भिलाई(media saheb.com) | सरकारी स्कूल में पढ़ाने वाले टीचर पिता टीआर चंद्राकर चाहते थे कि बेटी बड़ी होकर डॉक्टर बने। उस वक्त फीस ज्यादा और सैलरी बेहद कम हुआ करती थी। ऐसे में पिता ने अपनी बेटी को पढ़ाने के लिए बैंक से लोन ले लिया। बेटी ने भी पिता के सपनों को अपना बनाकर मेहनत करना शुरू कर दिया। एक साल ड्रॉप के बाद आखिरकार दुर्ग की रहने वाली मधुलिका चंद्राकर श्रीवास्तव का सलेक्शन साल 2004 में सीजी पीएमटी में हो गया। बेटी का सफर यही नहीं थमा बेटी ने पिता का कर्ज अपने काबिलियत से उतारने की ठानी थी, इसलिए रूकी नहीं और पढ़ते चली गई। छत्तीसगढ़ की पहली और देश की 51 महिला आर्थोपेडिक्स सर्जन बनकर पिता को और भी ज्यादा गौरवान्वित कर दिया। जिला अस्पताल जशपुर में अपनी सेवाएं दे रही डॉ. मधुलिका कहती है कि मैंने जीवन में कभी हारना नहीं सीखा था पर मेडिकल एंट्रेस के पहले अटेम्प्ट में असफल हो गई। टॉपर स्टूडेंट होने के नाते ये असफलता इतनी खली कि दो महीने तक डिप्रेशन में रही। किसी तरह पिता और परिवार के लोगों ने समझाया तब जाकर ड्रॉप इयर में दोबारा तैयारी शुरू की। आज जब खुद को इस मुकाम पर खड़ा हुआ देखती हूं तो सोचती हूं कि जीवन में हार का स्वाद भी जरूरी है, क्योंकि हार के बाद ही जीतने का जुनून बड़ जाता है।
बायो था सबसे वीक सब्जेक्ट, सबसे ज्यादा इसी में करनी पड़ी मेहनत
बायो लेने वाले ज्यादातर स्टूडेंट्स का फिजिक्स या फिर कैमेस्ट्री वीक होता है, लेकिन डॉ. मधुलिका को बायो पढऩा खिचड़ी लगती थी। बायो में 60 प्रतिशत पार्ट रटने वाला है, इसलिए बायो को लेकर थोड़ी नर्वस हो जाती थी। मैथ्स पंसदीदा विषय था इसलिए फिजिक्स और कैमेस्ट्री को अपना स्ट्रांग प्वाइंट बनाया। 12 वीं बोर्ड के बाद मैंने पहली बार सीजी पीएमटी दिया था, लेकिन उसमें सलेक्शन नहीं हो पाया। ड्रॉप के लिए बिल्कुल तैयार नहीं था, क्योंकि मुझे पूरा भरोसा था कि पहले प्रयास में ही मेरा सलेक्शन हो जाएगा। रिजल्ट आशा के विपरीत आया तब पापा ने समझाया और कोचिंग ज्वाइन करने के लिए कहा।
सचदेवा में आकर हुआ डिप्रेशन दूर, टीचर्स ने किया मोटिवेट
सचदेवा कॉलेज भिलाई से सीजी पीएमटी की तैयारी करने वाली डॉ. मधुलिका ने बताया कि ड्रॉप इयर में सचदेवा के टीचर्स और डायरेक्टर चिरंजीव जैन सर ने काफी मोटिवेट किया। बायो की वीकनेस भी सचदेवा में आकर दूर हुई। यहां के टीचर्स ने बायो को ड्रायग्राम, निमोनिक्स और इतने मजेदार तरीके से पढ़ाया कि बायो में धीरे-धीरे इंटरेस्ट बढ़ते चला गया। चिरंजीव जैन सर से जब पहले बार मिली तो उन्होंने एक ही बात कहा कि अगर गोल सेट है तो पीछे की हार को देखने की जरूरत नहीं। जो तय किया उसी रास्ते पर आगे बढऩा है। सचदेवा के टेस्ट सीरिज और स्टडी मटेरियल से सीजी पीएमटी में बेहतर परफार्मेंस करने में मदद मिली। यहां का पॉजिटिव माहौल किसी भी बच्चे को निराश नहीं होने देता। पढ़ाई के साथ टीचर्स के फ्रेंडली व्यवहार से डाउट पूछने में झिझक भी नहीं होती।
रिविजन पर करें सबसे ज्यादा फोकस
नीट की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स से कहना चाहूंगी कि आप रिविजन पर ज्यादा फोकस करें। सालभर पढ़ाई के बाद अगले एग्जाम से पहले रिविजन नहीं किया तो सारी पढ़ाई बेकार हो जाएगी। इसलिए रिविजन के लिए पहले से ही टाइम टेबल सेट करके रखें। कोशिश करें कि सुबह जल्दी उठकर पढ़े। सुबह बॉडी का एनर्जी लेवल काफी हाई होता है, इसलिए आप जो भी पढ़ रहे हैं उसे दिमाग जल्दी याद कर लेता है। खुद को मोटिवेट करते रहे। जरूरत पढ़े तो परिवार और टीचर्स की मदद ले अपने आप को मोटिवेट करने के लिए। (the states. news)

