कोलंबो
गॉल टेस्ट में श्रीलंकाई टीम को भारत के हाथों 165 रनों की बड़ी हार झेलनी पड़ी थी. अब श्रीलंका को सीरीज बराबर करने के लिए दूसरा टेस्ट जीतना ही होगा. हार या ड्रॉ होने की स्थिति में भारत सीरीज अपने नाम कर लेगा. दूसरा टेस्ट मैच 23 अगस्त से कोलंबो के सिंहलीज स्पोर्ट्स क्लब में होना है।
कोलंबो टेस्ट से पहले श्रीलंका की मुश्किलें और बढ़ गई हैं. कुसल मेंडिस और दिनेश चांदीमल दूसरे टेस्ट से बाहर हो गए हैं, जबकि पथुम निसंका के खेलने पर भी संशय बना हुआ है. श्रीलंका के हेड कोच गैरी कर्स्टन ने गॉल टेस्ट के बाद खिलाड़ियों की चोट को लेकर अपडेट दिया. उन्होंने साफ किया कि कुसल मेंडिस की हैमस्ट्रिंग की चोट गंभीर है और वह फिलहाल टीम के लिए उपलब्ध नहीं होंगे।
गैरी कर्स्टन ने कहा, 'कुसल मेंडिस को हैमस्ट्रिंग की गंभीर चोट लगी है. वह कुछ समय तक उपलब्ध नहीं रहने वाले हैं.' श्रीलंका को सबसे बड़ा झटका दिनेश चांदीमल के रूप में लगा है. चांदीमल को गॉल टेस्ट के दौरान फील्डिंग करते समय गर्दन और कंधे में चोट लगी थी. इसके बाद पसिंदु सूरियाबंडारा को उनके स्थान पर कन्कशन सब्स्टीट्यूट के रूप में उतारा गया था. हालांकि सूरियाबंडारा अपनी पहली ही गेंद पर बिना खाता खोले आउट हो गए थे।
वहीं पथुम निसंका कलाई की सर्जरी से उबर रहे हैं. कर्स्टन के बयान के मुताबिक वह भी अगले टेस्ट के लिए उपलब्ध नहीं हैं. ऐसे में श्रीलंका को अपने टॉप ऑर्डर में बड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं. कुसल मेंडिस की जगह निरोशन डिकवेला को टेस्ट स्क्वॉड में शामिल किया गया था. डिकवेला ने गॉल में मिले मौके का फायदा उठाते हुए पहली पारी में 80 रन बनाए थे।
गुरु गैरी ने बताया हार का कारण
गॉल में श्रीलंका की सबसे बड़ी कमजोरी उसका टॉप ऑर्डर रहा. पहली पारी में टीम एक समय 99 रन पर पांच विकेट गंवा चुकी थी. इसके बावजूद निचले और मध्यक्रम के संघर्ष की बदौलत मेजबान टीम मुकाबले को पांचवें दिन तक ले जाने में सफल रही. कर्स्टन ने भी माना कि दोनों पारियों में टॉप ऑर्डर की नाकामी टीम को भारी पड़ी. हालांकि उन्होंने मुश्किल परिस्थितियों में खिलाड़ियों के संघर्ष को सकारात्मक पहलू बताया।
श्रीलंका पिछले तीन टेस्ट में दो मुकाबले गंवा चुका है. जून में वेस्टइंडीज ने नॉर्थ साउंड में उसे पारी और 217 रनों से हराया था. अब भारत के खिलाफ भी बड़ी हार मिली है. गैरी कर्स्टन का मानना है कि लगातार टेस्ट खेलने से टीम धीरे-धीरे इस फॉर्मेट की जरूरतों के मुताबिक खुद को ढाल रही है।
साथ ही सीनियर बल्लेबाजों की गैरमौजूदगी घरेलू क्रिकेट में लगातार रन बनाने वाले युवा खिलाड़ियों के लिए बड़ा मौका बन सकती है. कोलंबो टेस्ट से पहले अब श्रीलंकाई टीम मैनेजमेंट के सामने सबसे बड़ी चुनौती मजबूत बल्लेबाजी क्रम तैयार करना है. भारत के खिलाफ सीरीज दांव पर है और प्रमुख बल्लेबाजों की गैरमौजूदगी ने मेजबान टीम की टेंशन काफी बढ़ा दी है।


