- बचपन में मैं सोचता था डॉक्टर को भगवान बनाकर आसमान से भेजते हैं
- गांव के स्कूल में पढ़कर गरीब किसान का बेटा बना गांव का पहला डॉक्टर,
भिलाई (mediasaheb.com). किसी ने कहा था सपना हमेशा बड़ा देखो, चांद नहीं मिला तो क्या हुआ आसमान तक तो पहुंचोगे जरूर। ये बात दिमाग में ऐसे बैठी कि जांजगीर जिले के छोटे से गांव बलौदा के गरीब किसान का बेटा आज एम्स रायपुर में डॉक्टर बनकर गरीबों की सेवा कर रहा है। ये कहानी है डॉ. लेखेश्वर यादव की जिन्होंने पीएमटी एग्जाम से ठीक पहले गिव अप कर दिया था। पूरी तैयारी के बाद भी इतने डिप्रश्ेान में चले गए थे कि वो एग्जाम में बैठना तक नहीं चाहते थे। सही समय में सही काउंसलिंग और मागदर्शन ने उनकी जिंदगी ऐसी बदल की वे न सिर्फ अपने गांव बल्कि अपने समाज के भी पहले डॉक्टर बने। साल 2009 में सीजी पीएमटी क्वालिफाई करके रायपुर मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले डॉ. लेखेश्वर ने बताया कि वे उस गांव से ताल्लुक रखते हैं जहां डॉक्टर कैसे बनते हैं ये बताने वाला भी कोई नहीं था। बचपन में मैं सोचता था कि डॉक्टर को भगवान बनाकर भेजते होंगे, मुझे नहीं पता था कि डॉक्टर कैसे बनते हैं पर इच्छा जरूर थी डॉक्टर बनने की। गांव के हिंदी मीडियम स्कूल में पढ़कर जब 12 वीं बोर्ड की परीक्षा पास की तो पहली बार मेडिकल एंट्रेस सीपीएमटी, सीजी पीएमटी का नाम सुना। पिता की किसानी के भरोसे घर चलता था ऐसे में विपरीत आर्थिक परिस्थितियों के बीच बड़े भाई ने किसी तरह से पैसों का इंतजाम करके मुझे पढऩे के लिए भिलाई भेजा ताकि एक साल तैयारी करके खुद का सपना पूरा कर सकूं। इन एक साल में मुझे किताबों के अलावा कुछ भी नजर नहीं आता था।
बेसिक समझने में लग गया काफी समय
डॉ. लेखेश्वर ने बताया कि ग्रामीण पृष्ठभूमि और हिंदी मीडियम, सीजी बोर्ड स्कूल से पढ़ाई के कारण उन्हें बेसिक समझने में ही काफी समय लग गया। हमने स्कूल में केवल उतना ही पढ़ा था जितना टीचर ने एग्जाम के लिए पढ़ाया था पर मेडिकल एंट्रेस के लिए बेसिक से शुरूआत करना था। ऐसे में शुरू-शुरू में कुछ समझ नहीं आता था। सचदेवा कोचिंग में हर विषय के लिए एक अलग टीचर पढ़ाने आते थे उनके इजी ट्रिक्स सीखकर थोड़ा आत्मविश्वास आया। फिर मैंने कभी पलटकर नहीं देखा। मन में बस यही चलता रहता था कि परिवार ने कितनी विपरीति आर्थिक परिस्थिति में मुझे पढऩे भेजा है इसलिए बिना सफल हुए घर नहीं लौटना चाहता था।
प्री एग्जाम में कम नंबर आए तो कर दिया गिव अप
डॉ. लेखेश्वर ने बताया कि सचदेवा न्यू पीटी कॉलेज में टेस्ट सीरिज के अलावा एक प्री एग्जाम होता है। यह परीक्षा पीएमटी की ही तरह होती है जिसमें तय समय में आपको पेपर साल्व करना होता है। इस प्री एग्जाम में मेरे बहुत कम नंबर आए। जिसके बाद मैं अंदर से काफी टूट गया। मन में ये बात बैठ गई कि जब प्री एग्जाम में इतने कम नंबर आए तो फाइनल एग्जाम में मैं कैसे सलेक्ट हो पाऊंगा। ये बात सोचकर मैंने गिवअप कर दिया। मुझे लगा कि अब मैं एग्जाम नहीं दे पाऊंगा। ऐसे समय में मानसिक रूप से काफी परेशान रहने लगा तब सचदेवा के डायरेक्टर चिरंजीव जैन सर ने मेरी काउंसलिंग की। उन्होंने कहा कि प्री एग्जाम में कम नंबर आए तो क्या हुआ अभी फाइनल एग्जाम बाकी है। खुद पर भरोसा रखो जब आपको लगे कि आप गिवअप कर रहे तब समझना कि मंजिल से बस एक कदम दूर हो। कुछ बहुत अच्छा होने वाला इसलिए आत्मबल को दृढ़ करके अच्छे से एग्जाम दो। उनकी बातों पर अमलकर मैंने मेडिकल एंट्रेस दिया और फाइनली अच्छे रैंक से सलेक्ट भी हो गया।
मैं सिर्फ डॉक्टर नहीं बनना चाहता था इसलिए चुना नया विषय
डॉ. लेखेश्वर ने बताया कि वे एम्स रायपुर से एमडी फोरेसिंक मेडिसीन की पढ़ाई करने वाले छत्तीसगढ़ के पहले स्टूडेंट हैं। उस वक्त इस विषय में पीजी पहली बार एम्स रायपुर में शुरू किया गया था। एमबीबीएस करते हुए मैंने सोचता था कि मैं केवल डॉक्टर बनकर पूरा जीवन नहीं काटना चाहता। इसलिए हर विषय की पढ़ाई करने के लिए पीजी में इस कोर्स को चुना। इसमें हमें ग्यानो, सर्जरी, ऑर्थो, स्कीन, हार्ट हर विषय की पढ़ाई के साथ मेडिकल की लीगल टर्म को हैंडल करना बताया जाता है। आज जब एम्स रायपुर के बड़े मेडिकल और लीगल फैसले में मैं शामिल रहता हूं तो खुद पर गर्व होता है।
हार्ड एंड स्मार्ट वर्क की है जरूरत
नीट की तैयारी कर रहे स्टूडेंट को महत्वपूर्ण टिप्स देते हुए डॉ. लेखेश्वर कहते हैं कि आज के दौर में हार्ड के साथ स्मार्ट वर्क भी जरूरी है। अगर कभी निराश हो तो बिना झिझक बड़ों से बात करो शायद उस समस्या का हल उसी वक्त निकाल जाए। गिवअप करने का विचार मन में आए तो ये सोचकर चलो कि सफलता से बस एक कदम का फासला है। इसलिए पूरा जोर लगा दो। पुराने प्रश्नपत्र जरूर साल्व करें इससे आपको एग्जाम का पैटर्न समझ आता है।(the states. news)

