बिलासपुर (mediasaheb.com)| मित्रों, मै सुभाष भक्त हु , इसलिए हो सकता है, मेरे विचार और विश्लेषण में आप को भक्तिरस टपकता दिखाई दे.. पर जो तथ्य है, वे इतने ठोस है कि उनका कोई भी वैचारिक विरोधी उसे काट नहीं सकता ।
1# सुभाष चाहते थे कि देश जब स्वतंत्र हो तो कम से कम 15 वर्ष तक कोई चुनाव न हो , देश की जनता को परिपक्व बनाया जाए , देश के हित में जो कड़े किन्तु अलोकप्रिय कदम उठाना हो , वे उठाए जाए वे स्वतंत्रता के पश्चात कुछ वर्ष तक देश में अधिनायकवाद चाहते थे आज देश को स्वतंत्र हुए इतने वर्ष हो गए , आज भी बहुत सारे इलाके देश में ऐसे है , जहां पांच सौ की पत्ती और दारू की बॉटल चुनाव का नतीजा तय करती है । आगामी चुनाव में हार के डर से कोई भी नेता कड़े , अलोकप्रिय फैसले लेने से डरता है । सुभाष जी का यथार्थ वाद यही है
2 # सुभाष चाहते थे हिन्दी , जिसे उस दौर में हिंदुस्तानी कहा जाता था और अन्य सभी भारतीय भाषाएं अपनी लिपि के अतिरिक्त रोमन लिपि में भी लिखा जाए आज मोबाइल में आप टाइप करते समय वही करते हो , जो सुभाष बाबू ने वर्षो पहले कहा था रोमन लिपि में हिन्दी लिखने से वो न केवल भारत में यूरोप में भी स्वीकार्य हो जाती ।
भारत की भाषाओं में भी आदान-प्रदान आसान हो जाता लिपि में भिन्नता होने के कारण , हम भारत की इन समृद्ध भाषाओं को नहीं सीख पाते है। उदाहरण के लिए यदि बांग्ला में कुछ लिखा हो तो , आप नही नहीं पढ़ सकते किन्तु यदि उसे रोमन लिपि में लिख दिया जाय तो आप उसे पढ़ लेंगे । अंग्रेजी बहुत ही सरल है केवल छब्बीस अक्षर में सब कुछ लिखा जा सकता है। पर यहां सुभाष बाबू की दूरदर्शिता को स्वीकार नहीं किया गया , उन्होंने कभी ये नहीं कहा था कि भारत की भाषाएं अपनी अपनी अपनी लिपि छोड़ दे उन्होंने रोमन लिपि को वैकल्पिक रूप से स्वीकार करने के लिए कहा था कोई भी भारतीय रोमन लिपि में लिखा पढ़ सकता है , चाहे उसे उसका अर्थ पूरा न समझे चाहे वो ओड़िया हो , तमिल हो , पंजाबी हो या हिन्दी इस से वैमनस्यता दूर होती , भारत में हम अधिक से अधिक भाषाएं आसानी से सीख पाते।
3# वे लिंग भेद के सख्त विरोधी थे , उनका मानना था कि स्त्री , पुरुषों से कही भी कमतर नहीं है उन्होंने पूरी की पूरी एक रेजीमेंट का गठन किया जिस में नेतृत्व से लेकर सिपाही तक सब महिलाएं थी रानी। लक्ष्मी बाई रेजिमेंट तो सुभाष जी , हमारे महानायक इतने महान थे कि , वो अपने समय से सौ वर्ष आगे की सोच समझ रखते थे अब भाई! हम ठहरे उनके कट्टर समर्थक आप सब बताए सुभाष जी के विचार सही थे या गलत *डॉ संजय अनंत©*


