14 अप्रैल बैसाखी का दिन , खालसा के सृजन का दिन,ये आतंकी हमले हम सैकड़ो साल से झेल रहे है,भारत की 99 % समस्याओं का हल है खालसा राज..
बिलासपुर (mediasaheb.com)| गुरु महाराज के विचार अपने समय से बहुत आगे के थे, खालसा के सृजन का वर्ष है वर्ष वैसाखी 1699 और फ़्रांस की महान क्रान्ति वर्ष 1791 यानि उसके बहुत पहले खालसा के सृजन के साथ ही गुरु महाराज ने ये घोषणा कर दी थी की सब मानव बराबर है कोई छोटा बड़ा नहीं, स्त्री पुरुष, ऊँचा नीचा , काला गोरा, वर्ण जाति वंश सब खालसा में एक बराबर..
भारत को जितना गुरु गोविन्द सिंह समझा,शायद किसी अन्य विचारक ने शायद इतनी गहराई से समझा हो..
शास्त्र के साथ शस्त्र में भी पारंगत होना जरुरी,जातिवाद समाप्त हो,अंध श्रद्धा,अंध विश्वास से मुक्ति,शत्रु पर कड़ा प्रहार , देश के लिए जीवन , स्वार्थ से ऊपर उठ समाज के लिए जीवन, भय से मुक्त जीवन, स्त्रियों का सम्मान , सभी को बराबरी , एक साथ भोजन..
अब देखिए प्रथम पंजप्यारे देश के अलग अलग प्रांतो से है, पटना साहिब बिहार में तो नांदेड़ साहिब महाराष्ट्र में तो श्री हेमकुण्ड साहिब उत्तराखंड में.. खालसा राज में पूरा भारत आता है.🤔🤔 ननकाना साहिब को हम नहीं भूले, पर क्या करें नेहरू ने जिन्ना को दें दिया 😟
बड़ी बातें तो बहुतों ने की पर स्वयं अमल नहीं किया , गुरु महाराज ने जो कहाँ उस पर स्वयं सब से पहले अमल किया (वाह वाह गुरु गोबिंदसिंग जी आपौ गुरु चेला) स्वयं खालसा का सृजन किया और स्वयं सब से पहले दीक्षा ली,आप पूरे संसार का इतिहास पढ़ लीजिये ,देश धर्म के लिए इतना बड़ा त्याग ,इतना बड़ा बलिदान किसी ने भी नहीं दिया ,वे सर्ववंश दानी कहलाये अपने पिता ,अपने सभी पुत्रो का बलिदान दिया । बात यही खत्म नहीं होती ,वे उच्च कोटि के साहित्यकार भी थे, दशम ग्रन्थ उनकी रचनाओं का संकलन है, श्रीमद भागवत संस्कृत से गुरुमुखी में लिख इसे आम जन तक पहुंचाया..
भाषविद भी थे
ब्रज,अवधि,गुरुमुखी,फारसी,अरबी तथा संस्कृत भाषाओं का ज्ञान था,
यदि गुरु गोविंदसिंह के विचारों को,उनके सपने के खालसा राज को कायम किया जाय तो भारत पुनः विश्व शक्ति बनेगा
संजय अनंत ©
Sunday, September 27
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