- तीन साल ड्रॉप लेकर किया पीएमटी क्वालिफाई, लोग बनाते थे कई तरह की बातें, मैं सिर्फ पढ़ता गया
- ठोकरें इंसान को जीना और चलना दोनों सिखाती है…
भिलाई (media saheb.com)| कहते हैं ठोकरें इंसान को जीना और चलना दोनों सिखाती है। कुछ ऐसा ही हुआ था सूरजपुर के रहने वाले डॉ. चंद्रशेखर गुप्ता के साथ। वे बचपन से बनना तो डॉक्टर चाहते थे लेकिन जब डॉक्टर बनने के लिए पहला पड़ाव यानी मेडिकल एंट्रेस की बारी आई तो उन्हें दो बार असफलता का स्वाद चखना पड़ा। बावजूद मेडिकल फील्ड के प्रति जुनून कम नहीं हुआ। इसलिए उन्होंने तीसरी बार प्रयास किया और तीसरे ड्रॉप में साल 2011 में सीजी पीएमटी 25 वें रैंक के साथ क्वालिफाई किया। डॉ. गुप्ता कहते हैं, आप किस बैकग्राउंड से है ये मायने नहीं रखता, परीक्षा सिर्फ आपकी मेहनत और लगन देखती है। बिना मेहनत किए सफलता के सपने देखना बेईमानी है। इसलिए बिना कुछ सोचे बस पढ़ता चला गया। जब पहली बार रायपुर मेडिकल कॉलेज में कदम रखा तो लगा कि उस मेहनत का सुखद फल मिला है। इन तीन साल के ड्रॉप ने सिखाया कि जीतने के लिए कभी-कभी हारना भी जरूरी है। हार आपको बहुत कुछ सिखाकर जाता है। हार से निराश नहीं बल्कि हौसलों को बुलंद करना चाहिए।
एक साल किया सेल्फ प्रिपरेशन
डॉ. गुप्ता ने बताया कि शुरूआत में उन्होंने एक साल सेल्फ प्रिपरेशन किया। तैयारी अच्छी से नहीं हो पाई। सारा वक्त दिमाग इसी बात में उलझा रहा कि क्या पढ़ूं, क्या न पढूं। इसलिए लास्ट के दोनों साल सचदेवा कोचिंग भिलाई में एडमिशन लेकर वहां से पढ़ाई की। ड्रॉप इयर में लोग कई तरह की बातें करते थे। कई सवाल पूछते थे पर मैं उनकी बातों को नजरअंदाज करके बस पढ़ता चला गया। क्योंकि जानता था कि एक दिन मेहनत का फल जरूर मिलेगा। सीजी बोर्ड और हिंदी मीडियम स्टूडेंट होने के कारण बेस भी काफी कमजोर था। इसलिए काफी वक्त अपने बेसिक नॉलेज को सुधारने में भी लग गया। मार्गदर्शन के अभाव में मैंने 12 वीं के बाद तैयारी शुरू की जबकि आज के दौर में बच्चा 9 वीं, 10 वीं से ही मेडिकल एंट्रेस की तैयारी शुरू कर देता है, ताकि ड्रॉप न लेना पड़े। कई बार दिमाग में नकारात्मक बातें भी हावी हो जाती थी तब खुद को अपने लक्ष्य की याद दिलाता था।
सचदेवा में टीचर्स की मेहनत है काबिले तारीफ
दो साल सचदेवा कॉलेज भिलाई में कोचिंग करने वाले डॉ. गुप्ता ने बताया कि उन्होंने उस वक्त सचदेवा के काफी नाम सुना था। इसलिए तैयारी के लिए भिलाई आ गए। यहां के टीचर्स की मेहनत देखकर बच्चा दोगुनी मेहनत करने के लिए अपने आप ही मोटिवेट हो जाता है। मेरा फिजिक्स और कैमेस्ट्री दोनों ही वीक था। ऐसे में यहां के टीचर्स ने दोनों विषयों की ऐसी तैयारी करवाई कि आज भी पढ़ा हुआ बेसिक आगे की पढ़ाई में काम आ रहा है। शॉर्ट नोट्स पढ़ाई के दौरान काफी हेल्पफुल रहता है। ड्रॉप इयर फ्रसटेशन से भरा होता है, मैं भी काफी फ्रसटेट होता था तब सचदेवा के टीचर्स के मोटिवेशन से अच्छी तरह से पढ़ाई कर पाया। सचदेवा के डायरेक्टर चिरंजीव जैन सर की मोटिवेशन क्लास और उनकी प्रेरक कहानियां नकारात्मक बातों को दिमाग में हावी होने ही नहीं देता था। वे हमेशा कहा करते थे कि जीवन में स्मार्ट वर्क करके हम अपने रास्ते को और आसान बना सकते हैं। उनकी बातों को फॉलो करके मंजिल के करीब पहुंच पाया।
स्मार्ट स्टडी है जरूरी
नीट
की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स से कहना चाहूंगा कि सिर्फ पढऩा काफी नहीं है। पढऩे
के साथ स्मार्ट स्टडी प्लान और वर्क भी करना पड़ेगा। एग्जाम से ठीक पहले के एक-दो
महीने में समय कम और सिलेबस को रिविजन करने का दबाव ज्यादा होता है। ऐसे में
स्मार्ट प्लानिंग से हर विषय को समय पर रिविजन करने का मौका मिल जाता है। पुराने
पेपर साल्व करने से कॉन्फिडेंस बढ़ता है। इसलिए लास्ट की जगह शुरुआत से पेपर साल्व
करने की आदत डालें। ड्रॉप इयर में निराशा को हावी न होने दे। (the states. news)

