रायपुर (mediasaheb.com)| छत्तीसगढ़ राज्य की वित्तीय स्थिति के बारे में सरकार और विपक्ष अलग- अलग दावे करते रहे हैं। विपक्ष के आरोपों के जवाब में कांग्रेस सरकार ने विधानसभा में राज्य की वित्तीय स्थिति की तस्वीर साफ कर दी है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बताया कि उत्तर प्रदेश, गुजरात जैसे बड़े और पुराने राज्यों की तुलना में छत्तीसगढ़ को कम ऋण लेना पड़ा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चूंकि उनकी सरकार ने लोगों को नौकरी दी है, इसलिए स्वाभाविक रूप से राज्य का स्थापना व्यय भी बढ़ा है। सरकार को राज्य की वित्तीय सेहत के साथ विकास की चिंता है, यह सीएम ने स्पष्ट कर दिया है। विधानसभा में विपक्ष को जवाब देते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि राज्य सरकार जन सेवा, जतन, सरोकार’ और गढ़बो नवा छत्तीसगढ़’ इन दो ध्येय वाक्यों को लेकर चल रही है। हमने एक ओर जहां जनता को जल्दी से जल्दी राहत पहुंचाने पर जोर दिया है, वहीं दूसरी ओर उन्हें प्रदेश के विकास में भागीदार बनाने के हरसंभव उपाय कर रहे हैं।
वर्ष 2018 में जिन हालात में कराहता हुआ छत्तीसगढ़ मिला था, उसकी याद करके भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं। हमने तीन वर्षों में बहुत से बड़े-बड़े बदलाव लाए हैं, जिसके कारण छत्तीसगढ़ की जनता को राहत भी मिली और सशक्तीकरण भी हुआ। सरकार ने गोधन योजना से जोड़ कर कई काम शुरू किए, जिससे निश्चित रूप से रोजगार के मौके बढ़े हैं और लोगों को लघु उद्योग प्रारंभ करने का भी मौका मिला है। इसमें यह भी देखना होगा कि योजना राज्यभर में सफलता पूर्वक संचालित हो रही है या नहीं। किसी भी राज्य के लिए खनिज संपदा महत्वपूर्ण होती है और कांग्रेस सरकार का दावा है कि बहुत ही पारदर्शी नीतियों और योजनाएं बनाई हैं, जिसके कारण एक ओर जहां खनिज राजस्व में तेजी से वृद्धि हो रही है वहीं दूसरी ओर इनका लाभ स्थानीय निवासियों को मिल रहा है। राज्य के समग्र विकास में हमारे खनिज संसाधन का समुचित उपयोग किया जा रहा है। खनिज राजस्व में उत्तरोत्तर वृद्धि हो रही है।
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि खनिज राजस्व के रूप में राज्य शासन को वित्तीय वर्ष 2020-21 में 5 हजार 517 करोड़ रुपए प्राप्त हुआ। वित्तीय वर्ष 2021-22 में अप्रैल से दिसम्बर, 2021 तक की स्थिति में निर्धारित लक्ष्य 7 हजार 800 करोड़ रुपए के विरूद्ध 8 हजार 200 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हो चुका है। इस तरह वित्तीय वर्ष के अंत तक लगभग 11 हजार 900 करोड़ रुपए का खनिज राजस्व प्राप्त होने का अनुमान है। जिला खनिज निधि के उपयोग पर काफी समय से विवाद होता रहा है। राज्य सरकार ने इसका अधिकार मंत्रियों को दे दिया था, मगर केंद्र सरकार ने वापस कलेक्टरों को इसे खर्च करने का अधिकार दिया है। इसके जवाब में सीएम ने बताया कि हमने डीएमएफ के सदुपयोग की दिशा में गंभीर कदम उठाए हैं। डीएमएफ का उपयोग अब खनन संक्रियाओं से प्रभावित व्यक्तियों एवं क्षेत्र के विकास हेतु किया जा रहा है। हमारी सरकार आने के बाद डीएमएफ के अंशदान से जिलों के कुपोषण दर कम करने, स्वास्थ्य, शक्षिा गुणवत्ता बढ़ाने, कृषि, प्रसंस्करण को बढ़ावा, रोजगार एवं हितग्राही मूलक कार्य प्राथमिकता पर स्वीकृत हो रहे है।
वित्तीय वर्ष 2021-22 में अप्रैल से दिसम्बर, 2021 तक डीएमएफ मद में अंशदान के रूप में 2 हजार 20 करोड़ रुपए की राशि प्राप्त हो चुकी है। डीएमएफ से अंशदान के रूप में वर्ष 2015 से अब तक कुल 8 हजार 35 करोड़ रुपए की राशि प्राप्त हो चुकी है। हर सरकार में जनता अपनी समस्याओं के निराकरण नहीं होने को लेकर परेशान रहती है, उम्मीद की जा रही है कि कांग्रेस सरकार इस पर संवेदनशील रूख अपनाएगी। मुख्यमंत्री ने इसक जवाब में बताया है कि राज्य शासन की प्राथमिकता वाली योजनाओं की मॉनीटरिंग हेतु ऑनलाइन एडवांस प्लेटफॉर्म मुख्यमंत्री सीजी कैम्प पोर्टल’ विकसित किया गया है। इस पोर्टल में प्रमुख फ्लैगशिप योजनाओं को शामिल किया गया है। जैसे गोधन न्याय योजना, मुख्यमंत्री हाट-बाजार क्लीनिक योजना, मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान, सीजी ई-्ट्रिररक्टि, मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना, नरवा, गरुवा, घुरुवा, बाड़ी योजना की ऑनलाइन मॉनीटरिंग इसी पोर्टल के माध्यम से की जा रही है।
सरकारी दफ्तरों तथा लोकसेवकों की जवाबदेही तय करते हुए लोकसेवा केन्द्रों को सक्षम बनाया है, जिनके माध्यम से इस वर्ष 25 लाख 21 हजार से अधिक नागरिक विभिन्न शासकीय सेवाओं से लाभान्वित हुए हैं। वर्तमान में विभिन्न विभागों की 132 सेवाएं ऑनलाइन रूप से उपलब्ध हैं। इस योजना के माध्यम से अभी तक 172 लाख 86 हजार से अधिक ऑनलाइन आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 161 लाख 66 हजार आवेदन निराकृत हो चुके हैं। सरकार को चाहिए कि वह सिटीजन चार्टर को गंभीरता से लागू करवाए, जिससे जनता के प्रकरणों का निराकरण समयसीमा के भीतर ही हो जाए। अन्यथा जनता हमेशा की तरह जूझती रहेगी। सरकार की ऑनलाइन पढ़ाई और गोधन योजना को देशव्यापी स्तर पर सराहा गया है, केंद्र सरकार ने इन योजनाओं को अपनी पुस्तिका में जगह दी है। इसे कांग्रेस सरकार अवश्य ही अपनी उपलब्धि मान सकती है।


