भाजपा अडानी-अंबानी के पैसों से चुनाव जीती कर्ज देशवासी चुका रहें रायपुर(media saheb.com)। नए कृषि बिल के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों की मांगों का समर्थन करते…
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दो यूनिट्स ने मिलकर एक ही दिन में 7345 टन का रिकाॅर्ड उत्पादन देश में समान आकार की किसी भी ब्लास्ट फर्नेस द्वारा हासिल की गई सर्वोच्च…
मुंबई (media saheb.com) अपने स्टाइल और डांस को लेकर चर्चा में रहने वाली फिल्म अभिनेत्री दिशा पाटनी ने अगले साल यानी 2021 के अपने प्लान के…
नीट क्वालिफाई करके दसवीं पास पिता के सपनों को दिया पंख भिलाई(mediasaheb.com). बालोद जिले के डौंडीलोहारा ब्लॉक के वनांचल ग्राम सहगांव की खिलेवरी पिस्दा ने डॉक्टरी की पढ़ाई के लिए सबसे कठिन माने जाने वाले नीट की परीक्षा क्वालिफाई किया है। अब आंगनबाड़ी सहायिका गीता की बेटी जगदलपुर मेडिकल कॉलेज में एडमिशन लेकर डॉक्टर बनेगी। विपरीत आर्थिक परिस्थितियों के बीच दसवीं पास किसान पिता डोमेंद्र का सपना था कि बेटी पढ़कर लिखकर डॉक्टर बने। इसलिए उन्होंने परिवारवालों से कर्ज लेकर बेटी को एक साल तक नीट की कोचिंग कराई। महज तीन एकड़ में किसानी करने वाले पिता कहते हैं कि बेटी ने एमबीबीएस की सीट हासिल करके उस ऋण का मूल्य अदा कर दिया है। ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाली खिलेश्वरी अपनी सफलता से बेहद उत्साहित है, वो कहती है कि अगर आपके सपने बड़े हैं तो खुद को एक मौका जरूर देना चाहिए। नीट के लिए एक साल ड्रॉप लेकर मैंने खुद को दूसरा चांस दिया। कड़ी मेहनत से ही आज मैं एमबीबीएस की सीट हासिल कर पाई। इंग्लिश से लगता था डर, सोचती थी कि कहीं पीछे न रह जाऊं खिलेश्वरी ने बताया कि गांव के स्कूल में दसवीं तक पढ़कर आगे की पढ़ाई प्रयास आवासीय विद्यालय दुर्ग से की। 12 वीं बोर्ड में 80 प्रतिशत अंक आए लेकिन इंग्लिश का डर मन से जा नहीं रहा था। एक साल ड्रॉप लेकर जब नीट की तैयारी शुरू की तो यही अंग्रेजी एक बार फिर मेरी पढ़ाई में रोड़ा बनने लगी। जिसके कारण कई बार मैं डिप्रेशन में चली जाती थी। लगता था कि इस अंग्रेजी की वजह से मैं पीछे न रह जाऊं। एक दिन जब कोचिंग में हिंदी मीडियम से पढ़कर डॉक्टर बनने वाली महिला चिकित्सक कविता से रूबरू हुई तब लगा कि जब वो कर सकती हैं तो मैं क्यों नहीं। उसी दिन से अंग्रेजी सुधारने के लिए मेहनत करना शुरू कर दिया। अब अंग्रेजी से डर नहीं लगता। जो सब्जेक्ट बोरिंग लगता था उसे भी इंटरेस्ट से पढऩा शुरू किया। नोट्स और पढ़ाने का तरीका आया सचदेवा में रास खिलेश्वरी ने बताया कि जब वह नीट के लिए कोचिंग तलाश कर रही थी तभी उनके परिचित और फिलहाल डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहे भैय्या ने सचदेवा कॉलेज भिलाई के बारे में बताया। वो यहां के एक्स स्टूडेंट भी रह चुके हैं। इसलिए किसी और जगह जाने की बजाय सीधे सचदेवा भिलाई में ही एडमिशन लिया। यहां पढ़ते-पढ़ते एक साल कैसे निकल गया पता ही नहीं चला। एक समय था जब मुझे नोट्स बनाने में बहुत दिक्कत होती थी। सचदेवा में टीचर्स ने बहुत ही सरल तरीके से नोट्स बनाना सिखाया। नीट की तैयारी के लिए हिंदी मीडियम के स्टूडेंट्स के लिए इससे बेहतर और कोई कोचिंग हो ही नहीं सकता। टीचर्स हर बार नए तरीके से चीजों को समझाते थे। जिससे हम पढ़ी हुई बातों को लंबे समय तक याद रख पाए। डिप्रेशन दूर करने जैन सर ने सुनाई थी हाथी की कहानीनीट की तैयारी के दौरान कई बार डिप्रेशन में आ जाती थी। लगता था सब मुझसे अच्छा कर रहे हैं। कहीं मैं अपने माता-पिता का पैसा तो वेस्ट नहीं कर रही। मैं डॉक्टर बन पाऊंगी या नहीं। ऐसे सवाल मन में घूमते रहते थे। एक दिन चिरंजीव जैन सर ने काउंसिलिंग सेशन में मुझे एक हाथी की कहानी सुनाई। उन्होंने बताया कि दो दोस्त थे। एक दोस्त के पास छोटा हाथी था। वो उसे रस्सी से बांधकर रखता था। एक दिन छोटे हाथी ने भागने की कोशिश की पर वो भाग नहीं पाया। धीरे-धीरे हाथी बड़ा हो गया और रस्सी, जंजीर में बदल गई। आदमी से कई गुना बड़ा और शक्तिशाली होने के बाद भी वो हाथी आज भी जंजीरों में जकड़ा हुआ है। क्योंकि उसने कभी दोबारा उस जंजीर को तोडऩे की कोशिश ही नहीं की। तब समझ में आया कि कोशिश करने से नंबरों को कभी भी बदला जा सकता है। दोबारा कोशिश करूंगी तो जरूर अच्छे नंबर मिलेंगे। धीरे-धीरे और लगातार कोशिश से टेस्ट सीरिज में रिजल्ट अच्छा आने लगा और सीधे नीट क्वालिफाई होने का सर्टिफिकेट घर लेकर पहुंची। जैन सर ने काउंसलिंग के साथ ही एक पैरेंट्स की तरह ख्याल रखा। जिससे कारण घर से दूर रहकर कभी घर की कमी महसूस नहीं हुई।
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नीट क्वालिफाई करके अब डॉक्टर बनेगी भिलाई की अमीशा भिलाई.(media saheb.com) आजकल के युवाओं की जिंदगी जहां स्मार्ट फोन के इर्द-गिर्द नाचती है वहीं भिलाई की अमीशा का ध्यान केवल नीट की तैयारी पर केंद्रित रहा। अपने बचपन के डॉक्टर बनने के सपने को पूरा करने के लिए अमीशा मंडावी ने खुद का पर्सनल मोबाइल तक नहीं खरीदा। ताकि पढ़ाई में मोबाइल रूकावट न बने। दृढ़ संकल्प, कड़ी मेहनत और लगन की बदौलत दूसरे प्रयास में नीट क्वालिफाई करके अब सिम्स बिलासपुर में एडमिशन लेकर अमीशा अपने परिवार की पहली डॉक्टर बनेगी। अमीशा कहती है कि जब सारे दोस्त महंगे फोन लेकर सोशल मीडिया साइट्स पर बिजी रहते थे तब मैं दो साल तक केवल किताबों में उलझी रही। कई बार वो मुझे पढ़ाकू और बोरिंग बोलकर चिढ़ाते भी थे। उनकी इन बातों का मुझ पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ा, क्योंकि मैं जानती थी कि फोन तो कभी भी खरीद सकती हूं, लेकिन नीट क्वालिफाई करने का मौका चूक जाऊंगी तो जीवन में कभी डॉक्टर नहीं बन पाऊंगी। इसलिए खुद की पहचान बनाने के लिए दिन रात पढ़ाई करती थी। जिसका सुखद परिणाम आज एमबीबीएस की सीट के रूप में मिला है। घर की आर्थिक परिस्थिति खराब थी इसलिए पापा पढ़ नहीं पाए पर मुझे किया प्रेरित अमीशा ने बताया कि बीएसपी वर्कर पिता छत्तर सिंह घर की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण ज्यादा पढ़ नहीं पाए। आईटीआई करने के बाद उन्हें नौकरी ज्वाइन करनी पड़ी। पापा की ये सोच थी कि उनके बच्चे उच्च शिक्षा हासिल करें। इसलिए हर दिन मुझे प्रेरित किया कि तुम डॉक्टर बन सकती हो। उनके मोटिवेशन के कारण ही एक साल के ड्रॉप इयर में मैं खुद को इतना समय दे पाई। डिप्रेशन पर कंट्रोल कर पाई। जब मैंने नीट क्वालिफाई किया तो पिता ने गिफ्ट के रूप में मोबाइल फोन खरीदकर दिया है। एमबीबीएस के बाद मैं स्त्री रोग विशेषज्ञ बनना चाहती हूं। मुझे लगता है कि एक महिला डॉक्टर समाज में पीडि़त, शोषित महिला को ज्यादा अच्छी तरह समझकर उसे मेंटल और फिजिकल स्ट्रेंथ दे सकती है। महिलाओं और बच्चियों के लिए कुछ बेहतर करने का यह सबसे अच्छा रास्ता है। सचदेवा के टीचर्स ने सिखाया खुद पर भरोसा करना नीट की तैयारी के लिए सचदेवा भिलाई के एक्स स्टूडेंट ने मार्गदर्शन दिया। उन्होंने बताया कि यही एक कोचिंग हैं जहां पढ़ाई के साथ-साथ आपको मेंटल सपोर्ट भी मिलेगा। कोचिंग में पहले दिन कदम रखते ही ये बात सच साबित हुई। शुरूआत में टेस्ट सीरिज में काफी कम नंबर आते थे। तब यहां के टीचर्स ने मुझे हौसला दिया कि मैं भी टॉप 10 में आ सकती हूं। बार-बार जब अपनी फेल्यिर से निराश होती थी तब टीचर्स मुझसे कहते थे कि अगले टेस्ट में तुम बेहतर करोगी। ऐसा ही हुआ। धीरे-धीरे डाउट क्लीयर हुए और विषय की समझ बढ़ती चली गई। भूलने की आदत पर काबू पाने जैन सर ने दिया नुस्खा नीट की तैयारी के मिड सेशन में बहुत ज्यादा डिप्रेशन होने लगा। टेस्ट में पढ़ा हुआ लेसन भी भूल जाती थी। ऐसे में सचदेवा न्यू पीटी कॉलेज के डायरेक्टर चिरंजीव जैन सर ने मुझे भूलने की आदत पर काबू पाने के लिए अचूक नुस्खा दिया।(the states. news)
नई दिल्ली, (media saheb.com) | विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति और रणनीति के क्षेत्र में चर्चित भारत-प्रशांत विचार को आसान शब्दों में समझाते हुए…
नई दिल्ली, (media saheb.com)। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को कहा कि भारत अगले दो वर्षों में ‘टोल बूथ मुक्त’ हो जाएगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने…
मुंबई, (media saheb.com) | नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने गुरुवार को ड्रग मामले में अब फिल्म निर्माता करण जौहर को समन जारी किया है। एनसीबी ने…
रायपुर(#mediasaheb.com) मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में राज्य सरकार के सफलतम दो वर्ष पूर्ण होने पर मंत्रिमण्डल के सभी सदस्यों ने भी मुख्यमंत्री को बधाई…

