देश की बुनियादी स्वास्थ्य सेवा को बेहतर करने कई राष्ट्रीय कार्यक्रमों से जुड़कर किया काम
भिलाई. (mediasaheb.com) वैसे से आमतौर पर डॉक्टर मरीजों की नब्ज टटोलते हैं लेकिन हम आज एक ऐसे डॉक्टर से आपको रूबरू करवा रहे हैं जो कन्फ्यूज युवाओं को सही मागदर्शन देकर उनके सपनों को नई उड़ान दे रहे हैं। जी हां सुनने में अटपटा लगे लेकिन भिलाई के डॉक्टर किशोर दत्ता आज हजारों युवाओं के न सिर्फ कैरियर कोच हैं बल्कि डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ के एक्सपर्ट ट्रेनर भी हैं। यही कारण हैं कि छत्तीसगढ़ के अलावा देश के आधे से ज्यादा राज्यों में उनकी तूती बोलती है। आईआईएम जैसे संस्थान हो या फिर देश के नामी अस्पताल, हर जगह उनके नाम को पहचान में बदलने वाला एक स्टूडेंट आपको मिल ही जाएगा। अपनी काबलियत के दम पर इन्होंने यूनिसेफ, मिनिस्ट्री ऑफ यूथ अफेयर्स, राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना और जिंदल स्टील प्लांट रायगढ़ जैसे संस्थानों का हिस्सा बनकर देश के बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में काम किया है। छत्तीसगढ़ में नक्सलियों का गढ़ माने जाने वाले दंतेवाड़ा और सुकमा जिले में यूनिसेफ के स्पेशल प्रोजेक्ट से जुड़कर गरीब आदिवासियों का इलाज करके एक तरफ पीडि़त मानवता की सेवा की तो दूसरी ओर कुपोषित और जरूरतमंद गरीब बच्चों के पोषण पुनर्वास और प्रारंभिक शिक्षा की बागडोर भी संभाली। कैरियर में हर काम को चैलेंज के रूप में लेने वाले डॉ. दत्ता कहते हैं मैं सिर्फ डॉक्टर बनकर अस्पताल तक सीमित नहीं रहना चाहता था इसलिए अपने ज्ञान को बांटने का फैसला किया। जब किसी युवा को कैरियर काउंसलिंग के जरिए गाइड करता हूं तो लगता है कि देश की प्रगति में अपना योगदान दे रहा हूं।
बचपन से थी एक अलग पहचान की तलाश
बचपन से अपनी एक अलग पहचान के लिए लडऩे वाले डॉ. दत्ता ने बताया कि उन्होंने यूक्रेन से पहले एमबीबीएस और फिर एमडी मेडिसीन की पढ़ाई की। लगभग दस सालों तक विदेश के कई नामी अस्पतालों में भी काम किया। इस बीच वतन की मिट्टी की याद सताती रही फिर क्या बैग बांधा और मिनी इंडिया भिलाई आ गया। कुछ दिनों तक समझ में नहीं आया कि क्या करूं, क्योंकि मैं कुछ अलग करना चाहता था। फिर मैंने पीजीडीएम हेल्थ प्रोफेशनल मैनेजमेंट की पढ़ाई अमेठी यूनिवर्सिटी से की। पढ़ाई के दौरान ही मिनिस्ट्री और यूथ अफेयर्स के साथ काम करने का मौका मिल गया। धीरे-धीरे रास्ते खुलते गए आज डॉक्टर के अलावा भी कोच एंड ट्रेनर के रूप में मेरी अलग पहचान है।
एक साल ड्रॉप लेकर तैयारी की
डॉ. दत्ता ने बताया कि उन्होंने 12 वीं बोर्ड के बाद एक साल ड्रॉप लेकर मेडिकल एंट्रेस की तैयारी की। पैरेंट्स चाहते थे कि डॉक्टर बनूं इसलिए मेहनत में कोई कसर नहीं छोडऩा चाहता था। अफसोस कुछ नंबरों से एमबीबीएस की सीट नहीं मिल पाई। तब पैरेंट्स ने डेंटल कॉलेज में एडमिशन लेने कहा मेरा झुकाव एमबीबीएस की ओर था। ऐसे में सीनियर्स ने यूक्रेन से एमबीबीएस करने की सलाह दी। शुरूआत में विदेश में पढ़ाई करने में बहुत दिक्कत आई। रशियन लैग्वेंज में पढ़ाई होती थी इसलिए रशियन भी सीखना पड़ा। जब वापस भिलाई आया तो अचानक कैरियर बदलने के फैसले से पैरेंट्स काफी परेशान हो गए। किसी तरह मैंने उन्हें भरोसा दिलाते हुए कदम आगे बढ़ाए। आज अपने फैसले से काफी खुश हूं।
सचदेवा के बिना अधूरी है सफलता
डॉ. किशोर दत्ता ने बताया कि उन्होंने मेडिकल एंट्रेस की तैयारी के लिए सचदेवा में एडमिशन लिया था। वहां के टीचर्स और डायरेक्टर चिरंजीव जैन सर ने हमेशा मोटिवेट किया कि तुम कर सकते हो। कुछ नंबरों से जब चूक गया तब भी वे मुझे बराबर गाइड करते रहे। वो हमेशा कहते थे कि लाइफ में कभी हारने से डरना मत, क्योंकि इंसान जब हारता है तभी जीत का जुनून दिल में जागता है। उनकी कही ये लाइन आज तक मेरे जेहन में है। बच्चों और पैरेंट्स के स्पेशल काउंसलिंग प्रोग्राम पत्रिका पैरेंटिंग टुडे में जैन सर के साथ कोच एंड मेंटर बनकर स्टेज में बैठकर मैंने बहुत कुछ सीखा। आज भी जब कहीं मैं गलत होता हूं तो वो मुझे टोकते हुए गलती सुधारने कह देते हैं। एक गुरु और शिष्य के रिश्ते की ये खूबसूरती आज भी मेरे जीवन में बनी हुई है। इसलिए निरंतर स्टूडेंट बनकर हर साल मैं कोई न कोई सर्टिफिकेट कोर्स जरूर करता हूं।
खुद से करो सवाल
डॉ. रेड्डी फाउंडेशन हेल्थ एंड एजुकेशन के साथ जुड़कर वर्तमान में देश के छह राज्यों में डॉक्टर्स और नर्सिंग स्टाफ को ट्रेनिंग देने वाले डॉक्टर दत्ता कहते हैं कि जब भी आप लक्ष्य निर्धारित करो एक बार खुद से सवाल जरूर करो। अगर डॉक्टर बनने चाहते हैं तो एप्रॉन और हॉस्पिटल में खुद को इमेजिन कीजिए। यदि आप इमेजिनेशन में एंज्वाय करते हैं तो उस सपने को पूरा करने के लिए जी जान लगा दो। उसके पूरा होने तक गोल, वैल्यू और एटीट्यूड बरकार रखो सफलता जल्दी मिलेगी।(the states. news)

