहे व्यापार की जमीनी हकीकत और व्यापार करने के तौर तरीके के साथ तालमेल
नहीं बैठा पाई है। जीएसटी के तहत अभी हाल ही के महीनों में हुए विभिन्न संशोधनों
और नए नियमों ने कर प्रणाली को बेहद जटिल बना दिया है और प्रधानमंत्री श्री
नरेंद्र मोदी के इज ऑफ डूइंग बिजनेस की मूल धारणा के बिलकुल खिलाफ है। कैट ने
केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीथारमन से इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए
समय माँगा है।
कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री अमर पारवानी एवं प्रदेश
अध्यक्ष श्री जितेन्द्र दोशी ने पिछले 4 वर्षों से अधिकारियों द्वारा जीएसटी के वर्तमान स्वरुप की कड़ी
आलोचना करते हुए कहा की भारत में जीएसटी लागू होने के 4 साल बाद भी जीएसटी पोर्टल अभी भी कई
चुनौतियों से जूझ रहा है और सही तरीके से काम नहीं कर रहा । नियमों में संशोधन
किया गया है लेकिन पोर्टल उक्त संशोधनों के साथ समय पर अद्यतन करने में विफल है।
अभी तक कोई भी राष्ट्रीय अपीलीय न्यायाधिकरण का गठन नहीं किया गया है। ष्वन
नेशन-वन टैक्सष् के मूल सिद्धांतों को विकृत करने के लिए राज्यों को अपने तरीके से
कानून की व्याख्या करने के लिए राज्यों को खुला हाथ दिया गया है। केंद्रीय
एडवांस रूलिंग प्राधिकरण का गठन नहीं किया गया है। जीएसटी अधिकारी ई सिस्टम
के द्वारा कर पालना तो कराना चाहते हैं किन्तु देश में व्यापारियों के बड़े हिस्से
को अपने मौजूदा व्यवसाय में कम्प्यूटरीकरण को अपनाना बाकी है, इस पर उन्होंने कभी नहीं सोचा और
व्यापारियों आदि को कंप्यूटर आदि से लैस करने के विषय में कोई एक कदम भी
नहीं उठाया गया है।
श्री पारवानी और श्री दोशी ने कहा कि कुछ ही महीने पहले जीएसटी
में एक नियम लागू करके जीएसटी अधिकारियों को किसी भी व्यापारी के जीएसटी
पंजीकरण को रद्द करने का मनमाना अधिकार दे दिया है जिसमें व्यापारियों को
कोई नोटिस नहीं दिया जाएगा और सुनवाई का कोई अवसर भी नहीं दिया जाएगा । यह न्याय
के प्राकृतिक सिद्धांत के बिलकुल विरूद्ध है । जीएसटी कानून को बेहद विकृत
किया गया है, जो इस तथ्य से स्पष्ट है कि 31 मई , 2021 तक जीएसटी लागू होने की तारीख के बाद से एक हजार
से ज्यादा संशोधन किये गए हैं जबकि ठीक इसके उलट व्यापारियों को अपनी रिटर्न को एक
बार भी संशोधित करने का अधिकार नहीं दिया गया । ऐसी स्थिति में हम व्यापारियों से
कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि वे कराधान प्रणाली का समय पर अनुपालन करें।
श्री पारवानी और श्री दोशी ने कहा कि वे वित्त मंत्री के साथ
बातचीत के जरिए इन मुद्दों को हल करना चाहते हैं इसके साथ ही कैट के
प्रतिनिधिमण्डल सभी राज्य सरकारों के मुख्यमंत्री एवं वित्तमंत्रियों से मुलाकात
कर जीएसटी के कर आधार को विस्तृत करने, राजस्व में वृद्धि करने में सरकार का साथ देने चाहते हैं
किन्तु कर ढांचे के सरलीकरण और युक्तिकरण को करना पहले जरूरी है। (the states. news)
Sunday, July 5
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