- इधर मंत्री गुरु विश्व में बढ़ाएगा भारत का प्रभुत्व
- हिंदू नव वर्ष विक्रम संवत 2079 की शुरुआत दो अप्रैल से
रायपुर (mediasaheb.com) । हिंदू पंचांग के मुताबिक चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के साथ 2 अप्रैल को नव संवत्सर प्रारंभ होगा। इस नव संवत्सर का नाम नल है। इसके राजा शनि व मंत्री देवगुरु बृहस्पति माने गए हैं। इस दिन भगवान झूलेलाल जयंती, चैतीचांद व गुड़ी पड़वा, उगादी का पर्व भी धूमधाम से मनाया जाएगा। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को नव संवत्सर का आरंभ होता है। यह पवित्र तिथि मानी जाती है इसी तिथि को ब्रह्मा ने सृष्टि का निर्माण प्रारंभ किया था। इसी तिथि को रेवती नक्षत्र में विष्कुंभ योग में दिन के समय भगवान के 24 अवतारों में आदि अवतार मत्स्यावतार का प्रादुर्भाव मना जाता है। युगों के प्रथम सत्ययुग का प्रारंभ भी इसी तिथि को हुआ था। इसी दिन ध्वजारोहण, वर्षपति की पूजा, पंचाग फल का श्रवण करना चाहिए। इस दिन या चैत्र महीने भर नीम की कोमल पत्ती, मिश्री एवं गोल मिर्च का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद है।
इस तरह पड़ेगा ग्रह का फल
-राजा शनि का फल : न्याय तथा कार्यप्रणाली में सकारात्मक परिवर्तन होगा। धान्य उत्पादन कहीं श्रेष्ठ तथा कहीं मध्यम रहेगा। मौद्रिक नीति में परिवर्तन होगा। कुछ स्थानों पर महंगाई बढ़ेगी। उड़द, कोयला, लकड़ी, लोहा, कपड़ा, स्टील महंगे होंगे।-मंत्री गुरु का फल : वर्षा की स्थिति उत्तम रहेगी। देश में करीब 88 फीसद वर्षा होगी। कुछ स्थानों को छोड़ कर शेष कृषि क्षेत्र में धान्य का प्रचुर उत्पादन होगा। विश्व में भारत का प्रभुत्व बढ़ेगा।
ऐतिहासिक महत्व की तिथि
यह तिथि ऐतिहासिक महत्व की भी है। ज्योतिषाचार्य पं। संतोष तिवारी ने बताया कि इसी दिन सम्राट चंद्रगुप्त विक्र मादित्य ने शकों पर विजय प्राप्त की थी। इस तिथि को चिर स्थायी बनाने के लिए विक्रम संवत का प्रारंभ किया था। इस वर्ष विक्रम संवत 2079 की शुरुआत होगी।
नव संवत्सर से जुड़े तथ्य
नव संवत्सर के विषय में कहा जाता है जो व्यक्ति 6 नाभियां, 12 धुरियों, 24 पर्वों, 360 अरों को अर्थ समझता है वह विद्वान माना गया है। 6 ऋतुएं वसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत, शिश्रि ही नाभियां, 12 महीने धुरी के रूप में गिने जाते हैं। 24 पक्ष ही पर्व और 360 दिन अरे हैं।


