दस- कदम तक भी न चल पाने वाला बुजुर्ग सर्जरी के चौथे दिन ही बिना किसी सहारे चलने लगा…..
रायपुर(mediasaheb.com) 87 वर्षीय बुजुर्ग को लंबे समय से दोनों घुटनों में असहनीय दर्द था| जब उन्हें इलाज के लिए एनएच एमएमआई नारायणा मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल लाया गया तो शुरुआती जांचों में चिकित्सक ने पाया कि उसके दोनों घुटनों की हड्डी पूरी तरह से चिकनी व खराब हो चुकी है|
लेकिन एनएच एमएमआई नारायणा के अनुभवी चिकित्सकों और प्रशिक्षित फिजियोथेरेपी टीम (#Team ) की मदद से सर्जरी के मात्र 4 दिन में ही अपने पैरों से चल पा रहा है |
ऑस्टियोआर्थराइटिस से पीड़ित मरीज के संबंध में जानकारी देते हुए NH-MMI नारायणा मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल (#Hospital ) के हड्डीरोग एवं जोड़ प्रत्यारोपण विशेषज्ञ डॉ अंकुर गुप्ता ने बताया कि ऑस्टियोआर्थराइटिस का मतलब है घुटने के जोड़ का बूढ़ा होना|
हमारा घुटना जांघ की हड्डी (फीमर) एवं पैर की हड्डी (टिबिया) से बना होता है, इन दोनों हड्डियों के 1चिकना लचीला एवं रबर जैसा कार्टिलेज लगा होता है, जो दोनों हडडियों के बीच 1 गद्दे की तरह काम करता है और जोड़ को आसानी से मुड़ने में मदद करता है. उम्र के साथ धीरे-धीरे यह कार्टिलेज घिसता चला जाता है, और हइडियों के बीच के घर्षण को रोकने की इसकी क्षमता कम हो जाती है|
कार्टिलेज के इस प्रकार से घिसकर पतले होने को ही चिकित्सकीय भाषा में ऑस्टियोआर्थराइटिस कहा जाता है|एनएच एमएमआई नारायणा मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल (#Hospital ) के सीनियर मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. अलोक स्वाइन ने बताया NH-MMI नारायणा सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल (#Hospital ) के हड्डी रोग एवं जोड़ प्रत्यारोपण विभाग में कुशल एवं अनुभवी चिकित्सकों के साथ ही नवीनतम मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर, प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ एवं सर्वसुविधायुक्त फिजियोथेरेपी विभाग की सुविधा उपलब्ध है, जिनकी मदद से जोड़ प्रत्यारोपण सर्जरी के मात्र छे दिनों बाद ही मरीज अपने पैरों पर चलकर घर जा पाते हैं|
कांफ्रेंस में नारायणा हेल्थ वेस्ट जोन के रिजनल डायरेक्टर, अरुणेश पुनेथा, सीनियर मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. अलोक स्वाइन, डॉ. अंकुर गुप्ता, एजीएम मार्केटिंग (#A_G_M_Marketing ) रवि कुमार भगत उपस्थित थे|
NH-MMI नारायणा सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल अगस्त 2011 में तब अस्तित्व में आया| पहले से स्थापित 56 बेड हॉस्पिटल (#Hospital ) को अत्याधुनिक उपकरण, सुविधओं, नवीनतम ऑपरेशन थिएटर और चिकित्सकीय कौशल से संयुक्त 157 बेड क्षमता वाले हॉस्पिटल में रूपान्तरित किया गया|
आज हॉस्पिटल की क्षमता 250 बेड की है, जो आज भी मध्यभारत का अग्रणी हॉस्पिटल बना हुआ है ,जो हृदयरोग, मष्तिस्क विज्ञान, गर्दारोग और हड्डीरोग जैसे क्षेत्रों में विस्तृत एवं उत्कृष्ट सेवाएं दे रहा है|


