“सामाजिक अनुप्रयोगों के लिए उन्नत कार्यात्मक सामग्री” विषय पर किया
रायपुर,(mediasaheb.com) | कलिंगा विश्वविद्यालय, रायपुर ने अपने आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) के माध्यम से 5 जनवरी से 10 जनवरी 2026 तक “सामाजिक अनुप्रयोगों के लिए उन्नत कार्यात्मक सामग्री” विषय पर छह दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम (FDP) का सफल आयोजन किया। यह कार्यक्रम AICTE प्रशिक्षण एवं अधिगम (ATAL) अकादमी द्वारा प्रायोजित था तथा IEEE एजुकेशन सोसाइटी, मध्य प्रदेश चैप्टर के सहयोग से आयोजित किया गया।
दिनांक 5 जनवरी 2026 को आयोजित उद्घाटन सत्र विशिष्ट गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति से सुशोभित हुआ। डॉ. आर. श्रीधर, कुलपति, कलिंगा विश्वविद्यालय ने कार्यात्मक पदार्थों (Functional Materials) में उन्नति की अत्यंत महत्वपूर्ण आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि संकाय सदस्यों, शोधकर्ताओं तथा उद्योग जगत के पेशेवरों को तीव्र गति से विकसित हो रहे वैज्ञानिक क्षेत्रों में प्रासंगिक बने रहने हेतु नियमित व्यावसायिक विकास कार्यक्रमों के माध्यम से अपने ज्ञान एवं शोध क्षमताओं का सतत उन्नयन करना आवश्यक है।
इस कार्यक्रम में कुल 164 प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया, जो विभिन्न संस्थानों एवं विषयों से संकाय सदस्यों एवं शोधकर्ताओं की सक्रिय राष्ट्रीय स्तर की भागीदारी को दर्शाता है। डॉ. संदीप गांधी, कुलसचिव ने अपने संबोधन में बताया कि उन्नत कार्यात्मक पदार्थ विज्ञान, अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी का एकीकरण कर नवाचार को गति प्रदान करते हैं। ये पदार्थ नवीकरणीय ऊर्जा, स्मार्ट उपकरणों, स्वास्थ्य सेवाओं तथा सतत उद्योगों को सशक्त बनाते हैं। इनकी अंतः विषय प्रकृति वैश्विक चुनौतियों के लिए प्रभावी समाधान
प्रदान करने में सहायक है, जिससे आर्थिक विकास, पर्यावरणीय स्थिरता एवं समग्र सामाजिक उन्नति को बढ़ावा मिलता
है।
डॉ. विजयालक्ष्मी बिरादार, निदेशक, आईक्यूएसी ने शैक्षणिक उत्कृष्टता एवं शोध-आधारित नवाचार के महत्व पर जोर
दिया। उन्होंने ऐसे कार्यक्रमों के सफल आयोजन हेतु निरंतर संस्थागत सहयोग एवं मार्गदर्शन का आश्वासन दिया तथा
संकाय विकास एवं सामाजिक प्रगति पर इनके दीर्घकालिक प्रभाव को रेखांकित किया।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ. सेलिया शाहनाज़, IEEE फेलो एवं IEEE वूमन इन इंजीनियरिंग (WIE) समिति की
2023–2024 की अध्यक्ष तथा बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, ढाका में विद्युत एवं
इलेक्ट्रॉनिक्स अभियांत्रिकी विभाग की प्रोफेसर रहीं। अपने संबोधन में उन्होंने उन्नत क्रियात्मक सामग्री की वैश्विक
प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए सतत तकनीकी एवं सामाजिक प्रगति हेतु अंतर्विषयी शोध, नवाचार एवं अंतरराष्ट्रीय
सहयोग को प्रोत्साहित किया।
प्रो. (डॉ.) जी. एस. तोमर, अध्यक्ष, IEEE मध्य प्रदेश सेक्शन, विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने
उद्योग–अकादमिक सहयोग एवं ट्रांसलेशनल रिसर्च के महत्त्व पर बल दिया, जिससे उन्नत क्रियात्मक सामग्री पर होने
वाले शोध को समाजोपयोगी समाधानों में परिवर्तित किया जा सके।
FDP के अंतर्गत देश-विदेश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों एवं शोधकर्ताओं द्वारा विशेषज्ञ व्याख्यान दिए गए, जिनमें शामिल
थे—
• डॉ. नीरज कुमार वर्मा, एसोसिएट प्रोफेसर, धातुकर्म अभियांत्रिकी विभाग, ओ.पी. जिंदल विश्वविद्यालय, रायगढ़ –
उन्नत क्रियात्मक सामग्री का परिचय
• डॉ. तृप्ति रिछारिया, सहायक प्राध्यापक, भौतिकी एवं खगोलभौतिकी अध्ययनशाला, पं. रविशंकर शुक्ल
विश्वविद्यालय, रायपुर – क्रियात्मक सामग्री के संश्लेषण तकनीक
• डॉ. डी. पी. बिसेन, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, भौतिकी एवं खगोलभौतिकी अध्ययनशाला, पं. रविशंकर शुक्ल
विश्वविद्यालय, रायपुर – क्रियात्मक सामग्री के वर्णनात्मक तकनीक
• डॉ. अशोक जी. मातानी, सेवानिवृत्त प्रोफेसर, शासकीय अभियांत्रिकी महाविद्यालय, जलगांव – स्वच्छ एवं
नवीकरणीय ऊर्जा हेतु सामग्री एवं पॉलिमर आधारित क्रियात्मक सामग्री
• डॉ. सुमित प्रामाणिक, रिसर्च एसोसिएट प्रोफेसर, यांत्रिक अभियांत्रिकी विभाग, एसआरएम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
संस्थान, चेन्नई – स्मार्ट एवं प्रतिक्रियाशील सामग्री
• डॉ. एम. वी. रेड्डी, वरिष्ठ पेशेवर शोधकर्ता, ऊर्जा भंडारण एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग, नूवो मोंड ग्रेफाइट,
मॉन्ट्रियल, कनाडा – ट्रांसलेशनल रिसर्च एवं उद्योग–अकादमिक सहयोग
• डॉ. अर्पणा परिहार, वैज्ञानिक, एम्स भोपाल – बायोमटेरियल्स एवं स्वास्थ्य देखभाल अनुप्रयोग
• डॉ. कौशिक डे, पोस्टडॉक्टोरल शोधकर्ता, GREMAN-CNRS, यूनिवर्सिटी ऑफ टूर्स, फ्रांस – पर्यावरणीय स्थिरता
एवं सामुदायिक कल्याण हेतु नवाचार
• डॉ. बिजॉय कुमार दास, वरिष्ठ वैज्ञानिक, अंतरराष्ट्रीय उन्नत अनुसंधान केंद्र फॉर पाउडर मेटलर्जी एवं न्यू मटेरियल्स
(ARCI), हैदराबाद – नैनोमटेरियल्स एवं उनके बहुआयामी अनुप्रयोग
• डॉ. शिखा रानी साहू, सहायक प्राध्यापक, भौतिकी विभाग, डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय (केन्द्रीय
विश्वविद्यालय), सागर – ऊर्जा एवं पर्यावरण अनुप्रयोगों हेतु क्रियात्मक सामग्री में नवीन प्रगति
• डॉ. रवि शर्मा, प्रोफेसर, शासकीय कला एवं वाणिज्य कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रायपुर – पर्यावरणीय उपचार
में क्रियात्मक सामग्री
• डॉ. विजयलक्ष्मी, निदेशक IQAC, कलिंगा विश्वविद्यालय – सेंसर एवं एक्ट्यूएटर हेतु सामग्री
FDP के दौरान उन्नत क्रियात्मक सामग्री के मूलभूत सिद्धांत, आधुनिक संश्लेषण एवं वर्णनात्मक तकनीक, पॉलिमर
आधारित क्रियात्मक सामग्री, स्वच्छ एवं नवीकरणीय ऊर्जा हेतु सामग्री, स्मार्ट एवं प्रतिक्रियाशील सामग्री,
नैनोमटेरियल्स, स्वास्थ्य सेवा हेतु बायोमटेरियल्स, सेंसर एवं एक्ट्यूएटर तथा पर्यावरणीय उपचार हेतु क्रियात्मक
सामग्री जैसे व्यापक विषयों को कवर किया गया। ट्रांसलेशनल रिसर्च, उद्योग–अकादमिक सहयोग एवं पर्यावरणीय
स्थिरता हेतु नवाचार पर विशेष सत्रों ने प्रतिभागियों को अंतर्विषयी एवं व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रदान किया।
कार्यक्रम की सफलता आयोजन समिति के सदस्यों श्री अंकित कुमार पाटीदार, श्री अभिषेक कुमार गुप्ता, श्रीमती नलिनी
सोनी, श्री अश्वन कुमार साहू, श्री हेमंत साहू, श्री आदित्य विवेक वर्मा एवं श्री पुष्पराज गेंद्रे के समर्पित प्रयासों से संभव
हो सकी, जिनके कुशल समन्वय एवं सहयोग से कार्यक्रम सुचारु रूप से संपन्न हुआ।
इसके अतिरिक्त, उत्साही छात्र स्वयंसेवकों प्रियांशु सिंह, पीयूष श्रीवास्तव, कोड़ा आयुषी राव एवं सिम्पी कुमारी के
सक्रिय सहयोग से सत्रों एवं व्यवस्थाओं का सफल संचालन सुनिश्चित हुआ।
कार्यक्रम के अंतिम दिन तीन ऑनलाइन तकनीकी सत्रों के पश्चात प्रतिभागियों ने AICTE-ATAL पोर्टल के माध्यम से
अपनी ऑनलाइन मूल्यांकन एवं प्रतिक्रिया सफलतापूर्वक प्रस्तुत की, जिससे FDP का सुव्यवस्थित एवं प्रभावी समापन
हुआ।
समापन सत्र में FDP समन्वयक डॉ. अनीता वर्मा ने जानकारी दी कि AICTE-ATAL प्रायोजित इस FDP में ऊर्जा,
स्वास्थ्य सेवा, प्रौद्योगिकी, उद्योग, पर्यावरणीय स्थिरता तथा बैटरी, सेंसर, कैपेसिटर एवं स्मार्ट सामग्री जैसे उन्नत
उपकरणों पर आधारित कुल 13 विशेषज्ञ सत्र आयोजित किए गए। उन्होंने कहा कि यह FDP प्रतिभागियों को उन्नत
ज्ञान, अंतर्विषयी समझ एवं व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रदान करने में सफल रहा, जिससे सामग्री विज्ञान में नवाचारी शोध
एवं अनुप्रयोगों के माध्यम से उभरती सामाजिक चुनौतियों का समाधान संभव हो सकेगा।


