भिलाई (media saheb.com)| आठवीं कक्षा में स्कूल की प्रिंसिपल मैडम का कैंसर से निधन हो गया। इस बात ने मासूम श्रुति के मन में गहरा असर डाला। श्रुति अपनी मैडम को बहुत पसंद करती थी लेकिन उनके बीमारी से असमय निधन ने अंदर तक तोड़ दिया। तब नन्हीं बच्ची ने आठवीं कक्षा में मन में ठाना कि अब डॉक्टर बनकर लोगों को नई जिंदगी दूंगी। आज वही स्टूडेंट डॉक्टर बनकर मरीजों की सेवा के साथ मेडिकल स्टूडेंट को डॉक्टरी का पाठ भी पढ़ा रही है। जी हां हम बात कर रहे हैं शंकराचार्य मेडिकल कॉलेज की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. श्रुति दुबे की, जिन्होंने बेहद कम समय में सफलता का वो मुकाम हासिल किया जिसे देखकर दुनिया हैरान है। बचपन से पढ़ाई में जुझारू रही डॉ. श्रुति कहती हैं कि मेडिकल एंट्रेस में हर साल लाखों बच्चे बैठते हैं लेकिन आपको उस भीड़ से नहीं खुद से जीतना है। मैंने यही सोचकर पढ़ाई की और हमेशा खुद को याद दिलाया कि मुझे सिर्फ एक सीट चाहिए। यही मेरी लाइफ का सक्सेस मंत्र बना।
सफल स्टूडेंट्स का पढ़ती थी इंटरव्यू
डॉ. श्रुति ने बताया कि उन्होंने बहुत कम उम्र में डॉक्टर बनने का दृढ़ निश्चय कर लिया था। न्यूज पेपर में मेडिकल एंट्रेस क्वालिफाई करने वाले स्टूडेंट्स के इंटरव्यू छपते थे तो उसे मैं बड़े इंटरेस्ट से पढ़ती थी। इंटरव्यू का पेपर कटिंग भी साथ रखती थी। हर सफलता के पीछे एक कहानी होती थी, तब लगा कि जब वो कर सकते हैं तो मैं क्यों नहीं। सफलता की यही कहानियां हमेशा मुझे आगे बढऩे के लिए प्रेरित करती थी। यही कारण है कि मैं ड्रॉप लेकर भी कभी हताश नहीं हुई। दूसरे प्रयास में साल 2003 में सीजी पीएमटी क्वालिफाई करके अपने सपनों के घर रायपुर मेडिकल कॉलेज पहुंच गई।
बायो-मैथ्स लेकर दिया बोर्ड एग्जाम
डॉ. श्रुति ने बताया कि उन्होंने 12 वीं बोर्ड बायो-मैथ्स सब्जेक्ट के साथ दिया। मेडिकल एंट्रेस क्वालिफाई करने वाले बहुत सारे सीनियर्स का ये मानना था कि बायो-मैथ्स साथ लेकर पढऩे से मेडिकल एंट्रेस में फिजिक्स सब्जेक्ट की तैयारी में बहुत ज्यादा हेल्प मिलता है। इसलिए मैंने बायो के साथ मैथ्स की भी पढ़ाई की। वैसे भी गणित बहुत की इंटरेस्टिंग विषय है। ये जीवन के हर मोड़ पर काम आता है, साथ ही आपकी तर्क शक्ति को बढ़ाता है। मेरा पहला अटेम्ट टाइम मैनेजमेंट ठीक से नहीं होने के कारण खराब चला गया। तब सचदेवा न्यू पीटी कॉलेज के डायरेक्टर चिरंजीव जैन सर ने गाइड किया। उन्होंने बताया कि एग्जाम हॉल में किस पैटर्न में सवालों को साल्व करना है जिससे हर विषय के लिए पर्याप्त समय मिल सके। एक साल के ड्रॉप इयर में सचदेवा के टीचर्स ने हर विषय की बेसिक से पढ़ाई करवाई। साथ ही टेस्ट सीरिज में एग्जाम के पैटने को समझने का भी मौका मिला।
धैय न खोए
डॉ. श्रुति कहती हैं कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में सलेक्ट होने के लिए धैर्य बेहद जरूरी है। जो बच्चे इस साल नीट की तैयारी कर रहे हैं उनसे यही कहूंगी कि अगर पहले प्रयास में सफल नहीं होते तब भी अपना धैर्य बनाकर रखें। खुद की मेहनत पर भरोसा करें। आपने जो पढ़ा है वो कभी जाया नहीं जाता बस थोड़ा वक्त देकर और मेहनत करें, सफलता अवश्य मिलेगी। पढ़ाई के साथ अपने सेहत का भी ख्याल रखें। सेहत अच्छी होगी तभी आप अच्छे से एग्जाम दे पाएंगे।.(the states. news)

