छोटे से गांव से निकलकर बनाई हड्डी रोग विशेषज्ञ के रूप में प्रदेश में पहचान
भिलाई (mediasaheb.com)| बालोद जिले के छोटे से गांव धनेली के रहने वाले डॉ. अरविंद साहू आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। बेमेतरा जिला चिकित्सालय में हड्डी रोग विशेषज्ञ के रूप में सेवा दे रहे हैं डॉक्टर साहू कहते हैं कि इस पहचान के पीछे एक लंबा संघर्ष भी छिपा हुआ है। जिसकी शुरूआत आठवीं कक्षा में हुई थी, जब पिता और दादा जी ने पूछा कि बेटा क्या बनना चाहते हो, मैंने झट से कहा कि मैं बड़ा होकर डॉक्टर बनना चाहता हूं। इस सपने को पूरा करने के लिए कितनी मेहनत करनी पड़ती है, शायद उस वक्त इस बात का अंदाजा तक नहीं था। 12 वीं बोर्ड के बाद पीएमटी की तैयारी के लिए गांव से शहर आया तो यहां सबकुछ नया था। सिलेबस से लेकर क्लासमेट और रहन-सहन हर चीज बदल गया था। शुरूआत में एक साल तो पीएमटी के सिलेबस को समझने में ही निकल गया। जब दूसरे ड्रॉप इयर में पूरी तैयारी के साथ उतरा तब जाकर सीजी पीएमटी क्वालिफाई कर पाया।
एक जुनून और परिवार का विश्वास ही था जिसकी बदौलत मैं सफलता अर्जित कर पाया। आज जब खुद को इस मुकाम पर खड़ा हुआ देखता हूं तो मन को सुकून मिलता है। एक डॉक्टर के रूप में जब किसी मरीज का उपचार करता हूं तो लगता है कि शायद दुनिया में इससे अच्छे और कोई काम हो ही नहीं सकता।
पहले अटेम्ट में डेंटल के लिए किया क्वालिफाई
डॉ. अरविंद ने बताया कि उन्होंने पहले ड्रॉप इयर में डेंटल के लिए क्वालिफाई कर लिया था, लेकिन संकल्प डॉक्टर बनने का था। इसलिए दूसरे साल दोगुना रिस्क लेकर पढ़ाई करने का फैसला किया। बीच-बीच में थोड़ी निराशा होती थी तब खुद को मोटिवेट करता था पढऩे के लिए। सीजी बोर्ड स्कूल से पढऩे के कारण पीएमटी के सिलेबस को नए सिरे से पढऩा पड़ा। फिजिक्स, कैमेस्ट्री का बेस काफी वीक था। सबसे ज्यादा मेहनत इन दोनों विषयों के लिए ही करना पड़ा। साल 2005 में सीट काफी कम हुआ करते थे, इसलिए कॉम्पीटिशन में बने रहने के लिए दिन रात बस पढ़ता रहता था। मुझे हमेशा लगता था कि एक दिन सफलता जरूर मिलेगी इसलिए मैंने कभी हार नहीं मानी।
सचदेवा की पढ़ाई से बना पीएमटी के लिए बेस
डॉ. अरविंद ने बताया कि 12 वीं बोर्ड के बाद उन्होंने कोचिंग के लिए भिलाई के सचदेवा कॉलेज को चुना। जब पहली बार गांव से शहर पढऩे के लिए आया तो यहां सचदेवा के टीचर्स ने काफी सपोर्ट किया। कई चीजें समझ नहीं आती थी तब वे अलग से डाउट क्लास लेकर उस विषय की बेसिक बातों को समझाते थे। टीचर्स के साथ ही सचदेवा के डायरेक्टर चिरंजीव जैन सर बीच-बीच में काउंसलिंग करते थे। उनकी मोटिवेशनल बातें और पारखी नजरों की वजह से ही शायद मैं खुद की काबिलियत को समझ पाया। पहले ड्रॉप इयर में जब मेडिकल कॉलेज की सीट नहीं मिली तो रैंक अच्छा होने के कारण दूसरे साल उन्होंने फ्री में मुझे कोचिंग में एडमिशन दे दिया। यहां का टेस्ट सीरिज बेहद खास है। सचदेवा में टेस्ट बिल्कुल उसी अंदाज में होता है जिस तरह हमें पीएमटी के लिए पेपर देना होता है। इससे एग्जाम के प्रेशर और डर को कंट्रेाल करने में काफी मदद मिली।
पुराने पेपर्स जरूर करें साल्व
रायपुर मेडिकल कॉलेज से पीजी करने के बाद छत्तीसगढ़ को प्रैक्टिस के लिए चुनने वाले डॉ. अरविंद कहते हैं कि हर स्टूडेंट को पुराने पेपर्स जरूर साल्व करना चाहिए। इससे आपको टाइम मैनेजमेंट और एग्जाम के पैटर्न का अंदाजा हो जाता है। पढ़ाई के साथ रिविजन बहुत जरूरी है। बिना रिविजन के आप पढ़े हुए विषयों को भूल सकते हैं, इसलिए मेन एग्जाम से पहले कम से कम दो बार फुल कोर्स का रिविजन करें। पेपर साल्व करने की स्पीड बढ़ाए। कई बार स्पीड कम होने के कारण कई प्रश्न आते हुए भी छूट जाते हैं। इन बातों का अगर ध्यान रखा जाए तो सक्सेस होने से कोई नहीं रोक सकता। (the states. news)

