भोपाल
मध्यप्रदेश पुलिस सामुदायिक पुलिसिंग के माध्यम से पुलिस और समाज के बीच विश्वास एवं सहभागिता को मजबूत करने के साथ ही बच्चों और किशोर-किशोरियों को सुरक्षित, जागरूक एवं आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। इसी उद्देश्य से वर्ष 2022 में प्रारंभ किया गया ‘सृजन’ कार्यक्रम वंचित वर्गों के किशोर-किशोरियों के सर्वांगीण विकास, आत्मविश्वास निर्माण और सुरक्षा जागरूकता का एक प्रभावी माध्यम बन रहा है। इस पहल के अंतर्गत बच्चों को आत्मरक्षा प्रशिक्षण के साथ जीवन कौशल, कानूनी अधिकारों, स्वास्थ्य, साइबर सुरक्षा एवं व्यक्तित्व विकास से संबंधित मार्गदर्शन दिया जाता है, ताकि वे स्वयं की सुरक्षा के प्रति सजग रहते हुए समाज की मुख्यधारा में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें।
इसी क्रम में 31 अक्टूबर 2026 को थाना कमला नगर, पुलिस विभाग एवं उदय संस्था के संयुक्त तत्वावधान में राज्य पशुपालन प्रशिक्षण संस्थान के ऑडिटोरियम, कोटरा, भोपाल में सृजन प्रमाण पत्र वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में लगभग 150 सृजन किशोर-किशोरियों, शक्ति समिति के सदस्यों एवं समुदाय के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विधायक भगवानदास सबनानी तथा विशिष्ट अतिथि डीआईजी सामुदायिक पुलिसिंग विनीत कपूर उपस्थित रहे। इनके साथ एसीपी मती अंकिता खातरकर, थाना प्रभारी कमला नगर सु निरुपा पाण्डेय, उप निरीक्षक संजय वर्मा, सृजन ट्रेनर कोर टीम के सूबेदार ऋतुराज वारीवा, गोविन्द पाल एवं अनुज तोमर सहित पुलिस अधिकारी-कर्मचारी एवं उदय संस्था की टीम उपस्थित रही।
मुख्य अतिथि विधायक भगवानदास सबनानी ने सृजन के किशोर-किशोरियों का उत्साहवर्धन करते हुए उनके आत्मविश्वास एवं व्यक्तित्व विकास की सराहना की। उन्होंने सृजन कार्यक्रम की गतिविधियों को प्रधानमंत्री जी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में शामिल किए जाने की बात कही। डीआईजी सामुदायिक पुलिसिंग विनीत कपूर ने विधायक सबनानी से सृजन कार्यक्रम की कार्यप्रणाली एवं उपलब्धियों को नीतिगत बैठकों में साझा करने का आग्रह किया, ताकि इस पहल का लाभ प्रदेश के अधिकाधिक वंचित वर्गों के बच्चों तक पहुंचाया जा सके।
कार्यक्रम में सृजन कोर टीम के सूबेदार ऋतुराज वारीवा ने योजना की पृष्ठभूमि एवं उद्देश्यों की जानकारी दी। सृजन ट्रेनर गोविन्द पाल ने कार्यक्रम की अब तक की यात्रा और इससे लाभान्वित किशोर-किशोरियों में आए सकारात्मक बदलावों के बारे में विस्तार से बताया। इस अवसर पर 80 किशोर-किशोरियों को अतिथियों द्वारा सृजन प्रमाण पत्र एवं सृजन पहचान पत्र वितरित किए गए। मुख्य अतिथि भगवानदास सबनानी को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। अंत में थाना प्रभारी सु निरुपा पाण्डेय ने अतिथियों एवं उपस्थितजनों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए किशोर-किशोरियों को उपलब्ध अवसरों का सदुपयोग कर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
सृजन कार्यक्रम : सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और व्यक्तित्व विकास की समग्र पहल
‘सृजन’ मध्यप्रदेश पुलिस की सामुदायिक पुलिसिंग की एक अभिनव पहल है, जिसे सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। इसका प्रमुख उद्देश्य आर्थिक एवं सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों, शहरी बस्तियों एवं अन्य वंचित क्षेत्रों के किशोर बालक-बालिकाओं को सुरक्षित वातावरण, समान अवसर और विकास के लिए आवश्यक कौशल उपलब्ध कराना है।
कार्यक्रम के अंतर्गत बच्चों को आत्मरक्षा एवं मार्शल आर्ट का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके साथ ही गुड टच-बैड टच, पॉक्सो अधिनियम, किशोर न्याय अधिनियम, बाल अधिकार, बाल श्रम एवं महिला-बाल हिंसा की रोकथाम जैसे विषयों पर जागरूक किया जाता है। जीवन कौशल, नेतृत्व क्षमता, अनुशासन, संवाद कौशल, स्वास्थ्य एवं पोषण, प्राथमिक उपचार तथा साइबर सुरक्षा से संबंधित जानकारी भी दी जाती है। इस पहल का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य बच्चों के मन में पुलिस के प्रति विश्वास विकसित करना है, ताकि वे किसी समस्या या असुरक्षा की स्थिति में पुलिस से सहजता से संपर्क कर सकें। पुलिस एवं सामाजिक संस्थाओं के समन्वय से संचालित यह कार्यक्रम बच्चों को केवल सुरक्षा संबंधी जानकारी ही नहीं देता, बल्कि उनमें निर्णय लेने की क्षमता, आत्मविश्वास और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना भी विकसित करता है।
आगामी प्रभाव एवं विस्तार की संभावनाएं
सृजन कार्यक्रम के माध्यम से प्रशिक्षित किशोर-किशोरियां अपने परिवार एवं समुदाय में भी सुरक्षा, अधिकारों और जागरूकता का संदेश पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इससे बाल अपराध, शोषण, हिंसा एवं असुरक्षा जैसी परिस्थितियों के प्रति समय रहते सजगता विकसित करने में मदद मिलेगी। साथ ही, पुलिस और समुदाय के बीच संवाद एवं विश्वास मजबूत होगा तथा बच्चों को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़कर उनके व्यक्तित्व विकास और बेहतर भविष्य के अवसर बढ़ेंगे।
इस पहल को नीतिगत स्तर पर साझा करने एवं प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में विस्तारित करने से अधिकाधिक वंचित बच्चों तक प्रशिक्षण और मार्गदर्शन पहुंचाया जा सकेगा। मध्यप्रदेश पुलिस का सामुदायिक पुलिसिंग के माध्यम से प्रयास है कि बच्चे स्वयं को सुरक्षित महसूस करें, अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनें और आत्मविश्वास के साथ समाज के जिम्मेदार नागरिक के रूप में आगे बढ़ें।


