कलिंगा विश्वविद्यालय, रायपुर के विज्ञान संकाय, सूक्ष्मजैविकी एवं वनस्पति शास्त्र विभाग द्वारा 28 अगस्त 2025 को “मानव स्वास्थ्य और पौधों में सूक्ष्मजीवों की भूमिका” विषय पर एक ऑनलाइन अतिथि व्याख्यान आयोजित किया गया। मुख्य वक्ता के रूप में ओम् स्टर्लिंग ग्लोबल यूनिवर्सिटी, हरियाणा की एसोसिएट प्रोफेसर (सूक्ष्मजैविकी) डॉ. चयानिका पुततुण्डा उपस्थित रहीं।
डॉ. पुततुण्डा ने अपने व्याख्यान में बताया कि आंतों में पाए जाने वाले सूक्ष्मजीव (गट माइक्रोबायोटा) का प्रभाव केवल पाचन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मस्तिष्क, हृदय, यकृत, फेफड़े, हड्डी, गुर्दे और प्रजनन अंगों पर भी पड़ता है। इस असंतुलन (डिसबायोसिस) से तनाव, अवसाद, हृदय रोग, कैंसर, मोटापा और डायबिटीज़ जैसी गंभीर बीमारियाँ उत्पन्न हो सकती हैं। उन्होंने प्रोबायोटिक्स, प्रीबायोटिक्स, सायनबायोटिक्स और फीकल माइक्रोबायोम ट्रांसप्लांटेशन जैसी आधुनिक तकनीकों को समाधान के रूप में रेखांकित किया।
व्याख्यान में सूक्ष्मजैविकी के जैव- प्रौद्योगिकीय अनुप्रयोगों जैसे वैक्सीन, एंटीबॉडी, इंसुलिन उत्पादन तथा एंटीबायोटिक प्रतिरोध की समस्या पर भी चर्चा हुई। साथ ही गंगा नदी की स्वच्छता, साइनोबैक्टीरिया की उपयोगिता तथा स्वदेशी उपायों जैसे मिट्टी व हल्दी के प्रयोग पर भी प्रकाश डाला गया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. फैज़ बक्श एवं डॉ. प्रदीप कुमार ने किया। व्याख्यान अत्यंत ज्ञानवर्धक और उपयोगी सिद्ध हुआ। कार्यक्रम में विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता सहित वनस्पति शास्त्र एवं सूक्ष्मजैविकी विभाग के अन्य संकाय सदस्य भी उपस्थित रहे। कलिंगा विश्वविद्यालय शैक्षणिक उत्कृष्टता और व्यावसायिक विकास को बढ़ावा देने के लिए इस तरह के ज्ञान-साझाकरण कार्यक्रमों के आयोजन के लिए प्रतिबद्ध है।


