रायपुर, (media saheb.com) खाद को लेकर इन दिनों छत्तीसगढ़ में सियासी रार मचा हुआ है। खाद की किल्लत के लिए दोनों प्रमुख राजनीतिक पार्टियां भाजपा-कांग्रेस एक- दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रही है। इन सबके बीच किसान ही पिस रहे हैं। महंगे दाम और खाद की कमी को लेकर की गई पड़ताल के बाद ग्राउंड रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। रेक हैंडलिंग की वजह से प्रदेश में खाद की कमी बनी हुई है। इसका बेजा फायदा खाद बनाने वाली कंपनियां और उनके वितरक उठा रहे हैं। नतीजा किसानों को मंहगे दामों में खाद खरीदना पड़ रहा हैं।
छत्तीसगढ़ में खाद की कमी को लेकर अब राजनीतिक घमासान चरम पर है। इस मामले में राज्य सरकार केंद्र पर आरोप लगा रही है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल खाद की आपूर्ति के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिख चुके हैं। सरकार का कहना है कि फर्टिलाइजर आवंटन का काम केंद्र सरकार का है। केंद्र ने छत्तीसगढ़ के लिए जितना आवंटित किया है उसका भी 40 प्रतिशत उपलब्ध नहीं करा पाई। अभी एक लाख मीट्रिक टन खाद की कमी है। वहीं भाजपा नेताओं का कहना है कि राज्य सरकार अपनी प्रबंधकीय नाकामियां छिपाने के लिए केंद्र सरकार पर आरोप लगा रही है।
पूर्व सीएम रमन सिंह ने सरकार पर कालाबाजारी- जमाखोरी को बढ़ावा देने और जानबूझ कर खाद की कमी को प्रचारित करने का गंभीर आरोप लगाया। पिछले दिनों पूर्व सीएम ने आंकड़े प्रस्तुत करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में खरीफ सीजन 2021 में यूरिया की आवश्यकता 5.50 लाख मीट्रिक टन है। इसी के अनुरूप, 1 अप्रैल 2021 से 02 जुलाई 2021 तक 2.29 लाख मीट्रिक टन की आवश्यकता थी. मांग के अनुसार उर्वरक विभाग ने 1.91 लाख मीट्रिक टन के ओपनिंग स्टॉक सहित 4.10 लाख मीट्रिक टन की उपलब्धता केन्द्र सरकार ने छत्तीसगढ़ के लिए सुनिश्चित की । इस दौरान यूरिया की बिक्री 2.40 लाख मीट्रिक टन रही है। उन्होंने कहा कि राज्य में 2 जुलाई 2021 को क्लोजिंग स्टॉक 1.69 लाख मीट्रिक टन है और छत्तीसगढ़ में इस सीजन में यूरिया की उपलब्धता पर्याप्त है।
जुलाई माह का जिक्र करते हुए कहा कि जुलाई 2021 माह के लिए 1.40 लाख मीट्रिक टन की आवश्यकता है, जिसे देखते हुए उर्वरक विभाग ने 1.42 लाख मीट्रिक टन की आपूर्ति योजना जारी की है। 2 जुलाई 2021 को राज्य में 1.81 लाख मीट्रिक टन ( 1.75 लाख मीट्रिक टन के आॅपनिंग स्टॉक सहित) की उपलब्धता सुनिश्चित की गई। इस दौरान यूरिया की बिक्री 0.12 लाख मीट्रिक टन रही है। राज्य में 2 जुलाई 2021 तक क्लोजिंग स्टॉक 1.69 लाख मीट्रिक टन है।
रमन सिंह ने कहा कि अचानक सीएम भूपेश बघेल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर डेढ़ लाख मीट्रिक टन यूरिया और डेढ़ लाख मैट्रिक टन डीएपी खाद की मांग कर रहे हैं। भूपेश बघेल सरकार को उत्तर देना चाहिए कि आखिर केन्द्र सरकार द्वारा जब पर्याप्त मात्रा में खाद की आपूर्ति की जा रही है, फिर अचानक तीन लाख मैट्रिक टन की खाद की आवश्यकता राज्य को क्यों पड़ गई । केन्द्र द्वारा भेजे गये उर्वरक का आखिर क्या हुआ, जो आज किसान खाद की कमी को लेकर सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं।
इन आरोप- प्रत्यारोप के बीच हमने किसानों व खाद बेचने वाले दुकानदारों से चर्चा की तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। दुकानदारों का कहना है कि खाद की कमी का सारा खेल रेक हैंडलिंग में होता है। उर्वरक कंपनियों द्वारा जितनी मात्रा में खाद की आपूर्ति की जाती है, उतनी मात्रा में खाद वितरक या दुकानदारों के पास नहीं पहुंच पाती। रेक के उतरने वाले खाद को स्थानीय वितरक या डीलर स्टॉक करने रख देते हैं। इससे खाद की कृत्रिम किल्लत पैदा हो जाती है। जिसे बाद में ऊंचे दाम में बाजार में खपाया जाता है।
बाजार में यूरिया और डीएपी 100 रुपए महंगी है। सरकार ने यूरिया के लिए 266 और डीएपी के लिए 1200 रुपए प्रति बोरी दर निर्धारित किया है। इसके विपरीत स्थानीय खाद विक्रेताओं को वितरक यूरिया को 320 रुपए में और डीएपी को 1260 रुपए में दे रहे हैं। इसके अलावा 25- 30 रुपए प्रति बोरी भाड़ा देना पड़ता है। ऐसे में स्थानीय खाद विक्रेताओं को सरकार द्वारा निर्धारित दर से 100 रुपए ज्यादा में खाद खरीदना पड़ रहा है।
खाद की कमी का कंपनी व उनके डिस्टीब्यूटर बेजा फायदा उठा रहे हैं। खुले बाजार में यूरिया या डीएपी लेने पर अलग से लादन लेना पड़ रहा है। । प्रति बोरी लादन की कीमत 300- 350 रुपए हैं। जानकारों का कहना है कि यूरिया- डीएपी खरीदना किसानों के लिए जरुरी हैं। इन खादों के बिना फसल की कल्पना नहीं की जा सकती। किसानों की जरुरत को कंपनी व उनके डिस्टीब्यूटर बखूबी समझते हैं। इसी का फायदा उठाकर वे खाद खरीदने पर लादन की अनिवार्य कर देते हैं। किसानों को मजबूरी में खाद के साथ अतिरिक्त लादन ( जिंद, सल्फर झाईम) खरीदना पड़ता है। ऐसी स्थिति में किसानों को खाद के लिए दोगुना से भी ज्यादा कीमत चुकाना पड़ता है। (पुरेंद्र साहू) For English News : the states.news

