छत्तीसगढ़ में एक हफ्ते तक सरकारी दफ्तरों में कामकाज ठप्प

Work in government offices stalled in Chhattisgarh for a week

रायपुर, (mediasaheb.com)।त्तीसगढ़ में आज से एक हफ्ते तक सरकारी दफ्तरों में कामकाज ठप्प है । लगभग 5 लाख अधिकारियों-कर्मचारियों की कलम बंद हड़ताल रहेगी। तीन सूत्रीय मांगों के लेकर छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन की तरफ से 25 से 29 जुलाई तक कलमबंद हड़ताल की जा रही है ।इसके बाद 30 जुलाई शनिवार और 31 जुलाई रविवार को अवकाश है। इस प्रकार पूरे हफ्ते शासकीय कार्यालयों में कामकाज ठप रहेगा।

भाजपा सांसद संतोष पांडेय ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पत्र लिखकर केंद्र के समान महंगाई भत्ता देने की मांग की है। सांसद की ओर से लिखे गए पत्र में कहा गया है कि केंद्र सरकार 34 प्रतिशत महंगाई भत्ता दे रही है, जबकि राज्य कर्मचारियों को मात्र 22 प्रतिशत ही मिल रहा है। यह केंद्र की तुलना में काफी कम है और कर्मचारियों को नुकसान हो रहा है। इसलिए राज्य कर्मचारियों के हित को देखते हुए केंद्र के बराबर भत्ता प्रदान करें।

कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन की 3 सूत्रीय मांगों में प्रदेश के अनियमित कर्मचारियों को नियमित किए जाने की मांग है। दूसरी मांग महंगाई भत्ता और तीसरी मांग गृह भाड़ा भत्ता बढ़ाने की है। फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा, महासचिव आर. के. रिछारिया, सचिव राजेश चटर्जी, कोषाध्यक्ष सतीश मिश्रा, प्रवक्ता बीपी शर्मा, संगठन मंत्री संजय सिंह ने बताया कि केंद्र शासन ने 1 जनवरी 2019 के 12 प्रतिशत महंगाई भत्ता में 5 फीसदी बढोत्तरी कर 1 जुलाई 2019 से 17 फीसदी घोषित किया था। लेकिन राज्य शासन ने 1 जुलाई 2021 से महंगाई भत्ता में 5 फीसदी बढ़ोत्तरी किया था। जिसके कारण 1 जुलाई 2019 से 30 जून 2021 तक प्रदेश के कर्मचारी अधिकारियों के मासिक वेतन में 5 फीसदी का कटौती हुई है।

उन्होंने बताया कि केन्द्र सरकार ने 1 जनवरी 2020 का 4 प्रतिशत , 1 जुलाई 2020 का 3 % और 1 जनवरी 2021 का 3 % कुल 11 % डीए में वृद्धि अथार्त 17 प्रतिशत से 28 प्रतिशत की वृद्धि को प्रभावशील किया था। उन्होंने बताया कि केंद्रीय कर्मचारियों को फिलहाल 34 प्रतिशत डीए मिल रहा है। जबकि राज्य में डीए 22 फीसदी है. जोकि 1 मई 22 से प्रभावशील किया गया है। जिसके कारण राज्य के कर्मचारी-अधिकारी के मासिक वेतन में 12 फीसदी की कटौती हो रही है।

गृहभाड़ा भत्ता स्वीकृति के मामले में राज्य सरकार कर्मचारी-अधिकारियों का आर्थिक शोषण कर रही है। उन्होंने बताया कि राज्य में 1/1/2016 से सातवां वेतनमान लागू हो गया था।लेकिन कर्मचारी-अधिकारियों को आज तक छठवें वेतनमान के मूलवेतन पर 10 फीसदी और 7 फीसदी के दर से एचआरए दिया जा रहा है। जबकि केन्द्र में 18 फीसदी और 9 फीसदी है।(हि.स.)