एक साल का ड्रॉप लेकर दो राज्यों का मेडिकल एंट्रेस एक साथ किया क्वालीफाई
भिलाई(media saheb.com) बायो-मैथ्स लेकर मेडिकल और इंजीनियरिंग एंट्रेस की साथ-साथ तैयारी करने वाले भिलाई के डॉक्टर रौनक दास शुरूआत में कैरियर सलेक्शन को लेकर काफी कन्फ्यूज थे। एक तरफ जहां उन्हें मैथ्स में रूचि थी तो दूसरी ओर पैरेंट्स का कहना था कि डॉक्टरी जैसा कोई दूसरा प्रोफेशन नहीं हो सकता। इसी उधेड़बुन के बीच पहले प्रयास में ऑल इंडिया कोटे से अच्छा इंजीनियरिंग कॉलेज मिलने के कारण एडमिशन भी ले लिया। डॉ. रौनक कहते हैं कि पता नहीं क्यों बार-बार मन एमबीबीएस की ओर खींचा चला जा रहा था। इसलिए इंजीनियरिंग कॉलेज छोड़कर एक साल ड्रॉप लेकर मेडिकल की तैयारी करने का फैसला किया। मेरी बॉयोलॉजी कमजोर है ये जानते हुए भी एक सेफ कैरियर को छोड़कर बहुत बड़ा रिस्क ले लिया। इसे खुद पर भरोसा ही कहना चाहूंगा कि न सिर्फ मैंने एमबीबीएस की सीट हासिल की बल्कि दो राज्यों के मेडिकल एंट्रेस एक साथ अच्छे रैंक से भी क्वालीफाई किया। अंतत: कटक मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई के बाद पीजी किया और आज प्रदेश के नामी मेडिकल कॉलेज में मरीजों का इलाज करते हुए मेडिकल स्टूडेंट्स को पढ़ा भी रहा हूं।
पापा के भरोसे से मिला कुछ नया करने का बल
डॉ. रौनक ने बताया कि उनकी स्कूलिंग भिलाई के सेक्टर 10 स्कूल से हुई है। पिता टीचर थे इसलिए घर में शुरू से पढ़ाई का माहौल था। पापा हमेशा कहते थे कि कुछ नया ट्राई करना चाहिए। इंजीनियरिंग तो सभी लोग कर रहे हैं तुम्हें डॉक्टरी की ओर ध्यान देना चाहिए। डॉक्टर को सेवा और सम्मान दोनों ज्यादा मिलता है। पापा की इन्हीं बातों ने मुझे मेडिकल फील्ड में कदम रखने के लिए प्रोत्साहित किया। आज जब पीछे मुड़कर देखता हूं तो लगता है कि मेरा फैसला बिल्कुल सही था। खुद को एक डॉक्टर रूप में खड़ा देखकर न सिर्फ मुझे बल्कि मेरे परिवार को भी गर्व होता है। इस बात की और भी ज्यादा खुशी होती है कि जिस जगह मैं पैदा हुआ आज डॉक्टर बनकर वहीं के लोगों की सेवा कर पा रहा हूं।
सचदेवा के बिना असंभव था मेडिकल एंट्रेस पास करना
12 वीं बोर्ड के बाद अचानक इंजीनियरिंग छोड़कर मेडिकल की सीट हासिल करने के लिए खुद को तैयार करने में पहले थोड़ी दिक्कत हुई। सचदेवा न्यू पीटी कॉलेज के टीचर्स ने इजी ट्रिक्स और डीप नॉलेज से इस मुश्किल को भी आसान बना दिया। जिस बॉयोलॉजी को मैं कठिन समझता था उसे टीचर्स इस अंदाज में पढ़ाते थे कि मेडिकल कॉलेज में दाखिले तक मुझे बॉयोलॉजी से प्यार हो गया। सचदेवा के डायरेक्टर चिरंजीव जैन सर की मोटिवेशनल बातें सुनकर लगता था कि जीवन में कुछ भी असंभव नहीं है। यदि इंसान ठान ले तो हर वो चीज अपनी मेहनत से हासिल कर सकता है जिसे लोग असंभव की श्रेणी में रख देते हैं। जैन सर बीच-बीच में बच्चों की पर्सनल काउंसलिंग भी करते थे जो पढ़ाई के साथ स्ट्रेस को कम करने में काफी काम आया।
खुद को करे मोटिवेट
जो बच्चे नीट की तैयारी कर रहे हैं उनसे कहना चाहूंगा कि आप किसी और की बातों से कुछ वक्त के लिए जरूर मोटिवेट हो सकते हैं लेकिन हर दिन तरोताजा रहने के लिए आपको खुद को मोटिवेट करना होगा। सुबह का वक्त पढऩे के लिए सबसे अच्छा होता है इसलिए कोशिश करें कि सुबह जल्दी उठकर पढ़ाई करे। हर टेस्ट को गंभीरता से लें क्योंकि यही टेस्ट बताते है कि आपकी तैयारी में कितनी कमी है। अपने लक्ष्य के प्रति हमेशा फोकस रहे। भटकाव से बचने के लिए खुद को याद दिलाएं कि आप क्या बनना चाहते हैं और क्यों बनना चाहते हैं। तभी सफलता के करीब पहुंच पाएंगे।(the states. news)

