रायपुर(mediasaheb.com)
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल
इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के प्रदेश अध्यक्ष अमर परवानी, कार्यकारी अध्यक्ष
मंगेलाल मालू, विक्रम सिंहदेव, महामंत्री जितेंद्र दोषी, कार्यकारी महामंत्री परमानंद जैन एवं कोषाध्यक्ष अजय अग्रवाल ने
बताया कि भारत सरकार द्वारा ई कॉमर्स पोर्टल पर कंट्री ऑफ ओरिजिन लिखने के
कानूनी आदेश का पालन न करने वाले पोर्टलों पर असाधारण जुर्माना लगाया जाना चाहिए
जबकि केंद्रीय उपभोक्ता मंत्रालय ने हाल ही में अमेजन पर अपने प्लेटफॉर्म पर बेचे
गए उत्पादों पर कंट्री ऑफ ओरिजिन की जानकारी न देने पर केवल मात्र 25 हजार रुपये का
जुर्माना लगाया है जिसका कोई औचित्य नहीं है। यह कहते हुए कॉन्फेडरेशन ऑफ आल
इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने सरकार से मांग की है की ऐसी गंभीर कानूनी गलती पर अमेजन
के ई कॉमर्स पोर्टल को सजा के तौर पर 7 दिन तक बंद कर देना चाहिए। किसी भी जुर्माना लगाने का सीधा मतलब
ये होता है कि कोई भी अपराधी बार बार अपनी गलती को दोहराने से डरे पर अमेजनपर देश
के कानून के उल्लंघन पर केवल 25 हजार का जुर्माना हमारी न्याय प्रणाली के साथ
भद्दा मजाक हैं।
कैट के राष्ट्रीय
उपाध्यक्ष श्री अमर पारवानी ने कहा कि भारतीय कानून का उल्लंघन करने के लिए विदेशी
ई-कॉमर्स दिग्गज पर इतनी कम राशि लगाना हमारी न्यायिक और प्रशासनिक व्यवस्था का
मखौल उड़ाने के अलावा और कुछ नहीं है। उनकी सजा हमारी अर्थव्यवस्था पर उनके द्वारा
की गई क्षति के बराबर होनी चाहिए थी जिससे इन बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों को
स्पष्ट संदेश जाये कि कोई भी खुलेआम हमारे देश के कानून की अवहेलना नही कर सकता है।
श्री पारवानी ने कहा
कि भारत में ई-कॉमर्स व्यवसाय की बढ़ती जरूरत और प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी
के ष्लोकल पर वोकलष् और ष्आत्मनिर्भर भारतष् के आह्वान के मद्देनजर कंट्री
ऑफ ओरिजिन की जानकारी पोर्टल पर बिकने वाले प्रत्येक सामान पर प्रकाशित करना अब
कानूनी रूप से आवश्यक है पहली बार इस कानून की अवहेलना के लिए, संबंधित ई-कॉमर्स
पोर्टल पर 7 दिनों के लिए प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए और दूसरी बार गलती
दोहराने पर इनके पोर्टल को 15 दिनों के लिए प्रतिबंधित किया जाना चाहिए और
तीसरी बार भी यदि कानून की अवहेलना होती है तो पोर्टल को उस समय तक प्रतिबंधित
किया जाना चाहिए जब तक वो पूरी तरह से कानून का अनुपालन न करना सीख जाए। सरकार
देेेश की न्याय व्यवस्था की संरक्षक है और इसलिए, यह सरकार का कर्तव्य है कि वह हर प्रकार से
देश के कानून के सही कार्यान्वयन को सुनिश्चित करे।
श्री पारवानी ने कहा
कि जुर्माना या दंड हमेशा अनुकरणीय होना चाहिए और यह किए गए अपराध के अनुपात में
होना चाहिए। इस दृष्टिकोण से 25 हजार का जुर्माना देश के कानून से समझौता करने
जैसा है। अमेजन भविष्य में भी कानून की अवहेलना कर सकता है क्योंकि उनके लिए
जुर्माना राशि बेहद कम है। उन्होंने आगे कहा कि इन ई-कॉमर्स कंपनियों द्वारा
भारतीय कानून के लगातार उल्लंघन के पीछे कुछ निहित स्वार्थ हैं और इसलिए जुर्माना
और भी कड़ा लगाने की जरूरत है। कानून सभी ई कॉमर्स कंपनियों (फ्लिपकार्ट, म्यनट्रेट) के लिए
समान होना चाहिए। नियमों का सही पालन सभी के लिए अनिवार्य है। ऐसे में हम यह
समझने में असमर्थ हैं कि दूसरी ई कॉमर्स कंपनियों पर जुर्माना क्यों नहीं लगाया
गया जबकि वो भी खुलेआम देश के कानून की धज्जियां उड़ा रहे है। विदेशी ई-कॉमर्स
कंपनियों के प्रति अधिकारियों का ढुलमुल रवैया अनुचित है और हम इस पर चुप नही
बैठेंगे।
Sunday, July 5
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