शाजापुर नगर में प्रवेश के उपरांत श्री सिंधिया ने मॉ राज राजेश्वरी मंदिर में जाकर पूजा अर्चना की।
इंदौर, (media saheb.com)। केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आशीर्वाद यात्रा के बहाने भाजपा के गढ़ मालवा निमाड़ में न केवल अपनी ताकत दिखाई बल्कि इस क्षेत्र के भाजपा के दिग्गजों को भी संदेश दे दिया कि उन्हें कमतर न आंका जाए। वैसे मालवा निमाड़ में सिंधिया परिवार का कई पीढ़ियों से दखल रहा है और इस अंचल ने सिंधिया परिवार के हर सदस्य चाहे वो राजमाता हो, माधवराव हो या ज्योतिरादित्य सभी को दिल से प्यार दिया है। यह भावना उस समय और फलीभूत हो गई जब
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शाजापुर जिले के मक्सी में जन आशीर्वाद यात्रा में कहा कि, मेरा मालवा ओर मक्सी क्षेत्र से बहुत पुराना रिश्ता है 200 से 250 साल पुराना है मेरी स्व दादी ओर मेरे पूज्य स्व पिताजी से मालवा के लोगो का बहुत ही भावनात्मक रिश्ता रहा है ,ओर मैं मालवा क्षेत्र के लोगोंके सुख दुःख में हमेशा साथ रहूँगा। उनका यह अंदाज ही लोगों के दिल में उनके लिए जगह बना देता है। हर कार्यकर्ता को उसके नाम से बुलाने की उनकी अदा उन्हें महाराज की छवि से जुदा एक परिपक्व राजनेता बना देती है।
एक साल पहले अपने समर्थक कई विधायकों के साथ कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल होकर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने प्रदेश में भाजपा की सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी। प्रदेश के इतिहास में पहली बार हुए सियासी ड्रामे के बाद ना जाने कितने कहानियां किस्से गढ़े गए मगर भाजपा संगठन ने भविष्य की जो योजना तैयार की उसकी भनक किसी को नहीं लगी। पहले सिंधिया को केंद्रीय मंत्रीमंडल में स्थान देकर पार्टी ने सम्मान बढ़ा दिया। अब उनकी आशीर्वाद यात्रा के जरिए एक नया नेतृत्व खास कर मालवा निमाड़ में खड़ा करने के संकेत पार्टी ने दे दिए। यह सब सूबे के मौजूदा क्षत्रपों के लिए असहनीय तो है मगर कुछ करने जैसा इन क्षत्रपों के पास है नहीं। तीन दिवसीय आशीर्वाद यात्रा की शुरूआत में ही सिंधिया ने अपना वजूद दिखा दिया। यात्रा की तैयारी संगठन ने इस तरह अंजाम दिया कि हर नेता सिंधिया के पीछे चलने को मजबूर हो गया। यानी 4 लोकसभा सीटों के 33 विधानसभा क्षेत्र में 584 किलोमीटर की इस यात्रा में सिंधिया का अंचल के क्षत्रपों पर प्रभुत्व स्थापित हो गया है इसमे कोई शंका नहीं। यात्रा के दौरान प्रदेश सरकार के कई मंत्री और विधायक सिंधिया के साथ साथ चले।
नए जनाधार को प्राप्त करना लक्ष्य
कोरोना संक्रमण के बीच प्रदेश में शुरू हुई सियासी उठापटक ने ना सिर्फ सियासतदारों को बल्कि आम नागरिकों को भी खासा हैरान किया था। एक तरफ महामारी से निपटने की चुनौती थी दुसरी तरफ राजनीति में शह और मात के खेल चल रहे थे। नए दल में सिंधिया और उनके समर्थकों को क्या वजूद रहेंगा इसको लेकर कयास बराबर लगते रहे। बहरहाल भाजपा ने सिंधिया समर्थकों को पुरस्कृत करने में कोई कमी नहीं की। हाल ही में हुए संगठन परिवर्तन में भी इनके साथियों को शामिल कर भाजपा नेतृत्व ने बता दिया कि कांग्रेस छोड़कर आए इन नेताओं को पार्टी में बराबर सम्मान दिया जाएगा। केंद्रीय मंत्री बनाए जाने के बाद संगठन ने इस यात्रा का प्रारूप तैयार किया तब समझ आया कि तैयारी अगले विधानसभा चुनाव की है और निशाने पर मालवा निमाड़ है, जहां खोए जनाधार को दोबारा प्राप्त करना पार्टी का लक्ष्य है।
बड़े नेताओं ने भी खाए भीड़ में धक्के
केंद्रीय मंत्री बनने के बाद पहली बार इंदौर आए ज्योतिरादित्य सिंधिया के स्वागत में पुराने रिकार्ड टूटते नजर आए। सिंधिया समर्थक ही नहीं भाजपा कार्यकर्ताओं में भी उनसे मिलने और स्वागत की होड़ मची थी। हर नेता शक्ति प्रदर्शन करने को आमदा था। कोरोना प्रोटोकॉल को तो नेताओं ने ताक पर रख दिया। लंबे समय बाद इंदौर विमानतल पर इतनी बड़ी तादाद में नेताओं और कार्यकर्ताओं का जमावड़ा देखा गया। भारी भीड़ और धक्का मुक्की की स्थिति यह थी कि पुलिस को व्यवस्था संभालने में पसीने छूट गए। खास बात यह थी कि भाजपा के वो नेता भी इस भीड़ में धक्के खाते नजर आए जो अब तक वीवीआईपी तरीके से नेताओं की आगवानी करते रहे है। इनमे कैलाश विजयवर्गीय भी शामिल थे जो बमुश्किल सिंधिया तक पहुंच पाएं।
आशीर्वाद यात्रा में भाजपा ने निमाड़ याने खरगोन जिले में भी अपनी ताकत दिखाने की भरपूर कोशिश की। गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव में इसी जिले में भाजपा को करारी शिकस्त झेलना पड़ी है। सिंधिया ने खरगोन जिले के रावेरखेड़ी गांव में बाजीराव पेशवा की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस दौरान सिंधिया ने 128 किलोमीटर तक रोड़ शो भी किया। इस रोड़ शो की भाजपा ने व्यापक तैयारी की थी।
कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि कांग्रेस में रहकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को जी भरकर कोसने वाले कांग्रेसी सिंधिया का हावभाव और जुबान भाजपा में शामिल होते ही भाजपा के रंग में न केवल रंग गई है बल्कि कई मामलों में तो उन्होंने वर्षों से रहे भाजपाई दिग्गजों को भी पीछे छोड़ दिया है। इसी के चलते उनके समर्थक कह रहे है कि अभी तो ये शुरुआत है आगे आगे देखिए होता है क्या….|(विनोद श्रीवास्तव) For English News : the states.news

