- मिलिए इस्पात नगरी भिलाई के मशहूर चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. सत्येंन ज्ञानी से
- एक साल के ड्रॉप और कड़ी मेहनत से नाइंटी के दौर में हासिल किया था ऑल इंडिया में 412 रैंक
भिलाई(mediasaheb.com) सफलता के लिए कड़ी मेहनत को सबसे महत्वपूर्ण मानने वाले इस्पात नगरी भिलाई के मशहूर चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉक्टर सत्येंन ज्ञानी आज किसी परिचय के मोहताज नहीं है। उन्होंने पढ़ाई के बाद अपने बाकी दोस्तों की तरह विदेश में प्रैक्टिस करने की बजाय जन्मभूमि भिलाई को कर्मभूमि बनाने का निश्चय किया। जिस समाज ने उन्हें आगे बढ़ाया उन्हीं अपनों के बीच रहकर आज लोगों की सेवा कर रहे हैं। डॉक्टर ज्ञानी ने बताया कि डॉक्टर बनने का सपना उन्होंने बचपन से नहीं देखा था, बल्कि स्कूली दोस्तों के साथ-साथ पढ़ते चले गए। आज खुद के लिए उस फैसले पर गर्व होता है जब मैं किसी बच्चे का इलाज करके उसके दर्द को थोड़ा कम कर पाता हंू। ये सुकून दुनिया की वो अनमोल चीज है जिसे पैसे से नहीं खरीदा जा सकता। अपने काम को पूजा की तरह समझने वाले डॉक्टर ज्ञानी ने स्टूडेंट से डॉक्टर बनने तक के सफर को सचदेवा न्यू पीटी कॉलेज के साथ साझा किया।
12 वीं बोर्ड के बाद लिया एक साल का ड्रॉप
डॉक्टर ज्ञानी ने बताया कि दसवीं बोर्ड परीक्षा देने के बाद उन्होंने मैथ्स की जगह बायो लिया क्योंकि बायो पढऩे में काफी मजा आता था। 12 वीं बोर्ड परीक्षा तक सब अच्छा चला फिर साथ पढऩे वाले दोस्त एक साल ड्रॉप लेकर ऑल इंडिया पीएमटी की तैयारी करने लगे। उन्हें कोचिंग जाता देख मैंने भी एडमिशन ले लिया। आज से 24 साल पहले तक कॅरियर के इतने ऑप्शन भी नहीं थी। मैथ्स लिए वो इंजीनियर और बायो लेने वाले स्टूडेंट डॉक्टर ही बनना चाहते थे। मैंने जब घर वालों को बताया कि मेडिकल की तैयारी करना चाहता हूं तो उन्होंने भी हामी भर दी। इस तरह फाइनली मैं सचदेवा न्यू पीटी कॉलेज पहुंच गया। एक साल की तैयारी के बाद मुंबई के नामी मेडिकल कॉलेज के लिए सलेक्ट हो गया। एक बार जो मेडिकल की पढ़ाई का सफर शुरू हुआ तो फिर कभी पलटकर नहीं देखा। चाइल्ड स्पेशलिस्ट बनकर भिलाई के पल्स अस्पताल में सेवा दे रहा हूं।
पापा ने कहा था पढ़ाई के लिए दुनिया के किसी भी कोने में जाओ वापस लौटकर घर आना है...
जब मैं एमबीबीएस की मुंबई में पढ़ाई कर रहा था तो एक दिन बीएसपी कर्मी पिता ने मुझसे कहा कि पढ़ाई के लिए तुम दुनिया के किसी भी कोने में चले जाओ लेकिन वापस लौटकर भिलाई ही आना है। पिता जी की बात का मान रखते हुए मैं पढ़ाई पूरी करने के बाद भिलाई लौट आया। शुरूआती कठिनाइयों के बाद धीरे-धीरे खुद की पहचान बनाना शुरू किया। चूंकि उस दौर में मैं अपने परिवार का पहला डॉक्टर बना तो घर वालों के अलावा शहर में भी लोगों से बहुत प्यार और सम्मान मिला। अच्छा लगता है जब लोग कहते हैं कि ज्ञानी साहब का बेटा आज बड़ा डॉक्टर बन गया है।
सचदेवा के बिना संभव नहीं था कॅरियर में ऊंची उड़ान भरना
डॉ. सत्येंन ने बताया कि जब डॉक्टर बनने का फैसला किया तब सचदेवा के टीचर्स ने बहुत सपोर्ट किया। सचदेवा कॉलेज के डायरेक्टर चिरंजीव जैन सर हमेशा हमें मेडिकल इंट्रेस की परीक्षा से जुड़ी हर बात बताते थे। एक जिम्मेदार पैरेंट्स की तरह गु्रप में स्टडी करवाकर वीक सब्जेक्ट पर फोकस करते थे। मैं अपने दोस्तों के साथ गु्रप में पढ़ता था। कई बार ऐसा हुआ कि गु्रप स्टडी के बीच में जैन सर आ जाते और हम जहां उलझे होते उसे चंद मिनटों में सुलझाकर आगे बढ़ जाते। भिलाई उस दौर में भी एजुकेशन का हब था। कोचिंग का चलन भी काफी था। दूर-दूर से अविभाजित मध्यप्रदेश से बच्चे भिलाई पढऩे के लिए आया करते थे।
तब भी सचदेवा यहां का टॉप कोचिंग सेंटर था और आज भी है।
खुद से करे कॉम्पिटिशन मेडिकल इंट्रेस की तैयारी कर रहे बच्चों को दूसरों की बजाय खुद से कॉम्पिटिशन करना चाहिए। डॉ. सत्येंन ज्ञानी कहते हैं कि पहला एप्रोच आपका खुद का होना चाहिए। अगर आपको अपनी काबिलियत पर भरोसा है तो सक्सेस जरूरी मिलेगी। अगर दूसरों से कॉम्पिटिशन करने की कोशिश करोगे तो रिजल्ट अच्छा नहीं आने पर ध्यान भी भटकता है। इसलिए अपने लक्ष्य पर फोकस करते हुए मन लगा के पढ़ाई करें। डॉक्टर के साथ एक अच्छा इंसान बनने की भी कोशिश करें क्योंकि जब आप अस्पताल में पहुंचते हैं तो नब्ज से ज्यादा लोगों के दिलों को टटोलना पड़ता है। आधी बीमारी तो ऐसे ही दूर हो जाती है। बदले में मिला प्यार और रिस्पेक्ट आपको जीवन में सदा आगे बढऩे की प्रेरणा देता है।(the states. news)

