रायपुर( mediasaheb.com ) शिक्षा का अधिकार कानून छत्तीसगढ़ में वर्ष 2010 से लागू हुआ और अब तक लगभग 3 लाख गरीब बच्चों को प्राईवेट स्कूलों में प्रवेश दिया जा चुका है, लेकिन कितने प्रवेशित बच्चे आज भी प्राइवेट स्कूलों में पढ़ रहे है, इसकी जानकारी स्कूल शिक्षा विभाग और लोक शिक्षण संचालनालय में नहीं है। शिक्षा का अधिकार के अंतर्गत वर्ष 2018-19 में लगभग 6,192 निजी स्कूलों में लगभग 80,583 सीट्स गरीब बच्चों के लिये आरक्षित किया गया है। जिसके लिये 76,875 बच्चों ने ऑनलाईन आवेदन भरा था। जिसमें से सिर्फ 40,254 गरीब बच्चों को प्रवेश दिया जा सका है, यानि लगभग 40 हजार सीट्स रिक्त रह गया जिसे भरा नहीं गया। इस प्रकार वर्ष 2019-20 में शिक्षा का अधिकार के अंतर्गत लगभग 6,426 निजी स्कूलों में लगभग 86,480 सीट्स गरीब बच्चों के लिये आरक्षित किया गया है।
जिसके लिये 99,780 बच्चों ने ऑनलाईन आवेदन भरा था। जिसमें से सिर्फ 46,571 गरीब बच्चों को प्रवेश दिया जा सका है, यानि लगभग 45 हजार सीट्स रिक्त रह गया जिसे भरा नहीं गया।पूरे प्रदेश में प्रति वर्ष हजारों गरीब बच्चों को निःशुल्क शिक्षा से वंचित कर दिया गया है। इसमें अधिकतर ऐसे बच्चे है जिनका उम्र 6 वर्ष पूर्ण हो चुका है, जिन्होंने कक्षा 1 के लिये ऑनलाईन आवेदन किया था और अब इन बच्चों को इस कानून का लाभ अगले वर्ष नहीं मिल पायेगा, क्योंकि अगले वर्ष उनका उम्र लगभग 7 वर्ष पूर्ण हो जाएगा और आरटीई में प्रवेश हेतु कक्षा-1 के बच्चों के लिये 6 वर्ष 6 माह तक उम्र निर्धारित किया गया है।छत्तीसगढ़ सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग में बैठे अधिकारियों के द्वारा सुनियोजित ढंग से गरीब बच्चों को निःशुल्क शिक्षा से वंचित कर प्राईवेट स्कूलों को अप्रत्यक्ष लाभ पहंुचाने का प्रयास किया जा रहा है, जो उचित नहीं है। बिलासपुर हाईकोर्ट का आदेश दिनांक 14.09.2016 में यह स्पष्ट लिखा है कि आरटीई की हर रिक्त सीटों को भरा जाये, लेकिन इस आदेश का स्पष्ट रूप से उल्ल्घंन हो रहा है।
आरटीई ( RTI ) के अंतर्गत प्रवेश प्राप्त करने के पश्चात् गरीब बच्चे अपने स्वयं के खर्चे से ड्रेस, कॉपी-किताबें खरीद रहे है। शिक्षण शुल्क को छोड़ बाकी सभी चीजों के लिये गरीब बच्चों को पैसे लगते है। बिलासपुर हाईकोर्ट दो बार आदेश दे चुका है कि आरटीई के अंतर्गत प्रवेशित बच्चों को निःशुल्क ड्रेस, कॉपी-किताबें दिया जावे, लेकिन इसका पालन प्रदेश में नहीं हो रहा है।क्रिष्टोफर पॉल, प्रदेश अध्यक्ष का कहना है कि हमारी संस्था छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन विगत सात वर्षो से हर गरीब बच्चों को आरटीई का समुचित लाभ दिलवाने का प्रयास कर रही है। शिक्षा का अधिकार छत्तीसगढ़ में अब कक्षा बारहवीं तक कर दिया गया है, लेकिन जो बच्चे प्रवेश पा चुके है, उन्हें इस कानून का समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है, इसलिये प्रतिवर्ष सैकड़ों गरीब बच्चे प्रवेश पाने के पश्चात स्कूल छोड़ रहे है, जिसको लेकर शायद सरकार गंभीर नहीं है। शालात्यागी बच्चों के लिये कई योजनों में प्रतिवर्ष करोड़ों खर्च करने के बाद भी यदि गरीब बच्चों को निःशुल्क शिक्षा का लाभ नहीं मिल पा रहा है, तो अब जिम्मेदार अधिकारियों पर जिम्मेदारी तय किया जाना उचित होगा।


