अयोध्या, (mediasaheb.com) डॉ0 राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या में इक्ष्वाकुपुरी फाउंडेशन एवं एमबीए टूरिज्म मैनेजमेंट के संयुक्त तत्वाधान में मंगलवार को ‘श्रीरामः वैश्विक सुशासन के प्रणेता’ विषय पर एक दिवसीय विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया। तकनीकी सत्र को संबोधित करते हुए प्रख्यात विश्लेषक एवं पत्रकार तारिक फतेह ने कहा कि भारत विश्व की सबसे प्राचीन विकसित सभ्यताओं का देश रहा है। भारत के प्राचीन विश्वविद्यालय विश्वभर में ज्ञान की ज्योति जलाये है। विदेशी आक्रमणकारियों ने भारत का सामाजिक सांस्कृतिक एवं आर्थिक ढांचे को तहस नहस कर दिया। तारिक फतेह ने कहा कि भारत सिंध और पंजाब के बिना अधूरा है। मुगल आक्रमणकारियों ने देश की प्राचीन धराहरों को काफी नुकसान पहुंचाया है। रामराज देश में तब स्थापित होगा जब पंजाब और सिंध भारत का हिस्सा होगा। 711 इसवी के राजा दाहेर ने भारतीय सभ्यताओं को मजबूत करने में एक बड़ा योगदान किया। जापान में बौद्ध सम्प्रदाय नालंदा विश्वविद्यालय की वजह से प्रसारित हुआ।
कुलपति प्रो0 मनोज दीक्षित ने कहा कि रामायण परिपथ की यात्रा अयोध्या से शुरू होनी चाहिए। यह पर्यटन और साहित्य के विकास में आवश्यक है। अयोध्या में वास्तु कला पर भी काफी कुछ किया जाना शेष है। अयोध्या में विश्व की प्रमुख भाषाओं के लिए पर्यटन के विकास को लेकर कार्य किये जाने की आवश्यकता है।
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा कि अयोध्या में राममंदिर का निर्णय आने पर सरकार के साथ पूरी जनता खड़ी रही। यह भारत का संस्कार है कि पढ़िए और जीवन मे लागू करिए। प्रभु राम की शक्ति भी एक पहचान है। भगवान राम के जीवन का एक पहलू यह भी है कि समाज में किसी के साथ कोई भेद-भाव न हो। तकनीकी सत्र में इंडिया थिंक कॉउन्सिल के पदाधिकारी अशोक मेहता ने सत्र के प्रस्तावना पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि रामराज पर पूरा स्वतंत्रता संग्राम आधारित रहा जैसे मंदिर का निर्माण होगा वैसे भारत रामराज की तरफ बढ़ेगा। (हि.स.)।
Wednesday, April 22
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