भिलाई(mediasaheb.com) नीट के पहले प्रयास में ओएमआर शीट में एक गलती से पूरे एक साल के कड़ी मेहनत पर पानी फिर गया। तैयारी होने के बाद भी नीट क्वालिफाई नहीं कर पाई। इसके बाद मैंने पढ़ाई छोडऩे का ही मन बना लिया था। कई महीनों तक नीट के बारे में सोचा ही नहीं। निराशा इस कदर थी कि मैं किताबों को हाथ भी नहीं लगाना चाहती थी। ऐसे में पापा ने समझाया कि क्या हुआ पहली कोशिश में फेल हो गई, दूसरी बार जरूर सफल होगी। उनकी आंखों में उम्मीद और आशा की किरण देखकर दोबारा पढऩा शुरू किया। फाइनली कोरोना महामारी के बीच नीट क्वालिफाई किया। ये कहानी है भानुप्रतापपुर में रहने वाली मोनिका भोयर की। जिसने लगातार दो साल ड्राप लेकर भी हार नहीं मानी और दूसरे प्रयास में एमबीबीएस की सीट हासिल कर रायपुर मेडिकल कॉलेज में एडमिशन लिया है। मोनिका कहती है जब टीनएज में हॉस्पिटल जाती थी तो मेल डॉक्टर के पास अपनी समस्या बताने में बहुत झिझक होती थी। बहुत सारी महिलाएं और युवतियां भी अपनी परेशानियों का शर्म के कारण उपचार नहीं करा पाती। इसलिए एमबीबीएस के बाद गायनोकोलॉजिस्ट बनकर ऐसी लड़कियों की मदद करना चाहती हूं।
एक समय ऐसा लगा जैसे मेरा सपना टूट जाएगा
मोनिका ने बताया कि नीट की तैयारी के लिए उसने पूरे एक साल ड्रॉप लेकर तैयारी की थी। एग्जाम सेंटर में सबकुछ ठीक चल रहा था। पहले अटेम्ट में उसे सारे प्रश्नों के जवाब भी याद थे। इसी बीच अचानक एक सवाल का जवाब हड़बड़ी में देने के चक्कर में ओएमआर शीट में दूसरे नंबर पर टिक कर दिया। उस गलती का एहसास तब हुआ जब पेपर साल्व करके टिक किए हुए उत्तरों की संख्या काउंट कर रही थी। ओएमआर शीट की उस एक गलती के कारण सारे सही जवाब गलत में तब्दील हो गए। उसी वक्त मैं रोने लग गई। जब रिजल्ट आया तो बहुत कम नंबर मिले थे। अंजाने में हुई उस गलती के कारण पूरा एक साल बर्बाद हो गया। तब से सीख ली कि कोई भी काम हड़बड़ी में नहीं करना है। दूसरे साल पैरेंट्स ने कहा कि अपना सपना टूटने मत दो। अच्छे मन से पढऩा शुरू करो। पैरेंट्स के मोटिवेशन की बदौलत मैं दूसरे साल पढऩे को तैयार हुई।
फेल होने के बाद भी नहीं बदला कोचिंग
सचदेवा न्यू पीटी कॉलेज में लगातार दो साल कोचिंग करने वाली मोनिका ने बताया कि उसने फेल होने के बाद भी कोचिंग नहीं बदला। सचदेवा के टीचर्स ने दूसरे साल दोगुने उत्साह के साथ मुझे तैयारी कराई। हर डाउट को उसी वक्त क्लीयर करते हैं। पढऩे का माहौल इतना अच्छा है कि सारी निगेटिविटी कुछ ही दिनों में पॉजिटिविटी में बदल जाती है। यही इस कोचिंग को दूसरों से अलग बनाती है। गेस्ट सेशन में सचदेवा से पढ़कर निकले हुए डॉक्टर जब क्लास में आते थे तो लगता था कि उनके सपने पूरे हो सकते हैं तो मेरे क्यों नहीं। खुद को उनकी जगह रखकर अपने आप को मोटिवेट किया।
जैन सर कहते हैं जब निराश हो अपने परिवार को याद करो
सचदेवा के डायरेक्टर चिरंजीव जैन सर की काउंसलिंग की मदद से मैं खुद को निराशा से बाहर निकाल पाई। मोनिका ने बताया कि एक दिन जैन सर ने कहा कि जब भी आप डिप्रेशन के शिकार होते हो तो एक बार अपने परिवारवालों को जरूर याद करोउनके चेहरों को याद करो जो आपसे सफलता की उम्मीद लगाए हुए लाखों रुपए खर्च करके आपको पढ़ा रहे है|जब उनके संघर्ष को याद करोगे तो निराशा अपने आप दूर हो जाएगीउनकी कही बातों को अमल किया और आज मैं सफल होकर अपनी सफेद कोर्ट का इंतजार कर रही हूं।(the states. news)

