एक साल में एक साथ तीन मेडिकल एंट्रेस क्वालिफाई करने वाले ये हैं भिलाई के डॉ. अनूप
भिलाई. (media saheb.com) कहते हैं माता-पिता की सीख जीवन भर काम आती है। कुछ ऐसा ही हुआ छत्तीसगढ़ के जाने-माने न्यूरो फिजिशियन डॉ. अनूप गुप्ता के साथ। वे बचपन से अपने डॉक्टर माता-पिता को लोगों का इलाज करते देखते थे। जब कोई बीमार ठीक होकर उन्हें थैंक्यू बोलकर जाता था तो वो भावुक हो जाते थे। माता-पिता की मानवता के प्रति सेवा ने बेटे के मन को ऐसा छुआ कि आज बेटा भी डॉक्टर बनकर लोगों को क्वालिटी लाइफ दे रहा है। स्टूडेंट लाइफ में परीक्षा में कम नंबर आने से डरने वाले डॉक्टर अनूप गुप्ता कहते हैं निराशा में ही आशा की किरण छिपी होती है। यही सोचकर मेहनत करते चला गया। 12 वीं बोर्ड के बाद एक साल ड्रॉप लेकर न सिर्फ सीजी पीएमटी बल्कि एमपी पीएमटी और सीबीएसई पीएमटी तीनों एंट्रेस में एक साथ सलेक्ट हो गया।
पढ़ाई में नहीं किया कॉम्प्रोमाइज
डॉ. अनूप गुप्ता ने मेडिकल की तीन एंट्रेस एग्जाम क्लीयर करने के बाद रायपुर मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई की है। बीएचयू से एमडी मेडिसीन की पढ़ाई करने वाले डॉ. गुप्ता ने बताया कि एक साल के ड्रॉप के लिए उन्होंने अपना रूटीन टाइम टेबल बनाया था। जिसके हिसाब से पढ़ाई करते थे। यही कारण है पढ़ाई से कभी कॉम्प्रोमाइज नहीं किया। टेस्ट सीरिज में जब कम नंबर आते थे तो बुरा लगता था। कई बार खुद की काबिलियत पर शक भी होता था कि मैं सलेक्ट हो पाऊंगा या नहीं पर इन बातों को कभी दिमाग पर हावी नहीं होने दिया। अगले टेस्ट में पूरी तैयारी के साथ उतरने की कोशिश करता था। खुद को हमेशा पॉजिटिविटी से भरकर रखता था। असफलता के लिए भी खुद को मेंटली तैयार किया था। ताकि अगले साल दोगुनी मेहनत से सफल हो सकूं।
टीचर्स और जैन सर ने किया बहुत सपोर्ट
2001 में सीजी पीएमटी क्वालिफाइड करने वाले डॉ. अनूप ने बताया कि उन्होंने 12 वीं बोर्ड के बाद सचदेवा न्यू पीटी कॉलेज को कोचिंग के लिए चुना। उस वक्त सचदेवा मेडिकल एंट्रेस के लिए बेस्ट कोङ्क्षचग के रूप में फेमस था और आज भी है। यहां के टीचर्स और डायरेक्टर चिरंजीव जैन सर हर बच्चों को पर्सनली ट्रीट करते थे। चाहे कोई डाउट हो या लाइफ की कोई परेशानी वो हर हाल में बच्चों को सपोर्ट करते हुए आगे बढऩे के लिए प्रेरित करते थे। सचदेवा में पढ़ाई का माहौल इतना अच्छा था कि वक्त कैसे गुजरा पता नहीं चला। जब कभी निराश होता तो जैन सर की प्रेरणादायक बातें सुनकर अपने आप नेगेटिविटी दूर हो जाती थी। पढ़ाई के साथ ऐसा खुशनुमा माहौल कोचिंग में रहता था कि बाहर निकलकर इंटरटेनमेंट के साधन ढूंढने की जरूरत ही नहीं पड़ी। मोबाइल, इंटरनेट के दौर से दूर उस वक्त यहां के नोट्स और बुक्स की बदौलत सफलता के करीब पहुंच पाया।
पेशेंट की मुस्कुराहट से मिलता है जॉब सेटिसफेक्शन
फेमस न्यूरो फिजिशियन होने के बाद छत्तीसगढ़ के भिलाई को प्रैक्टिस के लिए चुनने वाले डॉ. अनूप कहते हैं कि आपने जो कॅरियर चुना है उसका जॉब सेटिसफेक्शन बहुत जरूरी है। जब दर्द में तड़पते लोगों को इलाज से राहत मिलता है वो एक नई जिंदगी में कदम रखते हैं, उस वक्त उनकी मुस्कुराहट देखकर खुद के डॉक्टर होने पर गर्व होता है। ये लम्हा इतना खास होता है जिसे पैसों से नहीं खरीदा जा सकता। अपने लोगों की सेवा करने से बड़ा कोई धर्म नहीं है।
इसलिए बड़े शहरों और लाखों के पैकेज की बजाय अपनों के बीच रहकर उनके लिए कुछ बेहतर करने का प्रयास कर रहा हूं। जो बच्चे इस साल नीट की तैयारी कर रहे हैं उनसे यही कहूंगा कि बिल्कुल हताश मत होइए, अगर सलेक्शन नहीं हुआ तो एक साल और ड्रॉप लेने के लिए खुद को तैयार कीजिए, लेकिन कोशिश करना कभी नहीं छोडऩा। अपने गोल पर हमेशा फोकस रहकर पढ़ाई करेंगे तो एक दिन सफलता जरूरी मिलेगी।

