पटना
महापर्व छठ के लिए जिले में 458 घाटों पर तैयारी तेज कर दी गई है। जिलाधिकारी कुंदन कुमार ने वरीय पुलिस अधीक्षक कार्तिकेय के शर्मा और नगर आयुक्त यशपाल मीणा के साथ दीघा से गायघाट तक विभिन्न गंगा घाटों का निरीक्षण किया।
खतरनाक घाटों पर पानी के भीतर तक मजबूत बैरिकेडिंग से लेकर सीसीटीवी, वॉचटावर और गोताखोरों की तैनाती के निर्देश दिए। खतरनाक घाटों को लाल कपड़े से घेरने को कहा।
वहां स्पष्ट रूप से खतरनाक घाट लिखने को कहा, ताकि श्रद्धालु सतर्क रहें। उन्होंने कहा कि किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके साथ ही नगर निगम क्षेत्र में 60 कृत्रिम तालाब भी तेजी से बनाए जा रहे हैं।
पार्किंग से लेकर रोशनी तक पुख्ता व्यवस्था
श्रद्धालुओं के वाहनों के लिए व्यवस्थित पार्किंग तथा घाटों तक पहुंचने वाले रास्तों की मरम्मत शीघ्र पूरी करने का निर्देश दिया गया। सभी घाटों पर पर्याप्त रोशनी, आकर्षक सजावट, स्वच्छता, पेयजल, चेंजिंग रूम, पब्लिक एड्रेस सिस्टम और नियंत्रण कक्ष की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया।
सुरक्षा के मद्देनजर प्रमुख घाटों पर एसडीआरएफ, एनडीआरएफ की पर्याप्त टीमें और प्रशिक्षित गोताखोर तैनात रहेंगे। भीड़ नियंत्रण, निगरानी और आपात सहायता के लिए पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी मुस्तैद रहेंगे।
बिजली के अस्थायी कनेक्शनों की भी होगी जांच
नगर निकायों के कार्यपालक पदाधिकारियों को घाटों पर साफ-सफाई और पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है। विद्युत विभाग घाटों पर की जा रही वायरिंग, बिजली के कनेक्शन और प्रकाश व्यवस्था की जांच करेगा।
पूजा समितियों की ओर से लिए जा रहे अस्थायी बिजली कनेक्शनों की भी सुरक्षा मानकों के अनुरूप जांच होगी ताकि किसी तरह की दुर्घटना की आशंका नहीं रहे।
तैयारियों की जिम्मेदारी संभाल रहे सभी 21 सेक्टर अधिकारियों से उनके क्षेत्रों की प्रगति और शेष कार्यों की जानकारी ली गई। जिले के अन्य अनुमंडलों में भी घाटों की तैयारियों की समीक्षा कर एसडीओ को समय पर सभी इंतजाम पूरे कराने का निर्देश दिया गया।
थानाध्यक्षों को घाटों का भौतिक सत्यापन करने का निर्देश
वरीय पुलिस अधीक्षक कार्तिकेय के. शर्मा ने छठ के दौरान सुरक्षा के साथ सुगम यातायात व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों को अभी से सुगम यातायात के लिए योजना बना उसका प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा।
सभी थानाध्यक्षों को अपने-अपने क्षेत्र के घाटों का भौतिक सत्यापन कर सुरक्षा और विधि-व्यवस्था से जुड़ी जरूरतों का आकलन करने का निर्देश दिया गया।


