- घर वाले नहीं चाहते थे ड्रॉप हो इसलिए बीएससी के साथ की पीएमटी की तैयारी
- पढि़ए सीजी पीएमटी में टॉप 10 में जगह बनाने वाली डॉ. संगीता पात्रे की कहानी
भिलाई (mediasaheb.com)| घर वाले नहीं चाहते थे कि 12 वीं बोर्ड के बाद एक साल भी ड्रॉप हो इसलिए बीएससी फस्र्ट इयर में एडमिशन ले लिया। डॉक्टर बनने का जुनून इस कदर मन मस्तिष्क में छाया था कि मिड सेशन में किसी तरह पैरेंट्स को मेडिकल एंट्रेस की कोचिंग के लिए राजी किया। महज आठ महीने बाद सीजी पीएमटी में टॉप 10 में जगह बनाकर एमबीबीएस की सीट हासिल की। ये कहानी है भिलाई की जानी-मानी स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. संगीता पात्रे की। जिन्होंने बीएससी फस्र्ट इयर और पीएमटी दोनों ही एग्जाम में एक साथ टॉप किया। डॉ. संगीता कहती है कि अपना सपना पूरा करने के लिए कई बार कठिन रास्तों पर चलना पड़ता है लेकिन ये कठिनाई ही आपको सफलता के करीब लेकर जाती है। मैं बचपन में अपनी मां के साथ हॉस्पिटल जाती थी। वहां एक लेडी डॉक्टर मुझसे बहुत अच्छे तरीके से बातचीत करती थी। उनसे मैं इतनी प्रभावित हुई कि घर आकर पिता जी से पूछा कि डॉक्टर कैसे बनते हैं। उन्होंने कहा कि इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं शायद कोई एग्जाम देकर बनते हैं। तुम एक काम करना जब अगली बार मां के साथ हॉस्पिटल जाओगी तब उसी लेडी डॉक्टर से पूछ लेना। मैंने बेसब्री से हॉस्पिटल जाने का इंतजार करती रही। जब मां के साथ डॉक्टर के केबिन में गई तो उनसे पूछ ही लिया। उन्होंने बताया कि प्री मेडिकल एग्जाम क्वालिफाई करके डॉक्टर बनते हैं। उसी दिन मैंने डिसाइड कर लिया था कि अब मैं एक स्त्री रोग विशेषज्ञ बनूंगी।
पहले अटेम्ट में सलेक्शन छोड़कर लिया रिस्क
डॉ. संगीता पात्रे ने बताया कि साल 2003 में उन्होंने पहली बार मेडिकल एंट्रेस दिया। उस वक्त भी बिलासपुर मेडिकल कॉलेज के लिए सलेक्शन हो गया लेकिन विषम आर्थिक परिस्थिति के कारण सीट छोडऩा पड़ा। 2004 में दूसरे प्रयास में रायपुर मेडिकल कॉलेज मिला तो पैरेंट्स खुशी से झूम उठे। जिस वक्त मेरे घर सीजी पीएमटी में टॉप 10 में रैंक आने की खबर पहुंची उस वक्त मैं घर में बर्तन मांज रही थी। पापा ने खुशी से मुझे गोदी में उठा लिया। उस दिन ऐसा लगा कि पता नहीं कौन सा खजाना मिल गया। आज जब किसी गर्भवती महिला का क्रिटिकल कंडीशन में प्रसव कराती हूं और थोड़ी ही देर में जच्चा-बच्चा की मुस्कान देखती हूं तो खुद के डॉक्टर होने पर बहुत गर्व होता है। हमारे समाज में आज भी महिलाओं में अपने स्वास्थ्य को लेकर ज्यादा जागरूकता नहीं है। ऐसे में एक स्त्री रोग विशेषज्ञ के रूप में जिम्मेदारी भी बड़ जाती है।
चिरंजीव जैन सर ने की आधी फीस माफ
डॉ. संगीता ने बताया कि उन्होंने मिड सेशन में सचदेवा कॉलेज भिलाई मेडिकल कोचिंग के लिए ज्वाइन किया। उस समय फिजिक्स बहुत ज्यादा वीक हुआ करता था। सचदेवा के टीचर्स ने ट्रिक और टिप्स से ऐसे पढ़ाई करवाई की फिजिक्स काफी स्ट्रांग हो गया। सचदेवा के डायरेक्टर चिरंजीव जैन सर ने पढ़ाई में काफी सपोर्ट किया। घर की कंडीशन उतनी अच्छी नहीं थी तब जैन सर ने मदद का हाथ बढ़ाते हुए कोचिंग की आधी फीस माफ कर दी। इसके कारण चिंता मुक्त होकर ठीक से तैयारी कर पाई। इसलिए पापा हमेशा कहते हैं कि जिस शहर ने आपको इतना कुछ दिया है अब उसे कुछ देने की बारी तुम्हारी है। सचदेवा के टेस्ट सीरिज और डाउट क्लासेस मेरी पढ़ाई में काफी हेल्पफुल रहा। सब्जेक्ट के बेसिक को समझ पाई।
मोबाइल से रहें दूर
जो बच्चे नीट की तैयारी कर रहे हैं उनसे यही कहना चाहूंगी कि मोबाइल से दूरी बनाकर रखे। मोबाइल का उतना ही इस्तेमाल करना जितना जरूरी है। क्योंकि एग्जाम में अगर चूके तो पूरे एक साल इंतजार करना पड़ेगा। रही बात मोबाइल चलाने की तो सलेक्शन के बाद आप जितना चाहे मोबाइल चला लो कोई नहीं रोकेगा। मैं जब तैयारी करती थी तो अपने नाम के आगे डॉक्टर लगाकर खुद को इमेजिन करती थी। सच कहूं ये इमेजिनेशन ही मुझे अपने सपने को पूरा करने की शक्ति और लगन देता था। (the states. news)

