बिलासपुर, (mediasaheb.com ) छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा ओबीसी समुदाय को सरकारी नौकरियों में 27 प्रतिशत आरक्षण देने के फैसले पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। राज्य सरकार ने कुल 82 प्रतिशत आरक्षण देने की घोषणा हुई थी,हाईकोर्ट ने 69 प्रतिशत को ही मंजूरी दी है। कोर्ट के इस फैसले के बाद राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि माननीय न्यायालय नो 69 प्रतिशत आरक्षण को स्वीकार कर लिया है,यानी एससी व आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के आरक्षण को स्वीकार कर लिया गया है,ओबीसी आरक्षण को स्वीकार नहीं किया गया है। इसे लेकर हम लड़ाई लड़ेंगे और न्यायालय में अपना पक्ष रखेंगे।
अदालत में ये हुआ
पिछड़ों को 27 प्रतिशत आरक्षण देने पर रोक लगा दी गई है,कोर्ट ने सरकार को चार हफ्तों में जवाब देने कहा है। मामले की सुनवाई के बाद तैयार किया गया आदेश 23 पेज का है। सरकार को ये निर्देश भी दिए गए हैं कि ओबीसी वर्ग के बढ़े हुए आरक्षण के संबंध में किसी प्रकार का विज्ञापन जारी नहीं किया जाए। सर्वणों के दस प्रतिशत आरक्षण पर कुछ नहीं कहा गया है।
ये था दांव, ये है सियासत
CM भूपेशके नेतृत्व वाली राज्य की दस माह पुरानी सरकार ने छत्तीसगढ़ में ओबीसी को मिलने वाला 14 फीसद आरक्षण बढ़ाकर 27 प्रतिशत कर दिया था। यही नहीं एससी का एक प्रतिशत बढ़ाने के साथ ही सवर्ण आरक्षण 10 प्रतिशत भी दिया था, एसटी को पहले ही 32 फीसद आरक्षण है। कुल मिलाकर राज्य में 82 फीसद आरक्षण हो गया था। अब अदालत के आदेश पर यह 27 प्रतिशत घटकर 69 पर आ गया है। छत्तीसगढ़ में ओबीसी की राजनीति के प्रमुख घटक साहू तेली समाज कुर्मी सहित कई अन्य उपजातियां शामिल हैं। लेकिन साहू-कुर्मी राजनीतिक रूप से अधिक संवेदनशील व जागरूक माने जाते हैं। इस पूरे वर्ग को साधने का प्रयास आरक्षण के फैसले में शामिल था।
सामान्य वर्ग है विरोध में
राज्य सरकार के आरक्षण पर फैसलों से एससी,एसटी,ओबीसी व सामान्य गरीब वर्ग भले ही खुश है, लेकिन राज्य में ही सामान्य वर्ग के लोगों में इस कदम को लेकर नाराजगी थी, इस वर्ग की संख्या भले ही कम हो लेकिन समाज के सभी वर्गों में इनकी पैठ व स्वीकार्यता है। कांग्रेस सरकार के फैसले की अपने तरीकों से समीक्षा के साथ विरोध के सुर थे,हैं।
हम हैं आरक्षण के विरोध में
राज्य सरकार के आरक्षण मामले में हाईकोर्ट में याचिका प्रस्तुत करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता कुणाल शुक्ला ने कहा है कि ये फैसला न्यायहित में आया है, भारतीय संविधान के अनुरूप आया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व में इस संबंध में दिए गए फैसलों के अनुरूप आया है। हमने किसी भी वर्ग को आरक्षण देने का विरोध नहीं किया है,लेकिन हम आरक्षण के विरोध में हैं। हमारा कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने 50 प्रतिशत आरक्षण को स्वीकारा है। यह लिमिट इतनी ही होनी चाहिए। उन्होंने साफ किया कि वे जाति के आधार पर आरक्षण के विरोध में हैं आरक्षण केवल अमीर व गरीब के आधार पर होना चाहिए। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वालों में विवेक ठाकुर व नवनीत तिवारी भी शामिल हैं।


