रायपुर (mediasaheb.com) |ज्ञान की नगरी काशी में बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के वैदिक विज्ञान केन्द्र में 20 सितम्बर से 26 सितम्बर तक शास्त्रों के वैज्ञानिक संदर्भों पर गम्भीर चर्चा हुई। छः दिवसीय इन चर्चाओं में मुख्य रूप से प्रो० आर्यभूषण शुक्ल (पूर्व तिहाड़ जेल अधिकारी एवं भारतीय ज्योतिष परिषद् अध्यक्ष) जी उपस्थित रहे। ज्योतिषशास्त्र के मूर्धन्य विद्वान प्रो० रामचन्द्र पाण्डेय जी की अध्यक्षता में यह शास्त्रीय सभा सम्पन्न हुई। आर्यभूषण शुक्ल जी का कहना है कि भारतीय शास्त्र का मूल वेद है वेद से सम्पूर्ण प्रकृति के रहस्यों को जाना जा सकता है आज के विज्ञान (साइंस) का मूलभूत स्रोत वेद ही है। भले ही इस विज्ञान का ज्ञान हम तक नहीं पहुँच पाया हो परन्तु जो विशिष्ट ज्ञान हैं वह हमारे वेद, पुराण, इतिहास, स्मृति ग्रन्थों में पहले से ही विद्यमान हैं विशिष्ट ज्ञान ही विज्ञान है इस शास्त्रविज्ञान कार्यशाला में अनेक विश्वविद्यालय के शोध छात्र-छात्राओं ने भाग लिया जिसमें छत्तीसगढ़ के जॉजगीर-नैला के निवासी अंकित शर्मा जो कि काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में ही संस्कृतविद्या धर्मविज्ञान संकाय में वैष्णव आगम के शोधार्थी हैं ने भाग लिया तथा विषय प्रस्तुति में प्रथम स्थान प्राप्त किया। शर्मा का कहना है कि क्या अग्नि का जल में या जल में अग्नि का निवास सम्भव है? “नहीं” परन्तु हमारे शास्त्रों में “अग्नेरापः” कहा गया है। अर्थात् अग्नि का स्थान जल बताया गया है। सृष्टिक्रम में “आकाशाद्वायुः वायोरग्ने अग्नेरापः अद्भ्यः पृथिवी” बताया गया है इसीलिए सम्भव हो पाता है कि हम विद्युत जल से उत्पन्न करते हैं। शास्त्रों में अनेक वैज्ञानिक प्रमाणों का भाण्डार है। अतः यही विज्ञान है वेदों का प्रतिपाद्य विषय यज्ञ है परन्तु यज्ञ का काल ज्योतिषशास्त्र निर्धारित करता है। ज्योतिष को वेद का नेत्र कहा गया है।
ज्योतिष में नक्षत्रज्ञान अदभुत विषय है किसी भी ग्रहों का कालगणना किया जा सकता है। हमारे ऋषियों ने यह सब प्रत्यक्ष देखा है। हमारा विज्ञान हमारे ऋषियों से प्रमाणित है। प्रो० रामचन्द्र पाण्डेय जी कहना है कि आज की तारीख का कोई प्रमाण नहीं कि आज यह तारीख है परन्तु आज कौन सी तिथि है यह चन्द्रमा को देखकर जाना जा सकता है। बता दें कि अंकित शर्मा वैष्णव आगम विषय में छत्तीसगढ़ के प्रथम विद्वान हैं जो कि काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में रिसर्च स्कॉलर हैं। शास्त्र के वैज्ञानिक संदर्भ की कार्यशाला में वैदिक विज्ञान केन्द्र के समन्यक प्रो० उपेन्द्र त्रिपाठी तथा संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के संकाय प्रमुख प्रो० कमलेश झा एवं काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के अध्यक्ष प्रो० नागेन्द्र पाण्डेय तथा वेद के मूर्धन्य विद्वान प्रो० हृदय रंजन शर्मा जी एवं अनेक प्रतिभागी उपस्थित रहे। अंकित शर्मा श्रीमद्जगदगुरू स्वामी श्री राघवाचार्य जी के कृपा पात्र शिष्य भी है ।


