माता-पिता चाहते थे बेटी जो भी करे बस अपने पैरों में खड़े हो जाए
भिलाई(mediasaheb.com)| बायो मैथ्स लेकर
सीजी पीएमटी क्वालिफाई करने वाली भिलाई की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. नम्रता पांडेय
का पसंदीदा सब्जेक्ट मैथ्स था। 12 वीं बोर्ड के बाद एक साल ड्रॉप लेकर जगदलपुर
मेडिकल कॉलेज के लिए सलेक्ट होने वाली डॉ. नम्रता ने बताया कि उन्होंने बायो और
मैथ्स साथ लेकर बोर्ड एग्जाम क्लीयर किया। बचपन से ही डॉक्टर को देखकर उनके जैसे
बनने की मन में इच्छा होती थी। साथ ही छोटे-भाई बहनों की पढ़ाई खासकर मैथ्स में
पढ़ाने में बड़ा मजा भी आता था। इसलिए दोनों विषयों को साथ में लेकर अपने कैरियर
में आगे बढऩे का सोचा जो काफी हद तक सही फैसला रहा। जब मेडिकल एंट्रेस की तैयारी
कर रही थी तब मां-पापा ने बस इतना ही कहा कि आप जो भी करो बस खुद के पैरों पर खड़ा
हो जाओ। उनकी ये बातें मेरे लिए किसी संजीवनी से कम नहीं थी। इसलिए मैं अपने घर की
पहली डॉक्टर बन पाई। मैं हमेशा लाइफ में हार्ड वर्क और कुछ पाने के लिए सेक्रिफाइस
को बहुत महत्व देती हूं, क्योंकि इन दोनों के बिना सफलता मिलना मुश्किल है।
गेस्ट सेशन में स्कूल के प्राचार्य की बातें सुनकर मिली प्रेरणा
साल 2012 में सीजी पीएमटी क्वालिफाई करने वाली डॉ. नम्रता
ने बताया कि उन्हें सबसे ज्यादा प्रेरणा सचदेवा के गेस्ट सेशन में स्कूल की
प्रिंसिपल की बातों को सुनकर मिली थी। गेस्ट सेशन में आए प्राचार्य ने बताया कि एक
बच्चा जीवन में बड़ा आदमी बनना चाहता था, किसी ने उससे कह दिया कि तुम्हारे हाथ में बड़ा आदमी बनने का
लकीर ही नहीं। उस बच्चे ने एक पत्थर लिया और हाथ में पत्थर से लकीर बनाते हुए कहा
कि ये देखो मेरी मेहनत का लकीर। उस कहानी का सार समझाते हुए प्राचार्य ने बताया कि
जीवन में कोई भी कार्य असंभव नहीं है, बस जरूरत है तो हार्ड वर्क और डेडिकेशन की फिर मुश्किल काम भी
संभव हो जाता है। उनकी बातें सुनकर मंैने कई दिनों तक खुद को परखा फिर हार्ड वर्क
करना शुरू कर दिया।
जैन सर के लिए बनना चाहती थी डॉक्टर
सचदेवा कोचिंग को मेडिकल एंट्रेस की तैयारी के लिए चुनने वाली
डॉ. नम्रता ने बताया कि वो सचदेवा के डायरेक्टर चिंरजीव जैन सर के लिए डॉक्टर बनना
चाहती थी। चिरंजीव जैन सर जब हमारी काउंसलिंग करते हुए मोटिवेट करते थे तब लगता था
कि जो आदमी हमें सफलता के शिखर पर देखना चाहता है, कम से कम उसके लिए तो हमें डॉक्टर जरूर
बनना चाहिए। उनके जैसा गुरु मिलना बहुत मुश्किल है जीवन में। सचदेवा के टीचर्स तो
अपने आप में अमेजिंग हैं। पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों को कैसे मोरल सपोर्ट देना है ये
उनसे बेहतर और कोई कर ही नहीं सकता। क्लासरूम में भी छोटे-छोटे टेस्ट में एक टॉफी
के लिए भी हम जुनून के हद तक कॉम्पिटिशन करते थे। यहां का फ्रेंडली और पॉजिटिव
माहौल हर बच्चे को आगे बढऩे के लिए प्रेरणा देता है।
हार्ड वर्क का कोई विकल्प नहीं
नीट की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स से कहना चाहूंगी कि हार्ड वर्क
का कोई विकल्प नहीं है। आपको सफल होने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी। जिस विषय में
आप कमजोर हो उसे एस्ट्रा टाइम देकर पढ़ो। कोशिश करो कि सुबह अर्ली मॉर्निंग उठकर
कठिन सब्जेक्ट की पढ़ाई करो। इससे आपकी रेगुलर प्रेक्टिस बढ़ेगी और कॉन्फिडेंस भी
आएगा।(the states. news)

