नई दिल्ली, (media saheb) भारत रंग महोत्सव में हर दिन आयोजित होने वाले ‘डायरेक्टर मीट’ सत्र के नौवें दिन निर्देशक सुरेश शर्मा, जो राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के प्रभारी निर्देशक हैं, सारा जेकर, देवव्रत पटनायक और सपन कुमार आचार्य मौजूद रहे। इसके अलावा आलोचक शिवकेश मिश्रा और मनोहर खुशलानी ने भी इस सत्र में हिस्सा लिया।
अपने नाटक के पीछे के विचार के बारे में बात करते हुए सुरेश शर्मा कहते हैं, ”सबसे पहले, मैं इस समय अपने नाटक के निर्देशक के रूप में यहां बैठा हूं, न कि राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक के रूप में। जहां तक नाटक की बात है, यह 1980 के दशक की बात है, जब मैं कश्मीर में रह रहा था। ज्यादातर, मैं अपनी जगह का पता लगाने और समझने के लिए सड़क मार्ग से कश्मीर से लद्दाख की यात्रा करता था। अपनी यात्रा के दौरान, मुझे कारगिल में कुछ रातें बितानी पड़ीं। कभी-कभी मैं टैक्सी लेता था और पानी पीना बंद कर देता था और जब कोई मुझे पानी पीने के लिए कहता था जो पाकिस्तान से आता था। और भी कई बातें थीं जो मुझे परेशान करती थीं। इसलिए नाटक को पढ़ने और ‘फिडलर ऑन दी रूफ’ देखने के बाद, मैंने इस नाटक के माध्यम से हमारे देश और कश्मीरी पंडितों के मुद्दे को दिखाने का फैसला किया।”
अन्य नाटकों के निर्देशकों ने बताया कि कैसे उन्होंने नाटक को अनुकूलित किया और नाटकों में प्रयुक्त हर एक तत्व के पीछे की कहानी क्या थी? उल्लेखनीय है कि भारत रंग महोत्सव 21 फरवरी तक 6 शहरों में चलेगा।(हि.स.)।

