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रायपुर(mediasaheb.com)। जय व्यापार पैनल के मुख्य चुनाव संचालक नरेन्द्र दुग्गड, चुनाव सह संचालक गारगी शंकर मिश्रा, ने बताया कि छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्रीज चुनाव…

रायपुर (mediasaheb.com)। जय व्यापार पैनल के मुख्य चुनाव संचालक नरेन्द्र दुग्गड, चुनाव सह संचालक गारगी शंकर मिश्रा, चुनाव सह संचालक जितेन्द्र दोशी, छ.ग. चेम्बर आॅफ काॅमर्स…

दोस्तों के साथ घूमने में निकल गया एक साल, जब समझ आया तब तक हो चुकी थी बहुत देर गांव के हिंदी मीडियम स्कूल से पढ़कर आठवीं पास किसान का बेटा बना डॉक्टर भिलाई(mediasaheb.com) बलौदाबाजार जिले के छोटे से गांव अमोदी के आठवीं पास किसान के बेटे दीनानाथ नेताम ने नीट क्वालिफाई किया है। कड़ी मेहनत से कोरोनाकाल में एमबीबीएस की सीट हासिल करके राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज में दाखिला लेने वाले होनहार छात्र को यह सफलता दूसरे प्रयास में मिली है। गांव के सरकारी स्कूल में पढ़कर अपने सपने को सच करने वाले दीनानाथ ने बताया कि नीट के बारे में उन्हें ज्यादा जानकारी नहीं थी। इसलिए बोर्ड एग्जाम के बाद नीट नहीं दे पाए। जब पता चला तो एक साल का ड्रॉप लेकर कोचिंग के लिए भिलाई आ गए। यहां के शहरी माहौल में कब खो गया पता ही नहीं चला। पढऩे की बजाय एक साल दोस्तों के साथ घूमने-फिरने और मौज मस्ती में निकल गया। जब समय की कीमत समझ आई तब तक बहुत देर हो चुकी थी और हाथ में नीट में फेल होने का रिजल्ट था।  अपनी गलती से सबक लेकर दूसरे साल पूरे मन से पढ़ाई की। सेकंड अटेम्ट में आखिरकर नीट क्वालिफाई कर ही लिया। शुरूआत में अंग्रेजी नहीं पड़ती थी पल्ले सीजी बोर्ड स्टूडेंट होने के कारण शुरूआत में अंग्रेजी में बहुत दिक्कत हुई। दीनानाथ ने बताया कि जब वे पहले साल कोचिंग में पढऩे पहुंचे तो कुछ भी पल्ले नहीं पड़ता था। बेसिक से लेकर तैयारी और नॉलेज सब कुछ जीरो था। ऐसे में आधा साल तो नीट एग्जाम क्या होता है यही समझने में निकल गया। दोस्तों को ज्यादा वक्त देने के चक्कर में रूटीन पढ़ाई भी नहीं कर पाता था। इन्हीं गलतियों की वजह से सफलता के लिए दो साल तक इंतजार करना पड़ा। एक दिन पिता ने समझाया कि अगर अभी पढ़ाई में ध्यान नहीं दिया तो शायद जीवन में कभी सफलता नहीं मिलेगी। उनकी बात दिल को लग गई। फिर क्या कभी पीछे पलटकर नहीं देखा। पहले साल फेल होने के बाद मन में निराश आ गई थी। बार-बार खुद को दोष देकर खुद में शर्मिंदगी होने लगी थी कैसे मैंने अपना टाइम वेस्ट किया। इन सबके बीच कहीं न कहीं एक उम्मीद भी थी कि अगर दूसरा प्रयास करूंगा तो जरूर सफल होंउगा। ये बात सच भी साबित हुई। हर बच्चे पर बराबर ध्यान देते हैं सचदेवा के टीचर्स सचदेवा कोचिंग के बारे में गर्वमेंट टीचर चाचा ने बताया था। उनके कहने पर मैंने कोचिंग के लिए सचदेवा को चुना। यहां के टीचर्स हर बच्चे पर बराबर ध्यान देते हैं। शुरू-शुरू में डाउट पूछने में बहुत झिझक होती थी पर धीरे-धीरे टीचर्स के मोटिवेशन से वो झिझक भी दूर हो गई। हिंदी मीडियम स्टूडेंट्स की अंग्रेजी पर भी यहां टीचर्स ने काफी मेहनत की। यही कारण है कि अब अंग्र्रेजी का फीयर भी मन से निकल गया है। गेस्ट सेशन में सचदेवा के एक्स स्टूडेंट मशहूर हार्ट सर्जन डॉक्टर कृष्णकांत साहू को सुनकर बहुत ज्यादा प्रेरणा मिली। गांव से निकलकर देशभर में नाम कमाने वाले डॉक्टर साहू ने कहा था कि सफलता के लिए संघर्ष जरूरी है। अब लगता है कि पहली बार ठोकर नहीं लगी होती तो शायद दूसरी बार सफलता को इंज्वाय नहीं कर पाता। पढ़ाई के साथ जैन सर की काउंसलिंग से मिली सफलता…

रायपुर (mediasaheb.com) । जय व्यापार पैनल के मुख्य चुनाव संचालक नरेन्द्र दुग्गड, चुनाव सह संचालक गारगी शंकर मिश्रा, चुनाव सह संचालक जितेन्द्र दोशी, छ.ग. चेम्बर आॅफ काॅमर्स…

रायपुर(mediasaheb.com) सोने की लगातार कम होती कीमत से सराफा बाजार में एक नई जान डाल दी है। जैसे-जैसे कीमत होती जा रही है लोग बाजार की…

बिलासपुर (media saheb.com)एसईसीएल मुख्यालय बिलासपुर के खान सुरक्षा एवं बचाव विभाग में मुख्य प्रबंधक (खनन) के पद पर कार्यरत श्री अनिल मिश्रा का आज दिनांक 05.03.2021…

रायपुर (mediasaheb.com)। जय व्यापार पैनल के मुख्य चुनाव संचालक नरेन्द्र दुग्गड, चुनाव सह संचालक गारगी शंकर मिश्रा, चुनाव सह संचालक जितेन्द्र दोशी, छ.ग. चेम्बर आॅफ काॅमर्स…

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सोशल मीडिया को न कहकर एक साल केवल पढ़ाई पर फोकस करने वाली स्मृति ने किया नीट क्वालिफाई भिलाई(mediasaheb.com) बचपन से होनहार छात्रा रही अंबिकापुर की स्मृति सिंह का केवल एक ही सपना था नीट क्वालिफाई करके डॉक्टर बनना। इस सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने एक साल तक सोशल मीडिया को न कहकर केवल पढ़ाई पर फोकस किया। जिसका नतीजा ये रहा कि स्मृति ने न सिर्फ नीट क्वालिफाई किया बल्कि अच्छे माक्र्स के चलते उन्हें अपने होम टाउन यानी अंबिकापुर के मेडिकल कॉलेज में ही दाखिला मिल गया। एक साल ड्रॉप लेकर अपने दूसरे अटेम्ट में एमबीबीएस सीट हासिल करने वाली स्मृति कहती है कि असफलता और सफलता के बीच केवल अ का फर्क होता है। जिसे इंसान जब चाहे हार्ड वर्क करके दूर कर सकता है। मैंने इसी फर्क को समझकर अपना पूरा समय केवल पढ़ाई को दिया जिसका नतीजा सबके सामने है। तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी स्मृति का मानना है कि डॉक्टरी एक ऐसा प्रोफेशन है जो नाम के साथ आपको समाज में एक अलग दर्जा देता है। लोग आज भी डॉक्टर को भगवान मानते हैं। जो शायद किसी और दूसरे जॉब में नहीं होता। इसलिए मेरा झुकाव हमेशा इसी फील्ड पर रहा। खुद को नहीं देना चाहती थी फेल होने का कोई रीजन घर की बड़ी बेटी होने के नाते पापा ने मुझे बड़ी उम्मीदों से पढ़ाई करने के लिए भिलाई भेजा था। स्मृति ने बताया कि जब वो भिलाई पहली बार आई तो यहां के माहौल में काफी अंतर पाया। ऐसे में लक्ष्य के करीब पहुंचने के लिए हर उस चीज को आंखों से दूर रखा जिससे ध्यान भटक सकता था। मैं खुद को फेल होने के कोई रीजन नहीं देना चाहती थी। इसलिए एक साल तक घूमने-फिरने, मौज-मस्ती का ख्याल भी दिल में नहीं आया। हॉस्टल से कोचिंग और कोचिंग से हॉस्टल, बाकी समय पढ़ाई में कट गया। बीच-बीच में जब निराश होती थी तो घर में पैरेंट्स से बात करती थी। वो हमेशा कहते हैं कि रिजल्ट की चिंता मत करो बस कोशिश करते रहो। उनकी बातें सुनकर फिर पढ़ाई करने बैठ जाती थी। बेटर स्कोर करने के लिए कैमेस्ट्री पर किया फोकस स्मृति ने बताया कि बायो और एग्रीकल्चर के साथ उन्होंने 12 वीं बोर्ड पास किया। बायो स्टूडेंट होने के कारण कैमेस्ट्री और फिजिक्स थोड़ा वीक था। इसलिए मैंने शुरूआत से बेटर स्कोर करने के लिए कैमेस्ट्री पर ज्यादा फोकस किया। सचदेवा कोचिंग के बारे में पापा के दोस्तों से पता चला। उन्होंने गाइड करते हुए जो सचदेवा के बारे में बताया उससे कहीं ज्यादा अनुभवी टीचर्स को पाकर खुश हो गई। कोचिंग में टीचर्स हर डाउट को चंद मिनटों में दूर करते देते थे। अगर किसी कारण डाउट नहीं पूछ पाए तो डाउट के लिए अलग से 15 मिनट का समय या फिर डाउट क्लास लगती थी, जिससे काफी हेल्प मिला। गेस्ट सेशन में सचदेवा से पढ़कर देश-विदेश में नाम कमा कर रहे मशहूर डॉक्टरों से मिलकर लगा कि ये जब कर सकते हैं तो हम क्यों नहीं। हर डॉक्टर के संघर्ष की एक अलग कहानी रोमांचित कर देती थी। जैन सर की काउंसलिंग आई बहुत काम स्मृति ने बताया कि सचदेवा न्यू पीटी कॉलेज के डायरेक्टर चिरंजीव जैन सर की काउंसलिंग उनके बहुत काम आई। जैन सर की काउंसलिंग क्लास में बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ अपनी पर्सनल प्राब्लम भी शेयर करते थे। बड़ी आसानी से सर हमें उसे परेशानी से निकलने का रास्ता बताते थे शायद किसी और कोचिंग में ऐसा मेंटर मिलना बहुत मुश्किल है। उनकी मोटिवेशन बातें हमेशा हमें आगे बढऩे की प्रेरणा देती है। नीट की तैयारी करने वाले स्टूडेंट्स से कहूंगी कि एग्जाम हॉल में जल्दबाजी की जगह धैर्य से काम ले। केवल उन्हीं प्रश्नों पर टिक करें जिसके उत्तर आप जानते हो नहीं तो नेगेटिव मार्किंग से पूरा पेपर भी बिगड़ सकता है।(the states. news)

क्यूएस यूनिवर्सिटी वर्ल्ड रैंकिंग-2021 में भारत का इकलौता कानून विश्वविद्यालय, जिसे विश्व के शीर्ष 100 विश्वविद्यालयों में स्थान मिलाचांसलर नवीन जिन्दल ने दी यूनिवर्सिटी टीम को…