रायपुर, (media saheb.com) रायपुर से 40 किलोमीटर दूर दुर्ग जिले में स्वाइन फ्लू से एक और व्यक्ति की मौत सोमवार को हो गई है। पिछले दस दिन से वह बीमार था और उसे इलाज के लिए रायपुर के मेकाहारा में भर्ती कराया गया था। स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने इसे चिंता का विषय बताते हुए कहा है कि शासन और प्रशासन की तरफ से सारी सुविधाओं की व्यवस्था की जा रही है। जानकारी के अनुसार दुर्ग जिले में स्वाइन फ्लू से यह तीसरी मौत है। स्वाइन फ्लू से पीड़ित और 6 लोगों का इलाज जारी है। एक की हालत चिंताजनक है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार दुर्ग जिले के पाटन क्षेत्र के कालाकोट में 30 साल के प्रकाश साहू की स्वाइन फ्लू से मौत हुई है। बताया जाता है कि दुर्ग जिले में 54 ऐसे मरीजों का इलाज चल रहा है, जिनकी अभी रिपोर्ट नहीं आई है, पर सूत्रों का दावा है कि उन्हें स्वाइन फ्लू हो सकता है। चिकित्सकों ने ऐसी आशंका व्यक्त की है। उल्लेखनीय है कि 22 फरवरी को स्वास्थ्य मंत्री सिंहदेव ने प्रदेश में स्वाइन फ्लू से 7 मौतों की स्वीकारोक्ति की थी। उन्होंने यह भी जानकारी दी थी कि स्वास्थ्य विभाग के पास 3922 वैक्सीन उपलब्ध है।
उन्होंने यह भी बताया था कि प्रदेश के हर जिले में स्वाइन फ्लू से पीड़ित लोगों के इलाज की व्यवस्था की जा रही है तथा बीमारी के रोकथाम के लिए काम्बैट टीम का गठन किया गया है। पिछले 5 सालों में प्रदेश में एड्स, स्वाइन फ्लू, डायरियाऔर मलेरिया से हुई मौतों के आंकड़े बेहद चिंताजनक है। जब मौजूदा स्वास्थ्य मंत्री सिंहदेव नेता प्रतिपक्ष थे, तब पिछले वर्ष जुलाई माह में उनके द्वारा पूछे गए प्रश्न के जवाब में तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री ने स्वीकार किया था कि विगत पांच वर्षों में एड्स से करीब 3051 लोगों की मौत हुई है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में एड्स रोग से मरने वालों की संख्या 703 थी। उस समय भी जानकारी दी गई थी कि विगत 4 वर्षों में स्वाइन फ्लू से 121 लोगों की मौत हुई। वर्ष 2017-18 में 67 लोगों ने स्वाइन फ्लू की चपेट में आकर अपना दम तोड़ा। डायरिया रोग से पीड़ित होकर जान गंवाने वाले लोगों की संख्या पिछले 5 वर्षों में 284 से ज्यादा रही है, जबकि पीलिया से पिछले पांच वर्षों में 94 से ज्यादा जाने गई है। पीने के पानी में गंदगी, साफ सफाई का अभाव और प्रदूषित जल स्रोतों की वजह से यह मौतें हुई हैं। लोगों में जागरुकता का अभाव रहा है और समय पर बेहतर चिकित्सा भी नहीं उपलब्ध हुई। सरकारी चिकित्सालयों में चिकित्सा के प्रति वरिष्ठ चिकित्सकों की बढ़ती उदासीनता भी मौतों का एक बड़ा कारण रहा है।(हि.स.)।


