पढ़ाई डिस्टर्ब न हो इसलिए नहीं बनाए फ्रेंड्स, फैमिली फंक्शन से भी कर लिया था किनारा
भिलाई. (mediasaheb.com)हिंदी मीडियम स्टूडेंट की काबिलियत पर परिवार को इस कदर भरोसा था कि वे चाहते थे बेटी बड़ी होकर डॉक्टर बने। इसलिए 12 वीं बोर्ड के बाद लाडली बेटी की भविष्य की खातिर उसे कोचिंग के लिए दूसरे शहर भेज दिया। बेटी भी परिवार के सपनों को साकार करने में कहां पीछे हटने वाली थी। पढ़ाई डिस्टर्ब न हो इसलिए पीजी में रहकर भी किसी को फ्रेंड नहीं बनाया और न ही कोई फैमिली फंक्शन अटेंड करती थी। ये कहानी है राजनांदगांव निवासी डॉ. कविता वर्मा की जिन्होंने दो साल ड्रॉप के बाद साल 2008 में सीजी पीएमटी क्वालीफाई किया और एमबीबीएस करने के बाद पीजी रायपुर मेडिकल कॉलेज से करके आज एमडी डायग्नोस्टिक के रूप में आदिवासी अंचल बस्तर में अपनी सेवाएं दे रही हैं। डॉ. कविता कहती है कि परिवार बच्चों के सपनों को पूरा करने के लिए बहुत बड़ी कुर्बानी देता है ऐसे में हमारा भी कर्तव्य बनता है कि कड़ी मेहनत से उनका भरोसा जीतें और सफलता का तोहफा दें।
फिजिक्स में होती थी बहुत दिक्कत
डॉ. कविता ने बताया कि सरकारी स्कूल से पढऩे के कारण उनका बेसिक उतना स्ट्रांग नहीं था। शुरुआत में फिजिक्स में बहुत दिक्कत होती थी। पहले साल तो फिजिक्स को पढ़ते-पढ़ते कई बार निराश हो जाया करती थी। मन में सोचती कैसे मेडिकल एंट्रेंस क्वालीफाई कर पाऊंगी। सचदेवा के नोट्स की बदौलत धीरे-धीरे ये मुश्किल राह भी आसान हो गई। पहले ड्रॉप ईयर में कड़ी मेहनत के बाद भी असफलता हाथ लगी ऐसे में मैंने दूसरे ड्रॉप में सेल्फ स्टडी करने का निर्णय लिया। ये ऐसा कठिन वक्त था जिसके लिए परिवार से ज्यादा मुझे खुद को मेंटली तैयार करना पड़ा। घर में तैयारी के दौरान मैं किचन का कुछ भी काम नहीं करती थी बस 12 से 14 घंटे की पढ़ाई में फोकस करती थी। घर वालों ने भी बहुत सपोर्ट किया।
सचदेवा आकर कभी महसूस नहीं हुई घर की कमी
पहली बार अकेले घर से बाहर पढऩे के लिए निकलने वाली डॉ. कविता कहती हैं कि सचदेवा न्यू पीटी कॉलेज में आकर कभी घर की कमी महसूस नहीं हुई। यहां के टीचर्स ने इतना सपोर्ट किया कि मैं हारने के बारे में कभी सोचती ही नहीं थी। जब पहले साल सलेक्शन नहीं हुआ उस वक्त थोड़े डिप्रेशन में जरूर थी तब सचदेवा के डायरेक्टर चिरंजीव जैन सर ने काउंसलिंग करते हुए कहा कि तुम एक साल और दो और देखना उसके बाद जीवन का गोल्डन समय शुरू हो जाएगा। उनकी बातें सुनकर दूसरे साल ड्रॉप में खुद को कभी डिमोटिवेट होने नहीं दिया। सचदेवा का टेस्ट सीरीज और यहां का स्टडी मटेरियल सच में बहुत ही अच्छा है।
मेहनत नहीं छोडऩा हैनीट की तैयारी करने वाले स्टूडेंट्स से कहना चाहूंगी कि परिस्थितियां कितनी भी विपरीत क्यों न हो आपको मेहनत करना नहीं छोडऩा चाहिए। कभी डिप्रेशन में जाएं तो अच्छी किताबें और सक्सेस स्टोरी पढ़कर खुद को मोटिवेट करें। रिविजन जरूर करें। हम साल भर कितना भी पढ़ लें अगर रिविजन नहीं किया तो सब कुछ बर्बाद हो जाएगा।


