Author: mediasaheb

नई दिल्ली, (media saheb.com) | केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने रविवार को कहा कि 19वीं सदी में शिक्षा के माध्यम से महिला सशक्तिकरण का…

कहा कि वैक्सीन को मंजूरी मिलने से Corona मुक्त राष्ट्र होने का रास्ता साफ हुआ नई दिल्ली, (media saheb.com) | ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने…

पढ़ाई में डिस्टरबेंस न हो इसलिए आज तक फेसबुक और इंस्टा पर नहीं खोला अकाउंट भिलाई(mediasaheb.com)| बचपन के खेल में डॉक्टर बनकर भाई को सुई से डराने वाली गामिनी अब असल जिंदगी में भी डॉक्टर बनने जा रही है।कोरबा जिले के रजगामार की रहने वाली गामिनी पैकरा ने अपने दूसरे प्रयास में नीट क्वालिफाई करके अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज में एडमिशन लिया है। गामिनी कहती है कि बचपन में डॉक्टर किट से खेलतेखेलते कब ये जीवन का लक्ष्य बन गया पता ही नहीं चला। परिवार में सभी इंजीनियरिंग और टीचिंग प्रोफेशन से जुड़े हैं इसलिए मैं कुछ अलग करना चाहती थी। 12 वीं बोर्ड बायो सब्जेक्ट से दिया तो एमबीबीएस से अच्छा कॅरियर और कुछ हो ही नहीं सकता था। पहले अटेम्ट में फेल्यिर के बाद पैरेंट्स ने एक साल ड्रॉप लेकर तैयारी करने के लिए कहा। मैंने भी पैरेंट्स की बात मानी और जी जान से अपने मकसद को पूरा करने में जुट गई। पढ़ाई में डिस्टरबेंस न हो इसलिए सोशल मीडिया से भी दूरी बनाई। आज तक नहीं बनाया फेसबुक और इंस्टाग्राम पर अकाउंट गामिनी ने बताया कि उसने आज तक अपना फेसबुक और इंस्टाग्राम अकाउंट नहीं बनाया। वो कहती है कि कोचिंग में आए मशहूर हार्ट सर्जन डॉक्टर कृष्णकांत साहू ने कहा था कि सोशल मीडिया के चक्कर में कई  बच्चे इतने ज्यादा सोशल हो जाते हैं कि वो पर्सनल नहीं हो पाते। मैं नहीं चाहती थी कि मेरा ध्यान भी सोशल मीडिया पर भटके इसलिए इन चीजों से दूर रही। जवाहर नवोदय विद्यालय में पढऩे के कारण बचपन से खुद को इमोशनली मैनेज करना सीख लिया था। ये सारी छोटी-छोटी मगर बेहद अहम बातें मेरी सफलता की सीढ़ी बनती चली गई। नीट की तैयारी के दौरान कई बार हताश हुई। कई बार ये भी लगा कि पता नहीं मैं सलेक्ट हो पाऊंगी या नहीं। खुद को समझाते हुए इन नकारात्मक बातों को पढ़ाई से दूर रखने की कोशिश की। हर सुबह कॉपी पर लिखकर खुद को याद दिलाया कि मुझे डॉक्टर बनना है। किफायती ट्रिक्स और नोट्स से सचदेवा में पढ़ाई बन गई मजेदार गामिनी ने बताया कि जवाहर नवोदय कोरबा के कई बच्चों ने सचदेवा भिलाई में पढ़कर नीट क्वालिफाई किया है। इसलिए मैंने भी सचदेवा को ही कोचिंग के लिए चुना। गामिनी कहती है कि यहां के टीचर्स के सब्जेक्ट को याद रखने लिए बताए जाने वाले ट्रिक्स यूनिक है। टीचर्स का पूरा फोकस सिर्फ नीट के सिलेबस पर रहता है। बेवजह की चीजें पढ़ाने की बजाय वे केवल सिलेबस की पढ़ाई कराते हैं। हर दिन नोटस भी बनवाते हैं। रोजाना होने वाले डेली पेपर प्रैक्टिस से खुद को परखने का मौका मिलता था कि हम कितने पानी में हैं। जब सचदेवा के एक्स स्टूडेंट जो आज नामी डॉक्टर हैं हमारे बीच में आते तो उनकी बातें बहुत प्रेरणा देती। एक पॉजिटिविटी का एहसास कराती कि लाइफ में कुछ भी इंपॉसिबल नहीं है। जैन सर से सिखाया कैसे खुद का करें आंकलनसचदेवा के डायरेक्टर और सर्टिफाइड पैरेंटिंग कोच चिरंजीव जैन सर की काउंसलिंग हमेशा अमेजिंग होती थी। गामिनी कहती है कि एक दिन जैन सर ने कहा कि तुम खुद को कितना नंबर देते हो अपनी पढ़ाई के लिए। सब बच्चे चुपचाप खड़े हो गए। उन्होंने एक मिनट का वक्त दिया फिर दोबारा पूछा पर किसी को समझ में नहीं आया हम इस सवाल का जवाब कैसे दें। जैन सर ने कहा कि आप अपने बनाए टाइम टेबल में जितनी बातें रोज फॉलो करते हो उस हिसाब से नंबर दो। उस दिन समझ आया कि खुद का आंकलन करना भी जरूरी है। दूसरों की बजाय यदि हम खुद को परखे तो गलतियां भी अपने आप समझ आ जाती है। तब शायद हम असफलता के लिए किसी और को कोस नहीं सकते। उनकी ये सिखलाई मुझे जीवन भर याद रहेगी। नीट की तैयारी करने वाले स्टूडेंट्स से कहूंगी कि खुद पर भरोसा करना सीखे। कोशिश करना न छोड़े। कोशिश करने वालों की हमेशा जीत होती है। (the states. news)

रायपुर (media saheb.com) छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आरोप लगाया हैं कि भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री डा.रमन सिंह द्वारा राजीव…

नई दिल्ली, (media saheb.com) वरिष्ठ कांग्रेसी नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री सरदार बूटा सिंह का शनिवार को यहां निधन हो गया। वह 86 वर्ष के थे।…

दसवीं पास ड्राइवर पिता का बेटा बनेगा डॉक्टर भिलाई(media saheb.com). धुर नक्सल प्रभावित सुकमा जिले के रिकेश्वर कोठारी ने नीट क्वालिफाई  किया है। इसके साथ ही ड्राइवर पिता का बेटा अब अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज में दाखिला लेकर डॉक्टर की पढ़ाई करेगा। अपने परिवार के पहले डॉक्टर बनने जा रहे रिकेश्वर कहते हैं सुकमा आज भी छत्तीसगढ़ के पिछड़े जिलों में गिना जाता है। यहां के सरकारी अस्पतालों में प्रशिक्षित डॉक्टरों की बेहद कमी है। अगर कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या हो जाए तो जगदलपुर और रायपुर का रूख करना पड़ता है। नक्सली वारदातों  के कारण नए डॉक्टर अपनी सेवाएं भी इस जिले में नहीं देना चाहते। इसलिए उन्होंने बचपन से ही डॉक्टर बनने का सपना देखा। 12 वीं बोर्ड में जब 83 प्रतिशत अंक आए तो सपने को और बल मिल गया। एक साल ड्रॉप लेकर नीट की तैयारी शुरू कर दी। पढ़ाई के बीच-बीच में आर्थिक तंगी भी आई पर दसवीं पास ड्राइवर पिता रमेसर कोठारी ने पढ़ाई रूकने नहीं दी। उनका भरोसा ही था कि अपने दूसरे प्रयास में मैं नीट जैसी कठिन परीक्षा पास कर पाया। सपने को पूरा करने के लिए अजीब सा जुनून सवार था मन में लोग अपनी असफलता के लिए मेहनत से ज्यादा हालातों को कोसते हैं। मैं बचपन से ही जुनूनी रहा हूं। रिकेश्वर ने बताया कि पढ़ाई में अच्छा होने के कारण उन्हें जवाहर नवोदय विद्यालय सुकमा में एडमिशन मिल गया। 12 वीं बोर्ड की परीक्षा धमतरी नवोदय स्कूल में पढ़कर दी। हॉस्टल में बच्चे जब खेलकूद और मौज-मस्ती में व्यस्त रहते थे तब मैं किताबों की गहराई में अपने सपनों को जी रहा होता था। इसी जुनून को देखकर परिवार वालों ने एक साल ड्रॉप लेकर नीट की तैयारी के लिए प्रोत्साहित किया। ताकि मैं डॉक्टर बनकर ही घर आऊं। सचदेवा में रटने की जगह प्रैक्टिल पढ़ाई आई बेहद काम रिकेश्वर ने बताया कि भिलाई में रहने वाले उनके मामा ने सचदेवा कोचिंग का अच्छा फीडबैक दिया था। उनकी बेटियां और उनके पहचान के कई बच्चे पढ़कर नीट में सलेक्ट भी हुए। उनकी बात मानकर मैंने भी सचदेवा में एडमिशन लिया। यहां रटने की जगह टीचर्स प्रैक्टिल पढ़ाई पर ज्यादा फोकस करते थे। यही बात मेरे बहुत काम आई। जिस चीज को आपको याद रखना है अगर आप उसे डायग्राम या फिर जीवन की किसी घटना से जोड़कर पढ़ोगे तो ज्यादा दिनों तक याद रहती है। टेस्ट सीरिज में पूछे गए कई प्रश्न नीट के पेपर में देखकर मैं खुशी से उछल गया था। गेस्ट सेशन में सचदेवा के एक्स स्टूडेंट और मशहूर डॉक्टरों को सुनकर सपने में जान आ जाती थी। हर कोई जब यही कहता था कि हमने जीरो से शुरूआत की है और आज सक्सेस के शीर्ष पर हैं तो लगता था कि मुझे डॉक्टर बनने से कोई नहीं रोक सकता। आर्थिक प्राब्लम को समझते हुए सचदेवा में फीस में छूट भी दी गई जिससे परिवार को बहुत सहायता मिली। जैन सर ने कहा था मेहनत से पूरे होते हैं सपने सचदेवा न्यू पीटी कॉलेज के डायरेक्टर चिरंजीव जैन सर हर सप्ताह अपने कोचिंग में पढऩे वाले हर बच्चे की काउंसलिंग करते थे। एक दिन उन्होंने कहा कि कोई भी बच्चा मां के पेट से डॉक्टर, इंजीनियर, आईएएस और आईपीएस बनकर पैदा नहीं होता। अपने मेहनत के दम पर ही वह इन ओहदों को हासिल करता है। पैसा से अच्छा स्कूल और अच्छे टीचर्स मिल सकते हैं, लेकिन मेहनत नहीं करोगे तो ये सब जाया हो जाएगा। उनकी ये बात मन को छू गई थी। उसी दिन मैंने फैसला कर लिया कि अब चाहे कुछ भी हो नीट क्वालिफाई करना ही है। मैं जिस बैकग्राउंड से आया हूं वहां बड़े सपने देखने से पहले परिवार अपने आर्थिक हालात देखता है। इसलिए परिवार वालों के सपनों को टूटने भी नहीं दे सकता था। रोज कम से कम 10 घंटे की पढ़ाई करता था जब तक एमबीबीएस की सीट हासिल नहीं कर ली तब तक।(the states. news)

रायपुर (media saheb.com)|  प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता श्री बूटा सिंह के निधन पर गहरा दुख…

रायपुर, (media saheb.com)| कोयला मंत्रालय ने जाने-माने उद्योगपति श्री नवीन जिन्दल के नेतृत्व वाली कंपनी जिन्दल स्टील एंड पावर लिमिटेड (जेएसपीएल)की सहायक कंपनी जिन्दल पावर लिमिटेड…

नई दिल्ली, (media saheb.com) कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी तथा महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने नये साल पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए उन विभूतियों…

नई दिल्ली, (media saheb.com) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को देशवासियों को नूतन वर्ष 2021 की शुभकामनाएं दी और सभी के जीवन में बेहतर स्वास्थ्य, उल्लास…