बीजिंग, 28 जनवरी (हि.स.)। कोरोना (#Corona_virus ) की उत्पत्ति का पता लगाने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO की टीम गुरुवार को वुहान शहर पहुंच गई है।…
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पढि़ए कैसे किराना स्टोर चलाने वाले पिता की बेटी ने नीट क्वालिफाई करके डॉक्टर बनने के सपने को दी उड़ान भिलाई(mediasaheb.com) कैलाश नगर दुर्ग में छोटा सा किराना दुकान चलाने वाले राजेद्र कुमार साहू की बेटी ने मेडिकल की पढ़ाई के लिए सबसे कठिन माने जाने वाले नीट एग्जाम क्वालिफाई किया है। इसके साथ ही अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज में एडमिशन लेकर निशा साहू परिवार की पहली डॉक्टर बनेगी। अपने सपनों को नई उड़ान देने वाली निशा ने बताया कि जब वह 11 वीं कक्षा में एडमिशन लेने वाली थी उसी वक्त पिता की अचानक तबीयत खराब हो गई। डॉक्टर कई जांच के बाद भी पिता की बीमारी पकड़ नहीं पाए, बाद में जब परेशानी बढ़ी तो उनका ऑपरेशन करना पड़ा। ऐसी हालत में पिता को दर्द से तड़पते हुए देखकर मन बहुत दु:खी हो जाता था। सोचती थी कि कितना अच्छा होता अगर मैं डॉक्टर बनकर पापा की तकलीफ झटपट दूर कर देती। उस सोच को मां ने हौसला दिया और मैंने बायो लेकर नीट की तैयारी शुरू कर दी। कहते हैं कि बड़ा लक्ष्य इतनी आसानी से नहीं मिलता। राह में कांटे भी बिछे होते हैं। कुछ ऐसा ही हुआ मेरे साथ। जीतोड़ मेहनत के बाद भी सफलता के लिए मुझे दो साल तक इंतजार करना पड़ा। फाइनली दूसरे अटेम्ट में नीट क्वालिफाई किया तो सबसे ज्यादा घर में खुश पापा ही थे। आज जब वे दुकान में आने वाले हर ग्राहक को बड़े शान से कहते हैं कि मेरी बेटी डॉक्टर बनेगी तो उनके चेहरे की रौनक देखने वाली होती है। खुद को दूसरा चांस देने से डर रही थी तब दीदी ने किया मोटिवेट निशा ने बताया कि 12 वीं बोर्ड के बाद उसने लगातार दो साल ड्राप लेकर नीट की कोचिंग की। पहली बार जब नीट में फेल्यिर का रिजल्ट हाथ में आया तो बहुत ज्यादा दु:खी हो गई थी। खुद को दूसरा चांस देने से डर रही थी। मन में बहुत बुरे-बुरे ख्याल आ रहे थे कि पता नहीं मैं दूसरे साल नीट क्वालिफाई कर पाऊंगी या नहीं। ऐसे में एमटेक कर रही बड़ी बहन ने मोटिवेट करते हुए कहा कि किसी को सफलता जल्दी तो किसी को देर से मिलती है। इसलिए निराश होने की बजाय एक मौका खुद को और दो। उनकी बातें सुनकर मैंने दूसरे साल फिर से नए सिरे से तैयारी शुरू की। अंतत: सफलता का रिजल्ट लेकर खुद को खुद की नजर में साबित कर दिया। इरिटेट नहीं होते टीचर्स सचदेवा न्यू पीटी कॉलेज में नीट की कोचिंग करने वाली निशा ने बताया कि यहां के टीचर्स की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये बच्चों के सवाल पूछने से इरिटेट नहीं होते। आपके मन में जितना भी डाउट है अब कितने बार भी चाहो उसे पूछकर क्लीयर कर सकते हो। अलग से लगने वाले डाउट क्लास में मैं खूब सवाल पूछा करती थी। टीचर्स सलेक्टिव स्टडी मटेरियल ही बच्चों को पढ़ाते हैं। जिससे सिलेबस के बोझ से बच्चा खुद को हल्का महसूस करता है। गेस्ट सेशन में सचदेवा से पढ़कर देशभर में नाम कमाने वाले डॉक्टरों से मिलना एक अलग ही अनुभव रहा। जो हम बनना चाहते हैं अगर वो आकर खुद सामने खड़ा हो जाए तो लगता है कि सपना पूरा होने में ज्यादा वक्त नहीं है। क्लास में टीचर्स की मोटिवेशन संजीवनी बूटी की तरह हर स्टूडेंट को सौ फीसदी कोशिश के लिए मजबूर कर देती है। जैन सर ने कहा था कि लक्ष्य से भटकना नहीं सचदेवा न्यू पीटी कॉलेज के डायरेक्टर चिरंजीव जैन सर नीट की तैयारी कर रहे बच्चों की काउंसलिंग क्लास लेते हैं। एक दिन उन्होंने तैयारी का जिक्र करते हुए सभी से कहा कि किसका संकल्प सबसे ज्यादा मजबूत है। सबने हाथ खड़ा किया पर कैसे मजबूत है ये नहीं बता पाए। तब जैन सर ने कहा कि जो लक्ष्य से भटकेगा नहीं उसका संकल्प सबसे ज्यादा दृढ़ है। उनकी प्रेरणादायी छोटी-छोटी कहानियां कभी हमें निराश नहीं होने देती थी। हर पल एक सकारात्मक ऊर्जा का एहसास कराती थी। ये छोटी-छोटी लेकिन बेहद खास बातें सफलता के सही मायने में सीढिय़ां बनीं। इस साल नीट की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स से कहूंगी कि अपनी क्षमता का आंकलन खुद करो। आप क्या कर सकते हो क्या नहीं ये आपसे बेहतर कोई नहीं जान सकता। इसलिए बस खुद पर भरोसा करके मेहनत करो। सफलता जरूर मिलेगी।(the states. news)
रायपुर (media saheb.com) भाजपा के नेता प्रभाकर पटनायक ने दिल्ली की घटना पर चिंता प्रकट करते हुए कहा है कि मुझे पहले से डर था और…
मैं जानता था मेरी कोशिश एक दिन रंग लाएगी इसलिए फेल्यिर को भी सेलिब्रेट किया भिलाई.(mediasaheb.com) लगातार फेल्यिर से यूं तो आम स्टूडेंट निराशा के भंवर में गुम हो जाते हैं। उनके जीवन पर डिप्रेशन हावी हो जाता है| आज हम एक ऐसे खास स्टूडेंट की बात कर रहे हैं जिसने तीन साल में न सिर्फ अपने तीन लगातार फेल्यिर को सेलिब्रेट किया बल्कि चौथे साल में कभी न हार मानने वाले एटीट्यूड की बदौलत नीट क्वालिफाई करके डॉक्टर बनने का सपना भी पूरा किया। फिल्मों सी लगने वाली इस कहानी को रियल जिंदगी में जीया है रायगढ़ जिले के छोटे से गांव हमीरपुर में रहने वाले रोहन प्रधान ने। बचपन से डॉक्टर बनने का ख्वाब सजाने वाले रोहन को अपनी सफलता के लिए एक दो नहीं पूरे चार साल तक इंतजार करना पड़ा। इन सबके बीच रोहन ने कभी कोशिश करना नहीं छोड़ा असफलता को स्वीकार करके सफलता के सपने देखने वाले रोहन कहते हैं कि अगर चौथे साल भी मेरा सलेक्शन नहीं होता तो पांचवें साल की पढ़ाई के लिए मैंने अभी से तैयारी शुरू कर दी थी। मन में एक दृढ़ संकल्प है जीवन में खुद को एक काबिल डॉक्टर बनाकर समाज की सेवा करने का। इसलिए खुद को कभी निराश नहीं होने दिया। हर बार जब मैं नीट की परीक्षा में फेल होने का रिजल्ट घर लेकर पहुंचता तो पैरेंट्स उतने ही गर्म जोशी से मुझे अगले साल की तैयारी के लिए प्रोत्साहित करते थे। जानते हुए भी कर जाता था पे्रशर में छोटी-छोटी गलतियां रोहन ने बताया कि 12 वीं में 92 प्रतिशत आए। उसके बाद भी मैं तीन साल तक नीट क्वालिफाई नहीं कर पाया। हर बार एग्जाम में जानते हुए भी छोटी-छोटी गलतियां कर जाता था। जो माइनस मार्किंग में तब्दील होकर रिजल्ट बिगाड़ देती थी। एग्जाम हॉल के प्रेशर को कंट्रोल करने के लिए मैं हर बार कोशिश करता था पर हर बार कुछ कमी रह जाती थी। चौथे साल अपनी पुरानी गलतियों से सीख लेकर उसे दोबार नहीं दोहराने का प्रण किया। यही बात सफलता के लिए प्लस प्वाइंट बनी। हिंदी मीडियम स्टूडेंट होने के कारण नीट एग्जाम का बेसिक समझने में भी काफी समय निकल गया। इस बीच खुद से जरूर कहता था कि ऑल इज वैल। बी पॉजिटिव रहने की आदत के कारण ही मैं चौथे साल ड्रॉप ले पाया। तीन साल तक सचदेवा में की पढ़ाई रोहन ने बताया कि उनके रिश्तेदार और सचदेवा से पढ़कर डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहे भाई से कोचिंग की जानकारी लेकर वे भिलाई आ गए। सचदेवा के पॉजिटिव माहौल के कारण ही दो अटेम्ट में फेल्यिर के बाद तीसरे साल कोचिंग नहीं बदला। यहां टीचर्स ज्यादा पढ़ाने की बजाय केवल सिलेबस की ही पढ़ाई करवाते थे। जिससे स्टूडेंट का ध्यान नहीं भटकता। बार-बार रिविजन और टेस्ट सीरिज में भी वही सवाल पूछे जाते थे जो नीट की एग्जाम में आते थे। ऐसी बहुत सारी बातें हैं जो सचदेवा को बाकी कोचिंग से खास बनाती है। फेल्यिर के लिए कोचिंग की बजाय मैंने खुद की गलती को जिम्मेदार माना। चौथे साल सचदेवा के नोट्स और टीचर्स के बताए ट्रिक्स के जरिए सेल्फ स्टडी की। रिजल्ट आपके सामने है। गेस्ट सेशन में सचदेवा के एक्स स्टूडेंट डॉक्टर हेमराज ने जब अपनी कहानी बताई कि कैसे उन्होंने लगातार फेल्यिर से निराश होकर पढ़ाई छोड़ दी थी। फिर कुछ सालों बाद फिर से प्रयास किया और वे सफल हो गए। उनकी कहानी ने कहीं न कहीं मुझे लगातार कोशिश करने के लिए प्रेरित किया। पढ़ाई के साथ काउंसलिंग बहुत जरूरी सचदेवा कॉलेज के डायरेक्टर चिरंजीव जैन सर की काउंसलिंग से मैं बहुत ज्यादा मोटिवेट हुआ |वे अक्सर कहते हैं कि बड़े संघर्ष का परिणाम बहुत बड़ा और मीठा होता है। आज एमबीबीएस की सीट हासिल करके उनकी कही इस बात का एहसास हो रहा है। पढ़ाई के साथ-साथ काउंसलिंग बहुत जरूरी है। अगर जैन सर हमें सही समय पर गाइड नहीं करते तो शायद मंजिल तक पहुंचाने का रास्ता बीच में ही छूट जाता। सदैव पॉजिटिव रहने की सीख भी उन्हीं से मिली। इस साल जो बच्चे नीट की तैयारी कर रहे हैं उनसे यही कहूंगा कि निराशा में डूबकर साल मत खराब करिए। फेल्यिर को सेलिब्रेट करके आगे बढि़ए| हम सब इंसान है गलतियां भी हमीं से होती है पर एक कोशिश से इन गलतियों को सुधारा भी जा सकता है।(the states. news)
रायपुर, (media saheb.com) जाने-माने उद्योगपति श्री नवीन जिन्दल के नेतृत्व वाली कंपनी जिन्दल स्टील एंड पावर लिमिटेड (जेएसपीएल) ने देश का 72वां गणतंत्र दिवस कोविड-19 महामारी…
मुंबई, (media saheb.com) इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के 14 वें संस्करण के लिए नीलामी 18 फरवरी को चेन्नई में होगी भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने…
रायपुर (mediasaheb.com) कॅान्फेडरेशन आफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानी, प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष मगेलाल मालू , प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष विक्रम सिंह देव, प्रदेश…
सड़क सुरक्षा माह के अंतर्गत जेएसपीएल के मंदिर हसौद परिसर में यातायात सतर्कता पर वर्कशॉप बाइकर्स और औद्योगिक वर्कर्स को हेलमेट की उपयोगिता के बारे में समझायासुरक्षा…
सीएमडी श्री ए.पी. पण्डा ने सभी कर्मियों को मेहनत एवं लगन, संकल्प एवं साहस तथा विवेक एवं तकनीक के साथ कोयला उत्पादन लक्ष्य को हासिल करने…
बिलासपुर (mediasaheb.com) एसईसीएल तेजी से अपने कोयला उत्पादन लक्ष्य की ओर अग्रसर है। ऐसे में गणतंत्र दिवस पर एसईसीएल कोरबा क्षेत्र की सरायपाली ओपन कास्ट माइन…

