रायपुर (mediasaheb.com)| “निवेश केवल पूंजी का प्रवाह नहीं, बल्कि विश्वास का परिणाम होता है।” किसी भी राज्य की आर्थिक प्रगति इस बात पर निर्भर करती है कि वह उद्योगों और निवेशकों के लिए कितना अनुकूल वातावरण तैयार कर पाता है। इसी दृष्टि से छत्तीसगढ़ ने बीते वर्षों में ईज ऑफ डुईंग बिजनेस के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार करते हुए स्वयं को देश के उभरते औद्योगिक राज्यों में स्थापित किया है।
राज्य सरकार ने निवेशकों के लिए पारदर्शी, सरल एवं समयबद्ध प्रशासनिक व्यवस्था विकसित करने पर विशेष बल दिया है। उद्योग स्थापित करने हेतु आवश्यक अनुमतियों को ऑनलाइन माध्यम से उपलब्ध कराना, सिंगल विंडो सिस्टम, विभागीय प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण, समयबद्ध स्वीकृति तथा अनावश्यक औपचारिकताओं में कमी जैसे कदमों ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है। अब उद्यमियों को विभिन्न कार्यालयों के चक्कर लगाने के बजाय अधिकांश सेवाएँ एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं।
छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति केवल बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं है, बल्कि एमएसएमई, स्टार्टअप, महिला उद्यमिता, ग्रामीण उद्योग तथा नवाचार आधारित उद्यमों को भी विशेष प्रोत्साहन प्रदान करती है। राज्य में उपलब्ध प्रचुर खनिज संपदा, ऊर्जा संसाधन, कृषि आधारित संभावनाएँ, बेहतर सड़क एवं रेल संपर्क तथा देश के मध्य में स्थित भौगोलिक स्थिति इसे निवेश के लिए स्वाभाविक रूप से आकर्षक बनाती है।
ईज ऑफ डुईंग बिजनेस की इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि इसका लाभ केवल उद्योगपतियों तक सीमित नहीं रहता। नए निवेश से रोजगार के अवसर बढ़ते हैं, स्थानीय युवाओं को कौशल आधारित रोजगार मिलता है, सहायक उद्योग विकसित होते हैं तथा राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति प्राप्त होती है। उद्योग, व्यापार और सेवा क्षेत्र के विस्तार से क्षेत्रीय विकास को भी बल मिलता है।
आज वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौर में निवेश आकर्षित करने के लिए केवल संसाधन पर्याप्त नहीं होते; सुशासन, पारदर्शिता और त्वरित निर्णय क्षमता भी उतनी ही आवश्यक होती है। छत्तीसगढ़ ने इन तीनों क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति करते हुए यह संदेश दिया है कि निवेशक-अनुकूल नीतियाँ ही आत्मनिर्भर और समृद्ध अर्थव्यवस्था की आधारशिला हैं।
निश्चित रूप से, ईज ऑफ डुईंग बिजनेस के माध्यम से छत्तीसगढ़ ने विकास की नई दिशा निर्धारित की है। यदि यही गति, पारदर्शिता और नवाचार भविष्य में भी कायम रहे, तो राज्य न केवल राष्ट्रीय बल्कि वैश्विक निवेश मानचित्र पर एक सशक्त औद्योगिक केंद्र के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करेगा।


