दुर्ग, (mediasaheb.com) जिले में इस वर्ष 36 वां राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा 25 अगस्त से 8 सितंबर तक मनाया जाएगा। इस अभियान का उद्देश्य लोगों में नेत्रदान के महत्व पर जन जागरूकता पैदा करना है और लोगों को मृत्यु के बाद अपनी आंखे दान करने के लिए प्रेरित करना है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. गम्भीर सिंह ठाकुर ने आज नेत्रदान पखवाड़े के प्रति जागरुकता लाने के लिए प्रचार-प्रचार रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने बताया, “जिले में नेत्रदान पखवाड़ा के दौरान जागरूकता के लिए जिला एवं ब्लाक स्तर पर कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। नागरिक नेत्रदान के लिए जिला चिकित्सालय के नेत्र विभाग के सहायक नेत्रदान अधिकारी अरुण सिंह को मोबाइल नंबर 98263-37525 एवं अजय नायक को मोबाइल नंबर 98274-67605 पर संपर्क कर सकते हैं। कोरोना काल में नेत्रदाता को 72 घंटे के पूर्व आरटी पीसीआर कोविड-19 जांच करवाना अनिवार्य है”।
राष्ट्रीय दृष्टि हीनता एवं अल्प दृष्टि नियंत्रण कार्यक्रम के जिला नोडल अधिकारी अंधत्व डॉ. संगीता भाटिया ने बताया, “पखवाड़े के दौरान जिला स्तर एवं ब्लाक स्तर पर नेत्र सहायकों व स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा लोगों का निशुल्क नेत्र परीक्षण किया जाएगा। इस दौरान कोविड-19 को ध्यान में रखते हुए मास्क, सेनेटाइजर व दो गज की दूरी के नियम का पालन भी किया जाएगा। उन्होंने बताया, नेत्रदान पखवाड़े का शुभारंभ करते हुए आज जिला अस्पताल में 14 मोतियाबिंद पीड़ित मरीजों का ऑपरेशन किया गया। वहीं नेत्रदान के लिए 48 लोगों ने फार्म भी जमा किए। इस संबंध में नेत्र सहायक अधिकारियों की बैठक मंगलवार को आयोजित की गई। डॉ. भाटिया ने बताया, नेत्रदान के लिए दान कर हाल में 6 घंटे के अंदर हो जाना चाहिए। इस बीच मृतक के आंख को बंद रखना है। आंख को गीला रुई या कपड़ा से ढकना है यदि बर्फ हो तो उसे कपड़े या रुई के ऊपर रख दे। पंखा व कूलर को बंद कर देना चाहिए”।
नेत्रदान के संबंध में जिले के वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ. बीआर कोसरिया ने बताया, “जिनकी नजर बिल्कुल कम है या फिर जिनकी नजर दो फीट या तीन फीट है। आंखों में सफेदी आ गयी है, एक आंख पूरी तरीके से नजर नहीं आ रही और दूसरे आंख में भी नजर बहुत खराब हो। उन्हें इस नेत्रदान पखवाड़े के दौरान जिला अस्पताल में नेत्र की जांच करानी चाहिए। ताकि समय पर सम्पूर्ण इलाज किया जा सके। जिन रोगियों को सुगर की बीमारी पांच वर्ष से अधिक हो गया हो उनके रेटिना की जांच के लिए जिला अस्पताल में भेजने के लिए नेत्र सहायक अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ताकि समय रहते डायबिटिक रेटिनोपैथी जैसे गंभीर रोग से बचाया जा सके”।
मृत्यु के 6 घंटे के अंदर नेत्रदान होना जरुरी –
नेत्र सर्जन डॉ. कोसरिया ने नेत्रदान का तरीका बताते हुए कहा, “नेत्रदान मृत्यु के 6 घंटे के अंदर हो जाना चाहिए। नेत्रदान की सुविधा घर पर भी निशुल्क दी जाती है। यदि किसी व्यक्ति के द्वारा जीवन में नेत्रदान की घोषणा न की गई हो, फिर भी रिश्तेदार मृत व्यक्ति का नेत्रदान कर सकते हैं। नेत्रदाता को मृत्यु पूर्व एड्स, लेप्रोसी, आत्महत्या में होने वाली मौत, पीलिया, कर्करोग (कैंसर), रेबीज सेप्टीसीमिया टिटनेस, हेपेटाइटिस तथा सर्पदंश जैसी बीमारी है तो उसके नेत्रदान के लिए अयोग्य माने जाते हैं। मोतियाबिंद से नेत्र का ऑपरेशन पश्चात तथा चश्मा पहनने वाले व्यक्ति भी नेत्रदान कर सकते हैं। नेत्रदान के लिए 10 साल से 75 साल की उम्र का कोई भी लिंग का व्यक्ति नेत्रदान में योगदान दे सकता है। मधुमेह (डायबिटीज) के मरीज भी नेत्रदान कर सकते हैं। विकासशील देशों में प्रमुख रूप से दृष्टिहीनता स्वास्थ्य समस्याओं में से एक बड़ी समस्या है”।

