लॉस एंजेल्स, 26 जून (mediasaheb.com)। अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में शांति वार्ता के सुखद परिणाम सामने आ रहे हैं। उम्मीद की जाती है कि एक सितंबर से पूर्व किसी निर्णय पर पहुंचा जा सकेगा। उन्होंने कहा कि तालिबान के साथ अभी तक हुई वार्ता में इस मुद्दे पर कोई निर्णय नहीं हो पाया है कि अमेरिकी सेनाएं कब अफ़ग़ानिस्तान से स्वदेश लौट रही हैं। अमेरिकी सेनाओं की घर वापसी के बारे में अभी तक कोई समय सारिणी नहीं बनाई जा सकी है। अमेरिका के चौदह हज़ार सैनिक साज-सामान के साथ अफ़ग़ानिस्तान में डटे हुए हैं। अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिकी सेनाएं 17 सालों से युद्धरत है। उन्होंने यह भी कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में सितंबर के अंत में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पूर्व अफ़ग़ानिस्तान के बारे में पुख़्ता फ़ैसला लिया जाएगा। भारत पहुंचने से पूर्व माइक पोंपियों काबुल में रुके। माइक पोंपियो की आबूधाबी से होते हुए मंगलवार को काबुल में यह अप्रत्याशित पड़ाव था। वहां अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ़ गनी के विशेष प्रतिनिधि ने पोंपियो का स्वागत किया। अमेरिका के अफ़गानिस्तान में जन्मे विशेष अमेरिकी प्रतिनिधि जलमय ख़लीलजाद और तालिबानी प्रतिनिधियों की 29 जून को दोहा में अगले चरण की बातचीत तय है। पोंपियो ने विश्वास व्यक्त किया कि अमेरिका अफ़ग़ानिस्तान में शांति वार्ता समझौते के लिए किसी तरह के दिशा निर्देश दिए जाने के पक्ष में नहीं है। अमेरिका यह भी नहीं चाहता कि वह अफ़ग़ानिस्तान की सरकार अथवा अफ़ग़ान जनता के नाम पर तालिबान के साथ कोई समझौता करे।
पोंपियो ने कहा कि तालिबान ने अमेरिका के इस प्रस्ताव पर क़रीब-क़रीब सहमति व्यक्त कर दी है कि वह अलकायदा और ऐसे किसी आतंकवादी संगठन के साथ कोई संबंध नहीं रखेगा। उन्होंने यह भी कहा कि तालिबान ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि वह अफ़ग़ानिस्तान में कदापि आतंकवाद और आतंकवादियों की शरण स्थली नहीं बनने देगा। अमेरिका की कोशिश है कि अफ़ग़ानिस्तान में शांति स्थापित हो और पश्चिमी देशों की समर्थित अफ़ग़ान सरकार लोकतांत्रिक तौर तरीकों से काम करती रहे। इसके लिए तालिबान से लगातार युद्ध विराम और जनता की चुनी हुई अफ़ग़ान सरकार से सीधे वार्ता के लिए मांग की जाती रही है, जिसे तालिबान टालता आ रहा है। तालिबान का कहना है कि अफ़ग़ान सरकार अमेरिका की पिट्ठू सरकार है। उन्होंने यह भी कहा कि जर्मनी और क़तर अफ़ग़ान प्रतिनिधियों के साथ मिलकर तालिबानी नेताओं के सम्पर्क में हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि वे किसी निर्णय पर पहुंचेंगे। (हि.स.)
Friday, August 14
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