हॉस्टल में रूममेट्स कहती थीं कि क्या दिनभर पढ़ती रहती है, थोड़ा इंज्वाय कर
भिलाई(media
saheb.com).
कई बार सेहत साथ न दे तो मेहनत भी जाया होने का डर सताता रहता है। कुछ ऐसा ही हुआ
था महासमुंद की रहने वाली शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. योगिता राठी के साथ। पीएमटी
एग्जाम के कुछ दिन पहले ही उन्हें अल्सर हो गया। जिसके कारण आखिरी समय में न
ही रिविजन कर पाई और न ही विषयों को ठीक से पढ़ पाई। डिप्रेशन में वह एग्जाम भी
नहीं देना चाहती थी। इसी उधेड़बुन में तबीयत और भी ज्यादा बिगड़ गई। हालत ये हो गई
कि ड्रिप लगाकर एग्जाम हॉल में जाना पड़ा। कहते हैं खुद पर भरोसा हो तो आसमान को
भी झुकना पड़ता है। योगिता ने बिना कुछ सोचे सिर्फ पेपर पर फोकस किया। जब पीएमटी
का रिजल्ट आया तो मेडिकल कॉलेज में सलेक्शन की खबर सुनकर पूरा परिवार खुशी से झूम
उठा। ड्रॉप लेकर मेडिकल एंट्रेस क्लीयर करने वाली डॉ. योगिता कहती है कि सफल होने
और सफलता को इंज्वाय करने के लिए सेहतमंद होना भी जरूरी है। इसलिए हर स्टूडेंट को
पढ़ाई के साथ-साथ अपनी सेहत का भी ख्याल रखना चाहिए। बीमारियों का इलाज करना है तो
खुद को भी रोगमुक्त रखना एक डॉक्टर की बड़ी जिम्मेदारी होती है।
मेडिकल बैकग्राउंड परिवार से मिली
पे्ररणा
डॉ. योगिता ने बताया कि उनके घर में
मेडिकल स्टोर था। पिता जी की मेडिकल शॉप में अक्सर जाना होता था। बचपन में दवाईयों
के बारे में जानने के लिए मैं काफी उत्सुक रहती थी ताकि पिता की मदद कर सकूं। इसी
उत्सुकता ने मेरे मन में डॉक्टरी की पढ़ाई की नींव रखी। 11 वीं में जब विषय चयन की बारी आई तो सीधे
बायो सब्जेक्ट चूज कर लिया। शुरूआत में कौन-कौन सी परीक्षाएं मेडिकल कॉलेज में
दाखिले के लिए देनी होती है इसकी काफी कम जानकारी थी। धीरे-धीरे पढ़ाई के साथ-साथ
ज्ञान भी बढ़ता चला गया। मेडिकल एंट्रेस की तैयारी कर रही बहन ने भी काफी
मार्गदर्शन किया। अक्सर बायो वाले स्टूडेंट के लिए बायो काफी इजी होता है लेकिन
मुझे बायो बहुत कठिन लगता था। शुरूआत से गणित पसंदीदा विषय था इसलिए फिजिक्स और
कैमेस्ट्री पीएमटी एग्जाम में मेरे लिए प्लस प्वाइंट बना। नॉलेज और लॉजिक दोनों का
यूज एक साथ किया जाए तो कई सवाल अपने आप ही बन जाते हैं।
सचदेवा में ड्रॉपर्स को देखकर मिलती थी
प्रेरणा
डॉ. योगिता ने बताया कि उनकी बहन ने
मेडिकल एंट्रेस की तैयारी के लिए सचदेवा कॉलेज को चुना था। इसलिए उन्होंने भी
सचदेवा ज्वाइन कर लिया। शुरूआत में भिलाई के माहौल में ढलने में काफी वक्त लग गया।
हॉस्टल में रूम मेट्स अक्सर टोकते हुए कहते थे कि क्या दिनभर पढ़ती रहती है,
थोड़ा इंज्वाय भी कर लिया कर। मैं अपना
ड्रॉप इयर बर्बाद नहीं करना चाहती थी इसलिए पूरी तरह पढ़ाई के लिए ही समर्पित रही।
सचदेवा में काफी सारे ड्रॉपर्स साथ में तैयारी कर रहे थे इसलिए ड्रॉप इयर में
निराशा की बजाय काफी कुछ सीखने के लिए मिला। सचदेवा के टीचर्स के पढ़ाने का तरीका
इतना यूनिक है कि वहां पढऩे वाला हर बच्चा अपने ही आप की काम्पिटिशन के लिए तैयार
हो जाता है। यहां कि शॉर्ट नोट्स से एग्जाम के आखिरी समय में रिविजन करने में काफी
मदद मिलती है। सचदेवा के डायरेक्टर चिरंजीव जैन सर की मोटिवेशनल क्लास कोई भला
कैसे मिस कर सकता है। वो हमेशा कहा करते थे सफल होने वाले कुछ नया नहीं करते बस
आपसे से थोड़ी ज्यादा मेहनत करते हैं। इसलिए मैं अपनी पढ़ाई में कोई कमी नहीं
छोडऩा चाहती थी। जैन सर की बातें सुनकर लगता था कि सफलता चंद कदम ही दूर खड़ी है।
हमेशा आगे बढऩे की प्रेरणा उनसे मिली जो लाइफ में आज भी काम आ रहा है।
सोशल मीडिया से रहे दूर
जो बच्चे इस साल नीट की तैयारी कर रहे
हैं उनसे कहना चाहूंगी कि आप सोशल मीडिया से दूरी बनाकर रखिए। सोशल मीडिया में
इंगेज होकर अपना काफी कीमती समय बर्बाद कर देते हैं। यहां सीखने के लिए कम और
ध्यान भटकाने वाली चीजें ज्यादा मिलती है। हो सके तो अर्ली मॉर्निंग उठकर पढऩे की
आदत डाले। इस समय माइंड फ्रैश और डिस्टर्बेंस काफी कम होता है। इसलिए पढ़ी हुई
चीजें काफी लंबी समय तक याद रहती है। लोग क्या कर रहे हैं, क्या कर रहें ये देखने और सोचने की बजाय
सिर्फ अपने पढ़ाई पर ध्यान लगाए। सफलता जरूर मिलेगी। (the states. news)

