नई दिल्ली, (mediasaheb.com) । सरकार ने जम्मू-कश्मीर के सेब की सीधे तौर पर खरीद करने और उत्पादकों को भुगतान उनके बैंक अकाउंट में करने की घोषणा की है। मंगलवार को अधिकारियों ने बताया कि किसानों से सीधे तौर पर सेब खरीदने का काम राष्ट्रीय कृषिसहकारी विपणन संघ (नाफेड) द्वारा किया जाएगा, जिसे 15 दिसंबर तक पूरा कर लिया जाएगा।उल्लेखनीय है कि घाटी में सेब की खेती से करीब 1200 करोड़ रुपये के रेवन्यू हर साल आता है। सरकार ने यह कदम इसलिए उठाया है कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद वहां के किसानों को आतंकियों ने बाजार में सेब नहीं बेचने की धमकी दी थी, जिससे सेब का करोबार ठप पड़ गया था। इससे सेब के किसानों के बीच निराशा का माहौल था। एक सरकारी अधिकारी ने बातया कि नाफेड के जरिए सेब की खरीद का काम 15 दिसंबर तक पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा राज्य प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि जिन किसानों से सेब खरीदा जाएगा, उसका भुगतान प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के जरिए सीधे उनके बैंक अकाउंट में किया जाएगा। अधिकारी ने कहा जम्मू-कश्मीर के सभी जिलों में सभी श्रेणियों के सेब जिसमें ए, बी और सी की खरीद की जाएगी।राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने पिछले शनिवार को कहा था कि घाटी से प्रतिदिन 750 ट्रक सेब देश के अन्य हिस्सों में जाते हैं। गत शुक्रवार को घाटी के एक प्रमुख फल कारोबारी के परिवार के सदस्यों पर हमला भी किया गया था। (हि.स.)
Friday, May 1
Breaking News
- कातिलाना इश्क: राजनांदगांव में प्रेमिका ने पूर्व प्रेमी संग मिलकर युवक की हत्या, दोनों को उम्रकैद
- आज का राशिफल (1 मई): मेष से मीन तक जानें, कैसा रहेगा आपका दिन
- प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना में करोड़ों की संगठित धोखाधड़ी का पर्दाफाश सीआईडी ने दर्ज की दो एफआईआर
- पुलिस विभाग में 2070 महिला आरक्षकों को दिये जायेंगे नियुक्ति पत्र
- श्रमिक समाज की आधारशिला हैं और उनके बिना विकास की कल्पना अधूरी: श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन
- इंदौर से वैश्विक बाजारों तक सीधी पहुंच, ई-कॉमर्स निर्यात में मध्यप्रदेश की मजबूत दस्तक
- डबल इंजन की रफ्तार, योजनाओं की बौछार- किसान, आदिवासी, महिला और युवा बने केंद्र में
- आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को राहत: मानदेय कटौती का एरियर्स चुकाने का MP हाई कोर्ट का आदेश
- विमानन क्षेत्र में मध्यप्रदेश को बनाएं रोल मॉडल : मुख्यमंत्री डॉ.यादव
- आदमखोर घोषित करने से पहले लेपर्ड पर कड़े नियम, अब वैज्ञानिक जांच अनिवार्य


