रायपुर, (mediasaheb.com) मुखबिर द्वारा सूचना प्राप्त हुई कि एक संदिग्ध व्यक्ति मोटर सायकल में नीला काले रंग के बैग में वन्यप्राणी से संबंधित सामाग्री बेचने के फिराक में है। वनमंत्री मोहम्मद अकबर, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख छत्तीसगढ राकेश चतुर्वेदी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) नरसिंह राव, क्षेत्रीय उप निदेशक अभिजीत रॉय, मुख्य वन संरक्षक जे. आर. नायक के निर्देश पर वनमंडलाधिकारी रायपुर विश्वेस कुमार के मार्गदर्शन में वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो मध्य क्षेत्र जबलपुर, वाईल्ड लाईफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया, कन्जर्वेशन कोर सोसाइटी व वन विभाग छत्तीसगढ की संयुक्त टीम का गठन किया गया, जिन्होनें तुरंत कार्यवाही करते हुये संदिग्ध व्यक्ति की तलाश शुरू कर दी।
कार्यवाही के दौरान जयस्तम्भ चौक पर एक संदिग्ध व्यक्ति को देखा गया , जिसके पीठ में नीले काले रंग का बैग टंगा हुआ था । टीम ने जाकर उस संदिग्ध व्यक्ति से पूछताछ की व बैग खोलकर दिखाने के लिए कहा, संदिग्ध व्यक्ति ने बैग खोलकर दिखाया। जिसमें एक प्लास्टिक की थैली में अनुसूची-प्रथम के अंतर्गत आने वाला सालखपरी का शल्क (Pangolin Scales) पाया गया जो कि लगभग 3.50 किग्रा था जिसकी अंतराष्ट्रीय मूल्य 05 से 10 लाख रूपये के मध्य है ।
व्यक्ति को पूछताछ के लिए वन परिक्षेत्र कार्यालय पंडरी रायपुर लाया गया । संदिग्ध व्यक्ति ने अपना नाम जितेन्द्र कोचे पिता नरेश कोचे ग्राम देवनदी छिंदवाड़ा, लोहांगी (म.प्र.) बताया व खुद को केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल में उप निरीक्षक व रायपुर एयरपोर्ट में कार्यरत बताया ।
संदिग्ध व्यक्ति द्वारा वन्यजीव से संबंधित सामाग्री को अपने अभिरक्षा में रखने का कोई प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं किया गया तथा उसने इसे बेचने के लिए जहाँ से उसे पकड़ा गया था वहाँ खरीददार की तलाश में घूमते हुए पाया गया । वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 के तहत कार्यवाही करते हुये उसे हिरासत में लिया गया।
पूछताछ के दौरान अपराधी ने सालखपरी शल्क के बिक्री की जानकारी यू-ट्यूब के माध्यम से पाया जाना व खुद को वन्यजीव अपराध के बारे में जानकार बताया। सूत्रों के हवाले से ये जानकारी साझा की गई |

